फ़तेहपुर सीकरी, उत्तर प्रदेश

फ़तेहपुर सीकरी के बारे जानकारी: (Fatehpur Sikri Uttar Pradesh GK in Hindi)

फ़तेहपुर सीकरी भारत के सबसे राज्य उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध शहर आगरा जिले में बसा एक क़स्बा है। यह आगरा से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह भारत की मुगलकालीन वास्तुकला का एक बहुत ही सुन्दर चित्रण है। फतेहपुर सिकरी में ही अकबर ने अपने नवरत्नों को बनाया था। ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फतेहपुर सीकरी का निर्माण मुगल बादशाह अकबर द्वारा सोलहवीं सदी में करवाया था।

फ़तेहपुर सीकरी का संक्षिप्त विवरण: (Quick info about Fatehpur Sikri)

स्थान आगरा, उत्तर प्रदेश (भारत)
निर्माण 16वीं सदी
निर्माता (किसने बनबाया) अकबर
प्रकार सांस्कृतिक
नियंत्रण-कर्ता उत्तर प्रदेश सरकार

फ़तेहपुर सीकरी का इतिहास: (Fatehpur Sikri History in Hindi)

प्राचीनकाल में से विजयपुर सीकरी के नाम से जाना जाता था, लेकिन 1569 में सम्राट अकबर ने इस पर कब्ज़ा कर लिया था और 1571 से 1585 तक फतेहपुर सिकरी मुग़ल साम्राज्य की राजधानी रही। अकबर ने चित्तौड़ और रणथंबोर पर फतेह प्राप्त करने के बाद अपनी राजधानी को 23 मील (37 किलोमीटर) दूर सूफी संत सलीम चिष्टि के पास स्थानांतरित करने की सोची। वही उन्होंने एक नए शहर को बसाने की योजना बनाई, योजना बनाने में कुल 15 साल लग गए और बाद में अकबर ने कई सरे शाही महल, हरम, कोर्ट, मस्जिद, वैयक्तिक महल और इमारतो का निर्माण करवाया। अकबर ने नए  शहर का नाम भी फतेहबाद रखा। फतेह एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ “विजय प्राप्त करना है” और बाद में फतेहबाद का नाम बदलकर फतेहपुर सिकरी कर दिया गया था।

इतिहासकारो के अनुसार ऐसा माना जाता है कि अकबर संतान प्राप्ति के लिए अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह गए थे और वह उनकी मुलाकात सूफी फकीर शेख सलीम चिश्ती से हुई। फकीर ने अकबर से कहा बेटा अगर तू मेरे ठहरने का इंतजाम कर दे, तो  तेरी सभी मुरादें पूरी हो जायेंगी। उन्होंने ने फकीर शेख सलीम चिश्ती के रहने और खाने का इंतजाम सीकरी में ही करवा दिया। कुछ समय बाद अकबर की पत्नी जोधाबाई गर्भवती हो गईं, जिसे बाद उन्हें पुत्ररत्न की प्राप्ति हई। पुत्र प्राप्ति से खुश होकर अकबर ने खुश होकर कहा कि जहां मेरे पुत्र ने जन्म लिया है, मैं वहां एक नया नगर बसाउंगा। जिसके बाद फतेहपुरी सीकरी को बनाने की योजना आरंभ हुई थी।

फ़तेहपुर सीकरी के अन्दर बनी मुख्य इमारतें:

