बेलूर मठ, हावड़ा (पश्चिम बंगाल) की जानकारी और ऐतिहासिक तथ्य


Famous Things: Belur Math Howrah West Bengal Gk In Hindi Quick Info, History and Facts [Post ID: 46496]



बेलूर मठ, हावड़ा (पश्चिम बंगाल) के बारे में जानकारी: (Information about Belur Math, Howrah, West Bengal GK in Hindi)

भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के तट पर स्थित बेलूर मठ में देश के रामकृष्ण परमहंस के परम शिष्य और देश के महान आध्यात्मिक संत स्वामी विवेकानंद की यादें संजोई हैं। स्वामी विवेकानंद की अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस से मुलाकात दक्षिणेश्वर में हुई थी। यह दुनिया का 5वां सबसे विशाल हिन्दू धर्मस्थल है। यहाँ पर माता आद्याकाली की उपासना की जाती है। बेलूर मठ न सिर्फ कलकत्ता के महत्वपूर्ण संस्थानों में से एक है, बल्कि विश्व के आधात्मिक अभिरूचि रखने वाले सभी लोगों के लिए एक बहुत ही पवित्र स्थल है।

 बेलूर मठ का संक्षिप्त विवरण: (Quick info about Belur Math)

स्थान बेलूर, हावड़ा, पश्चिम बंगाल (भारत)
निर्माणकाल 1897 ई.
निर्माता स्वामी विवेकानन्द
प्रकार मठ

बेलूर मठ  का इतिहास: (Belur Math History in Hindi)

हावड़ा जिले के बेलूर में स्थित इस मठ की स्थापना विश्व धर्म परिषद् के भारतीय प्रतिनिधि स्वामी विवेकानन्द द्वारा 1897 में की गई थी। बेलूर मठ रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है जिसकी शाखाएं अब दुनिया भर में फैली हुई हैं। स्वामी विवेकानन्द ने 1 मई, 1897 ई. को रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी। स्वामी विवेकानंद ने साल 1898 से बेलूर मठ को अपना स्थायी निवास स्थान बनाया था। वे कक्ष की ऊपरी मंजिल पर बने एक कमरे में रहते थे। विश्व को आध्यात्म का नया रास्ता दिखाने वाले और विश्व मंच पर भारत का डंका बजाने वाले स्वामी विवेकानंद ने 40 वर्ष से भी कम आयु में ही यहीं पर 04 जुलाई 1902 को समाधि ली थी।

बेलूर मठ के बारे में रोचक तथ्य: (Interesting facts about Belur Math in Hindi)

  • हावड़ा में हुगली नदी के तट पर बने इस मठ के ठीक सामने दक्षिणेश्वर का काली मंदिर स्थित है।
  • 40 एकड़ की भूमि पर अवस्थित इस मठ के मुख्य द्वार से प्रवेश करने पर दाहिनी और बाईं तरफ आश्रम द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थाएं भी बनी हुई हैं, जो अब विश्वविद्यालय में बदल चुकी हैं।
  • यह मठ अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है जिसमे हिन्दू, इस्लामी और ईसाई तत्वों का मिश्रण देखने को मिलता है, जो सभी धर्मो की एकता का प्रतीक है।
  • स्वामी विवेकानंद का निवास कक्ष इस मठ का सबसे प्रमुख आकर्षण है। नदी के तट पर बने इस कक्ष में स्वामी विवेकानंद 1863 से 1902 तक रहे थे। इस कक्ष में विवेकानंद द्वारा उपयोग की गई वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया है। यह कक्ष सुबह 6 से 12 बजे तक फिर शाम को 4 से 7 बजे तक लोगों के दर्शन के लिए खुला रहता है।
  • मठ के मुख्य परिसर के निकट, रामकृष्ण मिशन के कुछ शिक्षा संस्थानों के परिसर भी मौजूद हैं, जिनमें विद्यामंदिर, शिल्पमन्दिर, वेद विद्यालय तथा स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय के परिसर शामिल हैं।
  • इस मठ के मुख्य प्रांगण में स्वामी रामकृष्ण परमहंस, शारदा देवी और स्वामी ब्रह्मानन्द की देहाग्निस्थल पर उनकी समाधियाँ व मन्दिर अवस्थित है।
  • इसके आलावा मठ के अन्दर स्वामी विवेकानंद जी के साथ उनके 16 सोलह शिष्यों के अवशेष मौजूद हैं।
  • उनके मठ में किसी महिला को जाने की अनुमति नहीं थी। एक बार जब विवेकानंद काफी बीमार हो गए तो उनके शिष्य उनकी मां को बुला लाए। उनको देखकर विवेकानंद चिल्लाए, ‘तुम लोगों ने एक महिला को अंदर आने की अनुमति कैसे दी? मैं ही हूं जिसने यह नियम बनाया और मेरे लिए ही इस नियम को तोड़ा जा रहा है।’
  • यहां पर एक संग्रहालय भी बनाया गया है, जो रामकृष्ण मिशन के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान करता है।
  • मठ परिसर में एक पुस्तकालय भी है ,जहां आध्यात्म से जुडी 20 हजार से ज्यादा पुस्तके उपलब्ध हैं। इसके साथ ही आश्रम परिसर में एक चैरिटेबल चिकित्सालय का भी संचालन किया जाता है।
  • इस मठ में कई प्रकार के खाद्य उत्पादों का निर्माण भी किया जाता है जिनमें सरसों की चटनीअचारजूस और दूसरी खाद्य वस्तुएं देखी जा सकती हैं। रामकृष्ण मिशन सेवा संघ द्वारा उत्पादित इस वस्तुओँ की कीमत बाजार की अपेक्षा काफी कम होती हैं।
  • इस मठ में आने वाले पर्यटकों को यहाँ पर शाम के समय होने वाली आरती जरुर देखनी चाहिए।
  • मठ के अंदर एक विशाल हरित लॉन भी है, जो यहां आने वाले पर्यटकों का मन मोह लेता है। रविवार और छुट्टियों के दिन बड़ी संख्या में लोग बेलूर मठ घूमने के लिए पहुंचते हैं।
  • इस मठ में प्रतिवर्ष रामकृष्ण परमहंस, सारदा देवी तथा स्वामी विवेकानंद के जन्मोत्सव व पुण्यतिथि पर विभिन्न धार्मिक समारोहों का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही दुर्गा पूजा के दौरान विशेष रूप से महाष्टमी कुमारीपूजन को देखने हेतु हर साल यहाँ बहुत बड़ी संख्या में लोग आते हैं।
  • बेलूर रेलवे स्टेशन इस मठ का सबसे नजदीकी स्टेशन है यहाँ से आश्रम की दूरी मात्र दो किलोमीटर है। रेलवे स्टेशन से आप बैटरी रिक्शा या ऑटो द्वारा केवल 10 रुपये किराया देकर यहाँ पहुँच सकते है।
  • यहाँ अपर साल 2007 में बेलूरमाथ रेलवे स्टेशन का भी उद्घाटन किया गया था, जो बेलूरमाथ मंदिर को समर्पित है।
  • बेलूर मठ अप्रैल से सितंबर माह तक सुबह 6 बजे से सुबह 11:30 बजे तक और शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे शाम तक खुला रहता है, जबकि अक्टूबर से मार्च माह तक सुबह 6:30 बजे से सुबह 11:30 बजे तक और अपराह्न 3:30 बजे से शाम 6 बजे तक खुलता है।

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