आजाद भारत के पहले कानून मंत्री: भारत रत्न भीमराव अम्बेडकर का जीवन परिचय


Famous People: Bhimrao Ambedkar Biography



भीमराव अम्बेडकर का जीवन परिचय: (Biography of Bhimrao Ambedkar in Hindi)

भीमराव अम्बेडकर जी एक बहुजन राजनीतिक नेता और एक बौद्ध पुनरुत्थानवादी भी थे। उन्हें बाबासाहेब के नाम से भी जाना जाता है। अम्बेडकर ने अपना सारा जीवन हिन्दू धर्म की चतुवर्ण प्रणाली और भारतीय समाज में सर्वत्र व्याप्त जाति व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष में बिता दिया था। उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और दलितों के खिलाफ सामाजिक भेद भाव के विरुद्ध अभियान चलाया। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री एवं भारतीय संविधान के प्रमुख वास्तुकार थे।

Quick Info About Bhimrao Ambedkar in Hindi

नाम भीमराव रामजी अम्बेडकर
जन्म तिथि 14 अप्रैल, 1891
जन्म स्थान इंदौर जिला, मध्य-प्रदेश (भारत)
निधन तिथि 06 दिसम्बर 1956
उपलब्धि आजाद भारत के पहले कानून मंत्री
उपलब्धि वर्ष 1947

भीमराव अम्बेडकर से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य: (Important Facts Related To Bhimrao  Ambedkar)

  1. भीमराव अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू, इंदौर जिला मध्य-प्रदेश में हुआ था।
  2. भीमराव अम्बेडकर रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई मुरबादकर की 14वीं व अंतिम संतान थे।
  3. भीमराव अम्बेडकर करीब 09 भाषाएँ जानते थे। उन्होनें 21 साल तक लगभग सभी धर्मों की पढ़ाई भी कर ली थी।
  4. अंबेडकर के पास कुल 32 डिग्री थी। वो विदेश जाकर अर्थशास्त्र में पीचडी (P.H.D) करने वाले पहले भारतीय थे।
  5. भीमराव अम्बेडकर करीब 9 भाषाएँ जानते थे। उन्होनें 21 साल तक लगभग सभी धर्मों की पढ़ाई भी की थी।
  6. सन् 1956 में बाबासाहेब नागपुर में एक समारोह में अपने दो लाख अछूत साथियों के साथ हिन्दू धर्म त्यागकर बौद्ध बन गए थे।
  7. आजकल फैक्ट्रियों में 8 घंटे काम होता है ये सब भीमराव की ही देन है। इससे पहले 12-14 घंटे काम करना पड़ता था
  8. भीमराव अंबेडकर संविधान निर्माण करने वाली समिति के अध्यक्ष थे, इसलिए इनको भारतीय संविधान का निर्माता भी कहा जाता है।
  9. डॉ. भीम राव अंबेडकर जी को मरणोपरांत वर्ष 1990 में भारत के सर्वोच्‍च सम्‍मान ‘भारत रत्‍न’ से सम्‍मानित किया गया था।
  10. आखिरी दिनों में बी. आर. अंबेडकर डायबिटिज़ से बुरी तरह बीमार हो गए थे। 06 दिसंबर 1956 को दिल्ली में उनका निधन हो गया था, तथा मरने के 34 साल बाद इन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
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