रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम, तमिलनाडु (भारत)

रामनाथस्वामी मंदिर के बारे में जानकारी (Information About Ramanathaswamy Temple In Hindi):

रामनाथस्वामी मंदिर भारत के तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित है, जोकि मन्नार की खड़ी में है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, और इसे रामेश्वरम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर बारह ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से एक है। ज्योतिर्लिंग में “ज्योति” का अर्थ है, चमक और “शिवलिंग का अर्थ है, छवि इसलिए ज्योतिर्लिंग का सम्पूर्ण अर्थ हुआ “उज्ज्वल छवि या चिह्न के सर्वोच्च भगवान शिव” जिसके कारण इस मंदिर को भारत के प्रमुख तीर्थ स्थानों में से एक माना जाता है।

रामनाथस्वामी मंदिर का संक्षिप्त विवरण (Brief description of Ramanathaswamy Temple):

स्थानरामेश्वरम, तमिलनाडु (भारत)
निर्माण काल17वीं शताब्दी
निर्माताराजा किझवान सेतुपति, रघुनाथ किलावन
समर्पितरामनाथस्वामी (शिव)
प्रकारऐतिहासिक हिन्दू मंदिर
वास्तुकलाद्रविड़ वास्तुकला

रामनाथस्वामी मंदिर का इतिहास (History of Ramanathaswamy Temple):

रामनाथस्वामी मंदिर ज्योतिर्लिंग रामायण और राम द्वारा श्रीलंका से विजयी वापसी के साथ से जुड़ा हुआ है। रामेश्वर का संस्कृत में अर्थ है, “राम के भगवान” शिव। हिन्दू महाकाव्य रामायण के अनुसार कहा जाता है, की राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे, और उन्होने वर्तमान श्रीलंका में भगवान शिव से रावण के खिलाफ उनके युद्ध के दौरान किए गए पाप से मुक्त होने के लिए प्रार्थना की थी। परंतु मंदिर का वर्तमान आकार 17 वीं शताब्दी में बनाया गया था, जिसके साथ गलियारे में छोटे कॉरिडॉर (विमन) लगभग 11वीं से 12वीं शताब्दी के हैं। लोगो का कहना है की मंदिर का निर्माण राजा किझावन सेतुपति या रघुनाथ किलवान द्वारा करवाया गया था। परंतु 1380 ई॰ से 1410 ई॰ में मंदिर का पुनः निर्माण हुआ था। जिसके दौरान मंदिर के निर्माण के लिए त्रिंकोमाली से पत्थर के ब्लॉक भेजे गए थे। इस मंदिर के संरचनात्मक विकास कार्य की देखरेख जयवीर सेन्कियारियन के उत्तराधिकारी गुनवेरा सिनकियारियान द्वारा की गई थी। उन्होनें मंदिर के निर्माण के लिए अपने राजस्व का कुछ हिस्सा दान में दे दिया था। साथ ही श्रीलंका के कई शासकों ने भी मंदिर के निर्माण में अपना योगदान दिया था।

रामनाथस्वामी मंदिर के बारे में रोचक तथ्य (Interesting facts about Ramanathaswamy Temple):

  1. मंदिर के प्राथमिक देवता लिंगम के रूप में भगवान शिव हैं। जिन्हे रामनाथस्वामी के नाम से भी जाना जाता है।
  2. मंदिर के गर्भगृह में दो लिंग रखे हुए हैं जिसे ये कहा जाता है, की इनमें से एक सीता द्वारा निर्मित है, जिसे रामलिंगम कहा जाता है तथा दूसरा लिंगम हनुमान द्वारा कैलाश पर्वत से लाया गया था।
  3. दक्षिण भारत के सभी प्राचीन मंदिरो के समान, इस मंदिर के परिसर के चारो तरफ ऊँची दीवारें बनी हुईं हैं। जिनकी ऊंचाई पूर्व से पश्चिम की ओर 865 फीट और उत्तर से दक्षिण की ओर 657 फीट है।
  4. मंदिर के अंदरूनी हिस्से में लंबे गलियारे हैं जो 5 फुट ऊंचे मंच विशाल कॉलोनियों के बीच से चले आ रहें हैं।
  5. इसके साथ एक लंबा मंच दोनों तरफ से घिरा हुआ है। सबसे लंबे और पुराने समय के गलियारे उत्तर और दक्षिण के गलियारे है जो प्रत्येक घटना के अंत तक के स्तंभ हैं।
  6. मंदिर के तीन गलियारे हैं। बाहरी गलियारे स्तंभों में बड़ी संख्या में तीव्र मूर्तियों से सजे हुए है, और बाहरी गलियारों की लंबाई को दुनिया में सबसे लंबे गलियारे होने की प्रतिष्ठा प्राप्त है। क्योंकि इनकी ऊंचाई लगभग 6.9 मीटर और लंबाई 3.50 फीट है इन गलियारों में 1212 खम्बे लगे हुए हैं और इनकी ऊंचाई फर्श से छत के केंद्र तक लगभग 60 फीट है।
  7. मंदिर के आंतरिक गलियारे पूर्व और पश्चिम में लगभग 224 फीट और उत्तर और दक्षिण में 352 फीट ऊंचे हैं और इन गलियारों की चौड़ाई 15.5 फीट से 1 फीट है।
  8. अठारहवीं शताब्दी के मध्य में, विश्व प्रसिद्ध तीसरे गलियारे का निर्माण मुथुरामलिंगा सेतु द्वारा किया गया था, जो सैंतालीस साल तक जीवित रहे और 1763 ई॰ से 1795ई॰ के बीच शासन किया।
  9. इस मंदिर के परिसर में 22 कुंड है जिसमें श्रद्धालु मंदिर में पुजा करने से पहले स्नान करते हैं। हालांकि ऐसा करना अनिवार्य नहीं है। क्योंकि यह केवल धार्मिक मान्यता है।
  10. भारत के तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम द्वीप पर इसके आस-पास कुल लगभग 64 तीर्थ है। स्कंद पुराण के अनुसार, इनमे से 24 ही महत्वपूर्ण तीर्थ है और इन तीर्थों को प्राचीन समय से काफी प्रसिद्ध माना गया है।

रामनाथस्वामी मंदिर कैसे पहुंचे (How to reach the Ramanathaswamy Temple):

  • रामेश्‍वरम में रेलवे स्टेशन नहीं है, परंतु अन्‍य नजदीकी रेलवे स्‍टेशन चेन्‍नई में स्थित है जिसका दक्षिण रेलवे में अच्‍छा और मजबूत नेटवर्क है। रामेश्‍वरम से चेन्‍नई के बीच चार ट्रेन चलती है। इनमें से दो ट्रेन नियमित रूप से चलती है। एक ट्रेन मंगलवार के दिन और एक ट्रेन शनिवार के दिन चलती है।
  • इसके अतिरिक्त रामेश्‍वरम, चेन्‍नई से सड़क मार्ग द्वारा अच्‍छी तरह से जुड़ा हुआ है। चेन्‍नई से रामेश्‍वरम तक के लिए नियमित रूप से बसें चलती है। पर्यटक, वाल्‍वो सार्वजनिक निजी बस और इसके अलावा राज्य सरकार की बसों से भी रामेश्‍वरम तक जा सकते है।
  • इसके अतिरिक्त रामेश्‍वरम का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट मदुरई में स्थित है। जिसका नाम मदुरई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है यह से पर्यटक टैक्‍सी द्वारा आसानी से मंदिर तक पहुंच सकते है।

This post was last modified on July 9, 2019 3:27 pm

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