माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम भारतीय महिला: बछेंद्री पाल का जीवन परिचय


Famous People: Bachendri Pal Biography [Post ID: 13335]



बछेंद्री पाल का जीवन परिचय: (Biography of Bachendri Pal in Hindi)

बछेंद्री पाल दुनिया की सबसे ऊंची चोटी ‘माउंट एवरेस्ट’ पर चढ़ने वाली प्रथम भारतीय महिला हैं। बछेंद्री पाल विश्व के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर ‘माउंट एवरेस्ट’ को छूने वाली पांचवीं महिला पर्वतारोही हैं। इन्होंने यह कारनामा 23 मई, 1984 के दिन 1 बजकर 7 मिनट पर किया था। बछेंद्री पाल का जन्म उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में सन् 1954 को हुआ था।

Quick Info about First Indian woman to climb Mount Everest:

नाम बछेंद्री पाल
जन्म तिथि 24 मई 1956
जन्म स्थान बम्पा, उत्तरांचल, (भारत)
निधन तिथि 05 मई 2017
उपलब्धि माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम महिला
उपलब्धि वर्ष 1984

बछेंद्री पाल से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य: (Important Facts Related to Bachendri Pal)

  1. इनके पिता का नाम किशनपाल सिंह और माता का नाम हंसा देवी है।
  2. उन्होंने स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद शिक्षक की नौकरी प्राप्त करने के लिए बी.एड. की परीक्षा भी उतीर्ण की थी।
  3. 1982 में ही उन्होंने संस्थान में प्रशिक्ष्ण के दौरान 21,900 फीट उचे गंगोत्री शिखर और 19,091 फीट ऊँचे रुदूगैरा शिखर पर सफलतापूर्वक आरोहण किया था।
  4. साल 1984 में देश का चौथा एवरेस्ट अभियान शुरू हुआ। इस अभियान में जो टीम बनी थी, उसमें बछेंद्री समेत 7 महिलाओं और 11 पुरुषों को शामिल किया गया था। इस टीम के द्वारा 23 मई 1984 को 29,028 फुट (8,848 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत ‘माउंट एवरेस्ट’ पर भारत का तिरंगा लहराया गया। इसके साथ ही एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक क़दम रखने वाले वे दुनिया की 5वीं महिला बनीं थी।
  5. उन्होने वर्ष 1994 में गंगा नदी में हरिद्वार से कलकत्ता तक 2,500 किमी लंबे नौका अभियान का नेतृत्व भी किया है।
  6. साल 1990 में बछेन्द्री पाल का नाम ‘गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड’ में शामिल किया गया था।
  7. भारत सरकार द्वारा सन 1985 में उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया था।
  8. वर्ष 1986 में भारत सरकार ने इन्हें अपने प्रतिष्ठित खेल सम्मान ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया था।
  9. भारत सरकार ने बछेन्द्री पाल को वर्ष 1994  में ‘नेशनल एडवेंचर अवार्ड’ से नवाजा था।
  10. मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा 2013-14 में उन्हें “पहला वीरांगना लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय सम्मान” भी दिया गया है।

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