महाबलीपुरम स्‍मारक समूह, कांचीपुरम (तमिलनाडु)

महाबलीपुरम स्‍मारक समूह, कांचीपुरम (तमिलनाडु) के बारे में जानकारी: (Group of Monuments at Mahabalipuram, Tamil Nadu GK in Hindi)

विश्व के कई महान देशो में से एक भारत एक ऐसा देश है जो विभिन्न प्रकार की भिन्नताओं को अपने भीतर समाहित किए हुये है, जिसके लिए वह विश्व में भी काफी विख्यात है। भारतीय राज्य तमिलनाडु के एक प्रांत मामलापुरम में स्थित महाबलीपुरम स्‍मारक समूह अपनी विशेष कलाकृति, इतिहास और स्थापत्य शैली के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है।

महाबलीपुरम स्‍मारक समूह का संक्षिप्त विवरण: (Quick Info about Group of Monuments at Mahabalipuram)

स्थान मामलापुरम, कांचीपुरम जिला, तमिलनाडु (भारत)
निर्माता पल्लव राजवंश द्वारा
स्थापना 630 ई. से 728 ई. के मध्य
प्रकार धार्मिक स्थल, मंदिर, ऐतिहासिक स्मारक समूह
युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल 1984 ई
खुलने का समय सुबह 6:00 से शाम 6:00 तक
प्रवेश शुल्क भारतीयों के लिए 35 रुपए, विदेशी यात्री 550 रुपए

महाबलीपुरम स्‍मारक समूह का इतिहास: (Group of Monuments at Mahabalipuram History in Hindi)

इस स्मारक समूह का इतिहास काफी धुंधला है क्यूंकि इसके निर्माण का कोई स्पष्ट प्रमाण नही मिला है। उस स्थान पर पाए गये कुछ शिलालेखो और सिक्को से यह अनुमान लगाया जाता है की इसका निर्माण लगभग 7वीं शताब्दी ई. में दक्षिण मद्रास के पल्लव राजवंश द्वारा किया गया था। पल्लव राजवंश ने महाबलीपुरम पतन की भी स्थापना की थी, जिस पर दक्षिण-पूर्व एशिया के दूरस्‍थ के साम्राज्यों कम्बुजा (कंबोडिया) और श्रीविजय (मलेशिया, सुमात्रा, जावा) के व्यापारी आकर व्‍यापार करते थे। यह पतन लगभग 630 ई. से 728 ई. के बीच बहुत प्रसिद्ध हो गया था क्यूंकि यही वह काल था जिसमे महाबलीपुरम स्‍मारक समूह को निर्मित और सुसज्जित किया गया था।

महाबलीपुरम स्‍मारक समूह के बारे में रोचक तथ्य: (Interesting Facts about Group of Monuments at Mahabalipuram in Hindi)

