सिटी पैलेस, उदयपुर (राजस्थान)

सिटी पैलेस (उदयपुर) के बारे में जानकारी: (Information about City Palace, Udaipur (Rajasthan) GK in Hindi)

भारत का सबसे शाही और अद्भुत राज्य राजस्थान अपनी भौगोलिक विभिन्नता, सांकृतिक वातावरण और ऐतिहासिक स्थलों के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। राजस्थान में दो सिटी पैलेस है एक जयपुर में स्थित है तो दूसरा राजस्थान के सबसे शाही नगर उदयपुर में स्थित है। उदयपुर का सिटी पैलेस जयपुर में स्थित सिटी पैलेस से काफी भिन्न है, यह महल जयपुर में स्थित महल से काफी समय पहले बनाया गया था।

सिटी पैलेस (उदयपुर) का संक्षिप्त विवरण: (Quick info about City Palace (Udaipur))

स्थान उदयपुर, राजस्थान (भारत)
निर्माणकाल 16वीं शताब्दी
निर्माता उदय सिंह II
प्रकार महल

सिटी पैलेस (उदयपुर) का इतिहास: (City Palace (Udaipur) history in Hindi)

इस विश्व प्रसिद्ध अद्भुत महल का निर्माण लगभग 400 वर्षो पहले महाराणा उदय सिंह II और उनके उत्तराधिकारी महाराणा द्वारा किया गया था। वर्ष 1537 ई. में महाराणा उदय सिंह II ने चित्तोढ़ में मेवाढ़ साम्राज्य की स्थापना की थी, परंतु उस समय उन्हें अपने पहले किले को मुगलों के हाथो में जाता देखता रहना पड़ा था इसलिए उन्होंने बाद में पिचोला झील के पास एक स्थान को चुना जोकि वनों, झीलों और अरावली पहाड़ियों द्वारा सभी तरफ से अच्छी तरह से संरक्षित था। वर्ष 1572 ई. में उदय सिंह की मौत के बाद उनके बेटे महाराणा प्रताप ने उदयपुर की सत्ता को संभाला हालांकि 1576 ई. में हल्दीघाटी युद्ध में वह मुगल सम्राट अकबर से पराजित हो गये जिसके बाद उदयपुर पर मुगलो का शासन चलने लगा था। अकबर की मौत के बाद मेवाढ़ को महाराणा प्रताप के पुत्र अमर सिंह प्रथम को जहांगीर ने वापस दे दिया था। वर्ष 1761 के बाद में मराठों के हमलों के उदयपुर में साक्ष्य आज भी वहाँ के खंडहरो में देखे जा सकते है। 18वीं शताब्दी में यह किला और क्षेत्र अंग्रेजो के अधीन आ गया था जिसे स्वतंत्रता के बाद भारत में मिला लिया गया था।

सिटी पैलेस (उदयपुर) के बारे में रोचक तथ्य: (Interesting facts about City Palace (Udaipur) in Hindi)

