चिदंबरम मंदिर, तमिलनाडु के बारे जानकारी: (Chidambaram Temple, Tamil Nadu GK in Hindi)

भारतीय राज्य तमिलनाडु में स्थित नटराज मंदिर को चिदम्‍बरम मंदिर और थिल्लई नटराज मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। भगवान् शिव को समर्पित यह हिन्दू मंदिर पुदुच्चेरी, (पहले पॉन्डिचेरी) से दक्षिण की ओर 78 किलोमीटर की दूरी पर और कुड्डालोर जिले के उत्तर की ओर 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भारत में भगवान शिव के विभिन्‍न स्‍वरूपों के साथ उनके अनोखे व खूबसूरत मंदिर बने हुए है, परन्तु चिदम्‍बरम में स्थित नटराज मंदिर का अलौकिक सौंदर्य देखते ही बनता है। चिदंबरम, शहर और मंदिर के नाम का शाब्दिक अर्थ है “ज्ञान का वातावरण” या “विचारों में रँगा हुआ”, मंदिर की वास्तुकला कला और आध्यात्मिकता, रचनात्मक गतिविधि और परमात्मा के बीच संबंध का प्रतीक है।

चिदंबरम मंदिर का संक्षिप्त विवरण: (Quick Info about Chidambaram Temple)

स्थान चिदंबरम, तमिलनाडु (भारत)
निर्माण काल ‎400 ई.
निर्माता चोल वंश
देव भगवान शिव
समर्पित नटराज
प्रकार मंदिर
स्थापत्य शैली द्रविड़ वास्तुकला

चिदंबरम मंदिर का इतिहास: (Chidambaram Temple History in Hindi)

इस मंदिर के निर्माण के कोई प्रमाणित साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, परन्तु सातवीं शताब्दी से लेकर 16वीं सदी तक प्राचीन राजवंशो जिनमें पल्लव, चोला, पंड्या, विजयनगर, चेरा वंश के राजाओं तथा स्थानीय लोगो ने इस मन्दिर में समय समय पर बड़े-बड़े बदलाव किये थे। इस मंदिर के स्तंभों और दीवारों पर नटराज की नृत्य मुद्रा की प्रतिमाओं को नाट्यशास्त्रीय आधार पर उत्कीर्ण करवाया गया था।

चिदंबरम मंदिर के बारे में रोचक तथ्य: (Interesting Facts about Chidambaram Temple in Hindi)

