पट्टडकल स्मारक समूह, बागलकोट (कर्नाटक) की जानकारी और ऐतिहासिक तथ्य


Famous Things: Group Of Monuments At Pattadakal Karnataka Gk In Hindi Quick Info, History and Facts [Post ID: 45940]



पट्टडकल स्मारक समूह, बागलकोट (कर्नाटक) के बारे में जानकारी: (Group of Monuments at Pattadakal, Bagalkot Karnataka GK in Hindi)

भारतीय राज्य कर्नाटक के प्रांत बगलकोटे में स्थित पट्टडकल स्मारक समूह अपनी स्थापत्य शैली, कलाकृति, नक्काशी और रोमांचक इतिहास के लिए पूरे विश्व में मशहूर है। भारत के दक्षिणी राज्यों की अपनी एक विशेष कला और संस्कृति है जिसके कारण यहाँ पर हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक आते है।

पट्टडकल स्मारक समूह का संक्षिप्त विवरण: (Quick Info about Group of Monuments at Pattadakal)

स्थान बागलकोट जिला, कर्नाटक (भारत)
निर्मित चालुक्य वंश द्वारा
स्थापना 7वीं शताब्दी ई. से 8वीं शताब्दी ई. के मध्य
वास्तुकला द्रविड़ वास्तुकला
प्रकार धार्मिक स्थल, मंदिर

पट्टडकल स्मारक समूह का इतिहास: (Group of Monuments at Pattadakal History in Hindi)

इस स्मारक समूह का निर्माण लगभग 7वीं शताब्दी ई. से 8वीं शताब्दी ई. के मध्य, चालुक्य राजवंश के शासको ने करवाया था। उस समय इसका उपयोग केवल राज्याभिषेक के लिए किया जाता था। ऐसा माना जाता है कि एहोल एक स्थापत्य कला का महाविद्यालय था जिसमे पत्तदकल एक विश्वविद्यालय था। चालुक्य साम्राज्य के शासन दौरान यह एक राजनीतिक केंद्र और राजधानी था, इसके बाद ‘वातापी’ (वर्तमान बादामी) को राजनीतिक केंद्र और राजधानी के रूप में चुना गया, जबकि पट्टदकल को सांस्कृतिक राजधानी बना दिया गया था। चालुक्य साम्राज्य के पतन के बाद यह क्षेत्र 10वीं शताब्दी तक राष्ट्रकूट साम्राज्य के नियंत्रण में रहा, जिसके बाद लगभग 11वीं से 12वीं शताब्दी के मध्य यह क्षेत्र पुन: कल्याणी के चालुक्यों के नियंत्रण में आ गया था। लगभग 13वीं शताब्दी के दौरान यह क्षेत्र और इसके नजदीकी क्षेत्र मालप्रभा घाटी और दक्कन को दिल्ली सल्तनत की सेनाओं द्वारा लूटा और क्षतिग्रस्त किया गया था। इसके बाद इस क्षेत्र पर विजयनगर साम्राज्य का शासन चला जिसने इस स्मारक समूह की पुन: मरम्मत करवायी थी। विजयनगर साम्राज्य के बाद इस क्षेत्र पर बीजापुर के शासको का शासन चला था। बीजापुर के शासको के बाद यह क्षेत्र मुगल साम्राज्य और उनके बाद मराठा साम्राज्य के हाथो में आ गया था जिसे बाद में टीपू सुल्तान ने जीत लिया था और टीपू सुल्तान से एक युद्ध के बाद इसे ब्रिटिशो ने जीत लिया था।

पट्टडकल स्मारक समूह के बारे में रोचक तथ्य: (Interesting Facts about Group of Monuments at Pattadakal in Hindi)

  • इस ऐतहासिक स्मारक समूह का निर्माण कई राजवंशो ने करवाया था परंतु इसका मूल रूप 7वीं शताब्दी ई. से 8वीं शताब्दी ई. के मध्य चालुक्य वंश द्वारा निर्मित किया गया था।
  • यह स्मारक समूह लगभग 56 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में फैला है, जिसमे कई स्मारके और पार्क आदि सम्मिलित है।
  • पट्टडकल स्मारक समूह में लगभग 150 से अधिक मंदिर सम्मिलित है जो हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म से संबंधित है।
  • पत्तदकल स्मारक समूह में कुल 10 प्रमुख मंदिर है जिनमे से 9 हिंदू धर्म के और 1 जैन धर्म का मंदिर है, इसमें कई छोटे मंदिर और न्याधार भी सम्मिलित है।
  • इस स्मारक समूह में कई प्रसिद्ध व् प्राचीन मंदिर स्थित है परंतु इसमें सबसे पुराना मंदिर संगमेश्वर मंदिर है जिसका निर्माण लगभग 697 ई. से 733 ई. के मध्य विजयदित्य सत्यशास्त्र के शासको ने करवाया था, इस मंदिर को विज्येश्वरा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
  • पत्तदकल के मंदिरों में से सबसे बड़ा मंदिर विरुपक्ष मंदिर है, जिसे लगभग 740 से 745 ई. के बीच बनवाया गया था।
  • इस स्मारक समूह में सबसे प्रमुख मंदिर निम्न है- कडसुधेश्वर मंदिर (7वीं शताब्दी), जंबुलिंगेश्वर मंदिर (7वीं या 8वीं शताब्दी), गलगानाथा मंदिर (8वीं शताब्दी), चंद्रशेखर मंदिर (9वीं से 10वी शताब्दी), संगमेश्वर मंदिर (7वीं शताब्दी), काशी विश्वनाथ मंदिर (8वीं शताब्दी), मल्लिकार्जुन मंदिर (8वीं शताब्दी), विरुपक्ष मंदिर (7वीं शताब्दी), पंपानथा मंदिर (8वीं शताब्दी) और जैन नारायण मंदिर (9वीं शताब्दी)।
  • इस स्मारक समूह के भव्य मन्दिरों, कलाकृतियों और इतिहास को देखते हुये वर्ष 1987 ई. में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित कर दिया गया था।
  • यह स्मारक समूह कर्नाटक राजमार्ग (SH14) के माध्यम से, बदामी से 23 कि.मी., गोवा से 265 कि.मी., बेलगाम से लगभग 165 कि.मी. की दूरी पर स्थित है।
  • इस स्मारक समूह में दो प्रमुख भारतीय वास्तुकला शैलियों का मिश्रण देखने को मिलता है, जिसमे पहली उत्तर भारत की रेखा-नागारा-प्रसाद शैली है और दूसरी दक्षिण भारत की द्रविड़-विमन शैली है।

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