कांगड़ा किला, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)


Famous Things: Kangra Fort Himachal Pradesh Gk In Hindi


कांगड़ा किला, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) के बारे में जानकारी: (Kangra Fort, Kangra, Himachal Pradesh GK in Hindi)

कांगड़ा किला भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश के पुराने कांगड़ा शहर के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। ये काँगड़ा शहर से 3-4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह ऐतिहासिक किला माझी और बाणगंगा नदियों के बीच में एक सीधी तंग पहाड़ी पर बना है। इस किले को नगरकोट या कोट कांगड़ा के नाम से भी जाना जाता है। यह शहर प्राचीनकाल में 500 राजाओं की वंशावली के पूर्वज, राजा भूमचंद की त्रिगर्त भूमि की राजधानी नगर था। इस किले पर कटोच शासकों के अतिरिक्त अनेक शासकों जैसे तुर्कों, मुगलों, सिखों, गोरखाओं और अंग्रेजों ने राज किया था। यह किला दुनिया के सबसे पुराने किलो में से एक है। यह हिमालय का सबसे बड़ा किला और भारत का सबसे पुराना किला है।   भारी संख्या में लोग यहां इतिहास की झलक देखने और हिमाचल की सुंदरता निहारने पहुंचते हैं। इस किले के गौरवशाली इतिहास और हिमाचल की सुंदर वादियों को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या पर्यटक यहाँ आते है।

कांगड़ा किले का संक्षिप्त विवरण: (Quick Info about Kangra Fort)

स्थान कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश (भारत)
निर्माणकाल 1500 शताब्दी, ईस्वी
निर्माता सुशर्मा चन्द्र
प्रकार किला

कांगड़ा किले का इतिहास: (Kangra Fort History in Hindi)

इस ऐतिहासिक किले का उल्लेख महाभारत में भी किया गया है, साथ ही जब महान यूनानी शासक अलेक्जेंडर ने यहाँ आक्रमण किया तब भी ये किला यहाँ मौजूद था। इस किले के प्राचीनतम लिखित प्रमाण महमूद गजनबी द्वारा साल 1009 में किये गए आक्रमण से मिलते हैं । बाद में साल 1043 में दिल्ली के तोमर शासकों ने इस किले को पुनः कटोच शासकों को सौंप दिया था। साल 1337 में मुहम्मद तुगलक और बाद में  1351 में फिरोजशाह तुगलक ने इस पर अपना अधिपत्य स्थापित किया था। साल 1556 में अकबर ने की दिल्ली संभाली और यह किला राजा धर्मचंद के पास आ गया। सन 1563 में राजा धर्मचंद का निधन हो गया, जिसके बाद उसका पुत्र माणिक्य चन्द शासक बना। सन 1620 में मुगल बादशाह जहांगीर अपने गर्वनरों की सहायता से इस किले को फतह किया। इस जीत के 2 वर्ष पश्चात् जहांगीर जनवरी 1622 में कांगड़ा किले में आया। उसने किले में अपने नाम से जहांगीरी दरवाजा व एक मस्जिद बनबाई थी, जो आज भी यहाँ मौजूद हैं। इसके बाद किले को छीनने के सारे प्रयास विफल रहे और लंबे समय तक यह किला मुगल सेना के कब्जे में रहा। बटाला के सिख सरदार जय सिंह कन्हैया ने वर्ष 1783 में मुगल सेना से किला अपने कब्जे में ले लिया, जिसे मैदानी क्षेत्रों के बदले किले को तत्कालीन कटोच राजा संसार चंद (1765-1823) को सौंपना पड़ा। इस प्रकार सदियों के बलिदान के पश्चात् हिंदू कांगड़ा नरेश फिर से दुर्ग में लौट पाए। नेपाल के अमर सिंह थापा के नेतृत्व में गोरखा सेना ने लगभग 4 वर्ष तक इस किले की घेराबंदी की। गोरखों के विरुद्ध सहायता के आश्वासन पर संधि के अनुसार साल 1809 में किले को महाराजा रंजीत सिंह को सौंप दिया गया। साल 1846 तक इस किले पर सिख समुदाय राज रहा, इसके पश्चात् किला अंग्रेजों के अधीन आ गया।

