भारत की पहली महिला डॉक्टर: रखमाबाई राऊत का जीवन परिचय


Famous People: Rukhmabai Raut Biography [Post ID: 13967]



रखमाबाई राऊत का जीवन परिचय: (Biography of Rukhmabai Raut in Hindi)

रखमाबाई राऊत भारत की प्रथम महिला चिकित्सक थीं। रखमाबाई का जन्म मुंबई में 22 नवंबर 1864 को मुंबई, महाराष्ट्र (ब्रिटिश भारत) में एक बढ़ई समुदाय में हुआ था। इंटरनेट सर्च कंपनी गूगल इंडिया ने 22 नवम्बर, 2017 को रखमाबाई राउत के 153वें जन्मदिन पर डूडल के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की है। इस डूडल में रखमाबाई को साड़ी में स्टेथोस्कोप के साथ दिखाया गया हैं, उनके पीछे वार्ड का चित्र है, जिसमें मरीज लेटे हुए और नर्स काम करती हुई दिखाई दे रही हैं। वह एक बेहतरीन डॉक्टर के साथ-साथ प्रखर नारीवादी महिला भी थीं।

Quick Info About First Indian Practising Women Doctor:

नाम रखमाबाई राऊत
जन्म तिथि 22 नवम्बर 1864
जन्म स्थान मुंबई, महाराष्ट्र (ब्रिटिश भारत)
निधन तिथि 25 सितंबर 1955
उपलब्धि भारत की पहली महिला डॉक्टर
उपलब्धि वर्ष 1894

रखमाबाई राऊत से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य: (Important Facts Related to Rukhmabai Raut in Hindi)

  1. उनके पिता का नाम जनार्दन पांडुरंग और माता का नाम जयंतिबाई था।
  2. बाल विवाह के प्रथा के अनुसार मात्र 11 वर्ष की आयु में उनका विवाह दादजी से कर दिया गया था।
  3. भीकाजी ने उनकी शिक्षा रुकवाकर उनको अपने साथ रहने पर मजबूर किया। इस मजबूरी के बाद दोनो पति पत्नी में खटपट शुरू हो गई थी।
  4. उनके पति ने साल 1884 में उन्हें साथ रखने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी कि रखमाबाई उनके साथ नहीं रहती हैं तब कोर्ट ने रखमाबाई से कहा कि वह या तो अपने पति के साथ रहें या जेल जाएं। रखमाबाई ने जवाब में कहा कि पति के साथ रहने से अच्छा है कि वह जेल में रहें।
  5. वर्ष 1888 में वह कानूनी रूप से वो अपने पति से वर्ष अलग हो गईं और फिर मेडिसिन की पढ़ाई के लिए इंगलैंड चली गईं।
  6. उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ मेडिसिन से डॉक्टरी की डिग्री हासिल की थी।
  7. साल 1894 में में डॉक्टर बन कर वापस आईं और सूरत, राजकोट और मुंबई में 35 वर्षों तक रहीं और प्रैक्टिस किया।
  8. रखमाबाई एक डॉक्टर के अलावा एक बेहतरीन समाजसेवी के रूप में भी कई काम किए थे, उन्होंने बाल विवाह और पर्दा प्रथा का भी जमकर विरोध कियाउन्होंने बाल विवाह और पर्दा प्रथा का भी जमकर विरोध किया।
  9. उन्ही के अथक प्रयासों के बाद ‘एज ऑफ कॉन्सेंट एक्ट, 1891’ नामक कानून लागू हुआ था।
  10. उनकी मृत्यु 91 वर्ष की आयु में 25 सितंबर, 1991 में हुई थी।

 

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