  1. महाबलीपुरम लगभग पहली शताब्दी ई. से लगभग दूसरी शताब्दी ई. के मध्य में मामल्लापुरम समुद्री बंदरगाह के रूप में विकसित किया गया था।
  2. यह स्मारक समूह भारत के तमिलनाडु राज्य के कांचीपुरम जिले में बंगाल की खाड़ी के कोरोमंडल तट पर स्थित हैं।
  3. महाबलीपुरम महान पल्लव शासक नरसिम्हावर्मन I (630-68 ई.) की दूसरी सबसे बड़ी धार्मिक व राजनैतिक राजधानी थी।
  4. मामल्लापुरम शहर को लगभग 2000 वर्ष पहले ही विकसित कर लिया गया था जिसमे विभिन्न प्रकार की सुख-सुविधाएं सम्मिलित थी।
  5. इस स्मारक समूह की सुंदरता, कलाकृति, शिल्पकारिता और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुये वर्ष 1984 ई. में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल की सूची में सम्मिलित कर लिया गया था।
  6. महाबलीपुरम के तटीय मंदिरों का निर्माण लगभग 7वीं शताब्दी ई. में राजसिम्हा के शासनकाल के दौरान किया गया था। यह मंदिर बहुभुज गुंबद है, जिनमें भगवान विष्णु और शिव की मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं।
  7. इस स्मारक समूह में कई मंदिर सम्मिलित हैं जिसमे – कृष्ण गुफा मंदिर, अरहा गुफा मंदिर, महिषासुरमर्दिनी मंडप, पांचपांडव गुफा मंदिर और संरचनात्मक मंदिरों में तटीय मंदिर और ओलक्कान्नेश्वर मंदिर आदि प्रमुख हैं।
  8. इस स्मारक समूह के संरक्षण और सुरक्षा की देख-रेख केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय करता है। पर्यटन मंत्रालय ने इसके संरक्षण हेतु “इंटीग्रेटेज डेवलपमेंट ऑफ मामल्लापुरम” नामक एक परियोजना भी लागू की है।
  9. इस स्मारक समूह की मद्रास से दूरी लगभग 50 कि.मी. है।
  10. महाबलीपुरम के अद्वितीय रथ गुफा मंदिरों का निर्माण पल्लव राजा नरसिम्हा के शासनकाल के दौरान 7वीं से 8वीं शताब्दी के मध्य में करवाया गया था। इन मन्दिरों का निर्माण पत्थरों को काट कर किया गया था जोकि पल्लव शासकों की भव्य स्थापत्यकला को प्रतिबिंबित करते है।
  11. इस स्मारक समूह में लगभग चालीस स्मारक हैं जिन्हें पूरा करने के लिए अलग-अलग पाँच समूहों में वर्गीकृत किया गया है इनमें रथ के आकार के मंदिर, गुफा मंदिर चट्टान राहत स्मारक संरचनात्मक मंदिर शामिल हैं
  12. इस स्मारक समूह में 8 रथनुमा मंदिर हैं जिनमें से 6 के नाम महाभारत के पांडवों (पांच भाई) और द्रौपदी के नाम पर रखे गये है, जैसे- भीम रथ, धर्मराज रथ, अर्जुन रथ, नकुल सहदेव रथ और द्रौपड़ी रथ आदि। इन मंदिरों के निर्माण की शैली बौद्ध विहारों एवं चैत्य शैली पर आधारित थी।
  13. इन रथनुमा मंदिर समूह में सबसे बड़ा रथ मंदिर अधूरा तीन मंजिला धर्मराज मंदिर है और सबसे छोटा मंदिर द्रौपदी का है।
  14. 20 वीं सदी के मध्य में पुरातत्वविद एएच लोंगहर्स्ट ने पल्लव वास्तुकला का वर्णन किया, जिनमें महाबलिपुरम में पाए जाने वाले चार कालानुक्रमिक शैली में शामिल हैं जिनमें (610 ई॰ से 640 ई॰) के मध्य महेंद्र, (640 ई॰ से 670 ई॰) के मध्य नरसिंह वर्मन प्रथम, (674 ई॰ से 800 ई॰) के मध्य राजसिम्हा, और (800 ई॰ से 900 ई॰) के मध्य नंदीवर्मन हैं।
  15. महाबलीपुरम के प्रत्येक स्मारक हिंदू पौराणिक कथाओं में एक देवता या एक चरित्र को समर्पित है जो मध्ययुगीन दक्षिण भारतीय इतिहास, संस्कृति, सरकार और धर्म में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।

महाबलीपुरम स्‍मारक समूह, कांचीपुरम कैसे पहुंचे: (How to reach Mahabalipuram Memorial Group, Kanchipuram)

नजदीकी एयरपोर्ट: चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट यह महाबलीपुरम स्‍मारक समूह से 55 किमी की दूरी पर स्थित है।
निकटतम रेलवे स्टेशन: चेंगलपट्टू रेलवे स्टेशन यह स्‍मारक समूह से 29.8 किमी की दूरी पर स्थित है
निकटतम बस स्टेशन: महाबलीपुरम बस स्टैंड पर पांडिचेरी, चेन्नई और कांचीपुरम आदि कई स्थानों से यहाँ बसे आती हैं अतः बसों के माध्यम से महाबलीपुरम स्‍मारक समूह तक आसानी से पहुंचा जा सकता है

This post was last modified on August 3, 2019 9:10 am

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