कांगड़ा किले के बारे में रोचक तथ्य: (Interesting Facts about Kangra Fort in Hindi)

  • यह शानदार किला समुद्र स्तर से 350 फुट की ऊंचाई पर स्थित है और लगभग 4 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • कांगड़ा से धर्मशाला शहर की दूरी मात्र 20 किलोमीटर है।
  • प्राचीनकाल में यह किला धन-संपति के लिए बहुत प्रसिद्ध था, इसलिए मोहम्मद गजनी ने भारत में अपने चौथे अभियान के दौरान पंजाब की जीतने के बाद सीधे 1009 ईसवी में कांगड़ा पहुंच गया था।
  • इस किले में अन्दर जाने के लिए एक छोटे-सा बरामदा है, जो दो द्वारों के बीच में है। किले के प्रवेश पर की गयी शिलालेख के अनुसार इन दो द्वारों को सिख शासनकाल के दौरान बनवाया गया था।
  • किले की सुरक्षा प्राचीर 4 किलो मीटर लम्बी है, मेहराबदार का प्रमुख प्रवेश द्वार महाराजा रंजीत सिंह के नाम पर है, जिसका निर्माण महाराजा रणजीत सिंह के शासनकाल के दौरान किया गया था। परन्तु ऐसा कहा जाता है कि जहाँगीर ने पुराने दरवाजे को तुड़वा कर पुनः दरवाजे को बनवाया, इसलिए इसे जहांगीरी दरवाजा कहते है।
  • इसके ऊपर दर्शनी दरवाजा है, जिसके दोनों ओर गंगा एवं यमुना की प्रतिमायें है। यह किले के आतंरिक भाग का प्रवेश द्वार है ।
  • इस किले से धौलाधार की सुंदर पहाड़ियों का नजारा भी देखने को मिलता है, जो किले की सुन्दरता में ओर भी चार चाँद लगा देती है।
  • मुख्य मंदिर के साथ किले का सुरक्षा द्वार है, जिसे अँधेरी दरवाजा ( Dark Gate) कहा जाता था।
  • पुराने कांगड़ा के समीप पहाड़ी के शिखर पर जयंती माँ का एक मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण गोरखा सेना के सेनपाति, बड़ा काजी अमर सिंग थापा द्वारा करवाया गया था।
  • किले के पिछले हिस्से में बारूदखाना, मस्जिद , फांसीघर, सूखा तालाब, कपूर तालाब , बारादरी, शिव मंदिर तथा कई कुँए आज भी मौजूद है।
  • यहाँ आने वाले सैलानी किले के अंदर वॉच टावर, ब्रजेश्वरी मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर और आदिनाथ मंदिर के भी दर्शन कर सकते हैं।
  • इस किले के प्राचीनतम अवशेष जोकि लगभग 9वीं-10वीं सदी में स्थापित हिन्दू एवं जैन मंदिरों के रूप में विध्यमान है।
  • अंग्रेजीशासन काल के दौरान 04 अप्रैल 1905 को कांगड़ा में आये भयंकर भूकंप के कारण इस किले को भारी नुकसान हुआ था। जिसके बाद किले को दोबारा कटोच वंश को सौंप दिया गया था।
  • पर्यटन की दृष्टि से वर्तमान समय में इस किले के संरक्षण और रख-रखाव रॉयल फैमिली ऑफ कांगड़ा, आर्कियालोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और हिमाचल सरकार करती है।
  • रॉयल फैमिली ऑफ कांगड़ा द्वारा वर्ष 2002 में इस किले में महाराजा संसार चंद संग्रहालय की भी स्थापना की गई थी, जिसमें कटोच वंश के शासकों और उस समय में प्रयोग होने वाली युद्ध सामग्री, बर्तन, चांदी के सिक्के, कांगड़ा पेंटिंग्स, अभिलेख, हथियार और उस समय की अन्य वस्तुओं को रखा गया है।

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