  1. इस मंदिर का निर्माण द्रविड़ वास्तुशैली में किया गया है, जो दक्षिण भारत के मंदिरों में अद्वितीय एवं अप्रतिम हैं।
  2. यह मंदिर तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से 245 कि.मी. दूर चेन्नई-तंजावुर मार्ग पर स्थित है।
  3. शहर के मध्य में स्थित इस मंदिर का क्षेत्रफल 40 एकड़ (106,000 वर्ग मीटर) है।
  4. इस मंदिर में भीतर जाने के लिए 9 दरवाजे बने हुए हैं, जिनमे से 4 पर ऊंचे पगोडा या गोपुरम बने हुए हैं। इन गोपुरम में पूर्व, दक्षिण, पश्चिम और उत्तर की ओर 7 स्तर हैं।
  5. इन गोपुरम के नीचे 40 फुट ऊँचे, 5 फुट मोटे ताँबे की पत्ती से जुड़े हुए पत्थर के चौखटे हैं।
  6. मंदिर का गर्भगृह लगभग 44 मीटर (144 फीट) की ओर वाला एक वर्ग है।
  7. नटराज मंदिर के इसी भवन में गोविंदराज और पंदरीगावाल्ली के मंदिर भी बने हुए है।
  8. मंदिर के शिखर पर बने कलश सोने के हैं। और मंदिरों में परिक्रमा पथ, मण्डपा के ढले हुए पठार और नटराज मंदिर के तीर्थ हॉल स्तंभों को नर्तकियों और संगीतकारों को दिखाते हुए उभरे चित्र बने हुए हैं
  9. मंदिर के पूर्वी भाग में बने गोपुरम में भारतीय नृत्य शैली भरतनाट्यम की संपूर्ण 108 मुद्रायें चिन्हित हैं।
  10. मंदिर के भवन में एक सरोवर भी है, जिसे सिवगंगा कहते है। यह विशाल सरोवर मंदिर के तीसरे गलियारे में है जो देवी सिवगामी के धार्मिक स्थल के ठीक विपरीत है।
  11. मंदिर के अन्दर कई काँस्य की प्रतिमाएँ मौजूद हैं, जो सम्भवतः 10वीं-12वीं सदी के चोल काल की हैं।
  12. मंदिर के पूर्वी दिशा में एक कुआं है जहां से मंदिर में पूजा के लिए जल लिया जाता है, जिसका नाम परमानन्द कूभम चित सभई है।
  13. इस मंदिर की एक खास बात यह है कि यहाँ बने अधिकतर मंदिर रथ के रूप में बनाये गए है।
  14. मंदिर के दक्षिण गोपुरम में सोककेसियन थिरुनीलई एझुगोपुरम का निर्माण किया गया था, जिसका निर्माण पांड्य राजा द्वारा किया गया था, जिसकी पहचान छत पर बिखरे राजवंश की मछली प्रतीक की उपस्थिति से हुई थी।
  15. मंदिर के सभी गोपुर मुख्य रूप से कंगनी के सभी रास्ते को काटते हुए बड़े पत्थर के बने होते हैं। इसके ऊपर मंडप की परतों के साथ एक पत्थर, ईंट और प्लास्टर की संरचना है।
  16. इस मंदिर को लेकर यह मान्‍यता है कि भगवान शिव ने अपने आनंद नृत्य की प्रस्तुति इस जगह पर की थी।
  17. इस मंदिर में बनी शिव मूर्ति की सबसे खास बात यह है कि यहां मौजूद नटराज की प्रतिमा गहने और आभूषणों से लदी हुई हैं। ऐसी शिव मूर्तियां भारत में कम ही देखने को मिलती हैं।
  18. इस मंदिर की एक अनोखी विशेषता मुख्य देवता के रूप में भगवान नटराज की बेजल वाली छवि है। यह भगवान शिव को कुतु – भरत नाट्यम के गुरु के रूप में दर्शाता है और उन कुछ मंदिरों में से एक है जहां भगवान शिव का प्रतिनिधित्व क्लासिक, ऐनिकोनिक लिंगम के बजाय एक मानवजनित मूर्ति द्वारा किया जाता है ।
  19. मंदिर की कार का उपयोग साल में दो बार जुलूसों के लिए किया जाता है, जहां त्योहारों के दौरान इसे कई हजार भक्तों द्वारा खींचा जाता है
  20. हिन्दू साहित्य के अनुसार यह मंदिर उन पांच पवित्र शिव मंदिरों में से एक है, जो प्राकृति के 5 महत्वपूर्ण तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है। चिदंबरम मंदिर आकाश का प्रतिनिधित्व करता है। वहीं आंध्र प्रदेश में कालहस्ती मंदिर- वायु, थिरुवनाईकवल जम्बुकेस्वरा- जल, कांची एकाम्बरेस्वरा- पृथ्वी

चिदंबरम मंदिर कैसे पहुंचे (How to reach the temple of Chidambaram):

मंदिर का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन चिदंबरम रेलवे स्टेशन हैं। और रेलवे स्टेशन से मंदिर 1.6 किमी की दूरी पर स्थित है।और थिरुवन्नामलाई अरुणाचलेस्वरा- अग्नि को प्रतिनिधित्व प्रदान करते हैं।                                                                                                                              हवाई मार्ग द्वारा इस मंदिर तक जाने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट चेन्नई है। यहां से बस या ट्रेन के माध्यम से चिदंबरम तक आसानी से जा सकते है।

This post was last modified on August 6, 2019 9:41 am

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