  • बुलंद दरवाजा: फ़तेहपुर सीकरी में बादशाह अकबर के समय के अनेक महल, भवन, प्रासादों तथा राजसभाओं के अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं। बुलंद दरवाज़ा यहाँ की सर्वोच्च इमारत है, जिसकी ऊंचाई भूमि से 280 फुट है। इसका निर्माण 1602 ई. में बादशाह ने गुजरात विजय के उपलक्ष में करवाया था।
  • दीवान-ए-खास: दीवान-ए-खास या हॉल ऑफ प्राइवेट ऑडियंस एक वर्गाकार इमारत है। यही पर मुगल सम्राट अकबर द्वारा अपने नवरत्नों के साथ विचार-विमर्श किया जाता था। यह इमारत बाहर से देखने में एक-मंजिला प्रतीत होती है, लेकिन अंदर से दो मंजिला है। इस महल के बीचों बीच एक नक्काशीदार खंभा है, जिसे देखकर सैलानी दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं।
  • दीवान-ए-आम: यहाँ पर बैठकर ही मुगल सम्राट अकबर जनता की परेशानियां, शिकायतें और झगड़े सुन कर न्याय करते थे। यह लाल पत्थर से बना एक विशाल अहाता हैं।
  • ख्वाब महल: यह कभी सम्राट अकबर का शयनागार था। इस महल में शाम को नृत्य व संगीत की महफिलें लगती थीं। महल में एक खूबसूरत मंच भी है। कहा जाता है कि इसी मंच पर ‘तानसेन’ और ‘बैजू बावरा’ के बीच संगीत कार्यक्रम का जोरदार मुकाबला हुआ करता था।
  • पंचमहल: इस पांच मंजिला बनी इमारत का उपयोग शाही हरम में रहने वाली महिलाओं के विलास और मनोरंजन के लिए किया जाता था। इस महल की खूबी यह है कि इसमें कुल 176 खंभे हैं, जिनके सहारे यह इमारत खड़ी है। हर एक खंभे पर अलग-अलग कलाकृति देखने को मिलती है। साथ ही खम्भों पर बना प्रत्येक मंजिल का कमरा नीचे वाली मंजिल के कमरे से आकार में छोटा है।
  • हिरन मीनार इमारत: यहां पर हिरण के सींगों की तरह से दिखने वाले पत्थर सैलानियों को अपनी खीचते हैं।
  • शेख सलीम चिश्ती की दरगाह: बुलंद दरवाजे से अन्दर जाने पर सामने ही सम्राट अकबर के गुरु शेख सलीम चिश्ती की दरगाह दिखाई देती है। शेख सलीम चिश्ती की दरगाह सफ़ेद संगमरमर से बनी है। इसका निर्माण 1581 में पूरा हुआ था। यहाँ पर देश-विदेश से सभी धर्मों के श्रद्धालु लोग आकर यहां की नक्काशीदार खिड़कियों में लाल धागा बांधकर मन्नत मांगते हैं।
  • जोधाबाई का महल: यह महल में बादशाह अकबर की हिंदू रानियों का निवास स्थान था। इसमें हिंदुओं और मुस्लिमों की शिल्पकला का सुंदर संयोजन देखने को मिलता है। यह महल अंदर से दोमंजिला है।

फ़तेहपुर सीकरी के बारे में रोचक तथ्य: (Interesting Facts about Fatehpur Sikri in Hindi)

  • बादशाह अकबर को इस शहर की योजना को तैयार करने में 15 वर्ष का समय लगा था।
  • सन 1573 में यहीं से बादशाह ने गुजरात को फतह करने के लिए प्रस्थान (कूच) किया था।
  • मुगल बादशाह बाबर ने राणा सांगा को सीकरी नामक स्थान पर हराया था और इस जगह​ पर अपना अधिकार जमाया था।
  • इसके निर्माण से पहले मुगलों की राजधानी आगरा थी, लेकिन फतेहपुर सीकरी बनने के बाद सम्राट ने राजधानी को नए नगर में स्थानांतरित कर लिया था।
  • साल 1571 से 1585 तक फतेहपुर सीकरी मुगलों की राजधानी रही।
  • ऐसा माना जाता है कि फतेहपुर सीकरी मस्जिद मक्‍का में बनी मस्जिद की नकल है और इसके नमूने हिंदू और पारसी वास्‍तुशिल्‍प से लिए गए हैं।
  • फतेहपुर सीकरी में स्थित बुलंद दरवाजा एशिया का सबसे ऊंचा दरवाजा है।
  • यहाँ की जनसंख्या 28,757 है। जिसमें पुरुषों की जनसंख्या 53% और महिलाओं की जनसंख्या 46% है।
  • फतेहपुर सीकरी की औसत साक्षरता दर 46% है, जो राष्ट्रीय औसत दर 74% से कम है, जिसमे पुरुष साक्षरता 57% है और महिला साक्षरता 34% है।
  • यह शहर आगरा जिले के पंद्रह ब्लॉक मुख्यालयों में से एक है।
  • इस शहर के अंतर्गत 52 ग्राम पंचायते आती हैं।
  • शहर का सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन फतेहपुर सीकरी रेलवे स्टेशन है, जो शहरी केंद्र से लगभग 1 किलोमीटर (62 मीटर) की दूरी पर स्थित है।
  • आगरा एयरपोर्ट (जिसे खेरिया एयरपोर्ट भी कहा जाता है), शहर का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है, जो यहाँ से केवल 40 किलोमीटर (25 मीटर) की दूरी पर स्थित है।
  • इसके आलावा आप यहाँ सड़क मार्ग द्वारा भी आसानी से पंहुच सकते है।

This post was last modified on August 4, 2019 3:23 pm

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