  • इस विश्व प्रसिद्ध महल का निर्माण कार्य 16वीं शताब्दी में मेवाढ़ के प्रसिद्ध शासक उदय सिंह II द्वारा शुरू किया गया था, जिसे बाद में राजा के पुत्र महराणा प्रताप ने पूरा करवाया था।
  • इस महल पर कई साम्राज्यों के शासको ने हमला किया था, जिस कारण वर्ष 1818 ई. में यहाँ के शासक ने मराठाओ के बढ़ते आक्रमण को देखकर यह किला और क्षेत्र अंग्रेजो के साथ एक संधि कर उन्हें सौंप दिया था, जिसे 1948 के आस-पास भारत में मिला लिया गया था।
  • यह महल भारत के सबसे ऊँचे और विशालका्य महलो में से एक है, इस महल को एक 598 मीटर ऊँचे पठार पर बनाया गया था, यह महल लगभग 244 मीटर लंबा और 30.4 ऊँचा है।
  • इस महल का निर्माण वर्ष 1559 ई. में मेवाढ़ के प्रसिद्ध सिसोदिया शासको ने करवाया था, इस महल का निर्माण लगभग 76 से अधिक सिसोदियाओ की पीढियों ने करवाया था।
  • इस महल के निर्माण में प्रमुख योगदान उदय सिंह II ने दिया था जिन्होंने इसके भीतर और 11 छोटे-छोटे अलग महलो का निर्माण करवाया था।
  • इस महल में स्थित द्वारो को “पोल” कहा जाता था, इस महल का सबसे प्रमुख द्वार “बड़ी पोल” है जोकि इस महल के विशाल आंगन की ओर जाता है।
  • इस महल में स्थित अन्य प्रमुख द्वारो में से ‘ट्रिपोलिया पोल’ है जोकि 3 मेहराबदार द्वारो का मिश्रण है, इसका निर्माण वर्ष 1725 ई. में करवाया गया था।
  • इस महल के अंदर सबसे सर्वोच्च प्रांगण इसका अमर विलास महल है जो असल में एक ऊंचा बगीचा है। जो वर्गाकार में बनाया गया है जिसमे संगमरमर के टबो का भी उपयोग किया गया है। यह मुगल शैली में एक आनंद मंडप के रूप में बनाया गया था।
  • इस महल के भीतर स्थित “बड़ी महल” (ग्रेट पैलेस) जिसे गार्डन पैलेस भी कहा जाता है, वह एक 27 मीटर ऊँची उच्च प्राकृतिक चट्टान के केंद्रीय महल में स्थित है। यह महल बहुमंजिला है अथवा इस महल में जगदीश मंदिर, स्विमिंग पूल इत्यादि चीजे सम्मिलित है।
  • इस महल परिसर में स्थित भीम विलास एक गैलरी है जिसमें लघु चित्रों का संग्रह मौजूद है जो राधा-कृष्ण की वास्तविक जीवन की कहानियों को दर्शाते है।
  • इस महल में स्थित चीनी चित्रशाला (चीनी कला) चीनी और डच सजावटी टाइल्स के प्रदर्शन के लिए यहाँ पर दर्शाई जाती है।
  • इस महल के परिसर में स्थित दिलखुशा महल (जॉय महल) भारत के सबसे खुबसुरत महलो में से एक है जिसका निर्माण वर्ष 1620 ई में किया गया था।
  • दरबार हॉल को वर्ष 1909 ई. में फतेहप्रकाश पैलेस के भीतर राज्य भोज और बैठकों जैसे आधिकारिक कार्यों के लिए एक स्थान के रूप में बनाया गया था।
  • इस महल के परिसर में फतेप्रकाश पैलेस जो अब एक लक्जरी होटल है, इसमें एक क्रिस्टल गैलरी है जिसमें क्रिस्टल कुर्सियां, ड्रेसिंग टेबल, सोफा, टेबल, कुर्सियां और बिस्तर, क्रॉकरी, टेबल फव्वारे शामिल हैं जिनका उपयोग कभी नहीं किया गया।
  • फतेप्रकाश पैलेस में स्थित वस्तुओं का आदेश महाराणा सज्जन सिंह ने वर्ष 1877 में लंदन के एफ एंड सी ओस्लर एंड कंपनी को दिया था जीसके तुरंत बाद उनकी मृत्यु हो गई जिसके बाद इन वस्तुओ को लगभग 110 कशो तक उपयोग में नही लाया गया था।
  • इस महल में स्थित मोर चौक (मोर वर्ग महल) इसकी सबसे प्रमुख संरचना है क्यूंकि इसमें इसमें स्थित मोरो की मूर्तियों को 5000 से अधिक टुकड़े के साथ तैयार किया गया था, जो हरे, सोने और नीले रंग के रंगों में चमकते है।
  • इस महल में स्थित शीश महल का निर्माण वर्ष 1716 ई. में महाराणा प्रताप द्वारा अपनी पत्नी महारानी अजाबड़े के लिए बनाया गया था।
  • वर्ष 1974 ई. में इस महल परिसर के सबसे सुंदर महलो में से एक “जनाना महल” (महिलाओं चैंबर) को एक संग्रहालय के रूप में परिवर्तित कर दिया गया था।
  • इस महल परिसर के भीतर कई प्रमख महल स्थित है जिनमे से कृष्णा विलास, रंग भवन महल, लक्ष्मी विलास और मनक महल जैसी संरचनाये प्रमुख है।

This post was last modified on August 4, 2019 1:07 pm

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