चन्देल राजवंश (साम्राज्य) का इतिहास एवं महत्वपूर्ण तथ्यों की सूची


General Knowledge: Chandela Dynasty History In Hindi [Post ID: 5618]



चन्देल राजवंश का इतिहास एवं महत्वपूर्ण तथ्यों की सूची: (Chandela Dynasty History and Important Facts in Hindi)

चन्देल वंश

चन्देल वंश गोंड जनजातीय मूल का प्रसिद्ध राजपूत वंश था, जिसने 8वीं से 12वीं शताब्दी तक स्वतंत्र रूप से राज किया। प्रतिहारों के पतन के साथ ही चंदेल 9वीं शताब्दी में सत्ता में आए। चंदेल वंश के शासकों का बुंदेलखंड के इतिहास में विशेष योगदान रहा है। उन्‍होंने लगभग चार शताब्दियों तक बुंदेलखंड पर शासन किया। उनका साम्राज्य उत्तर में यमुना नदी से लेकर सागर (मध्य प्रदेश, मध्य भारत) तक और धसान नदी से विंध्य पहाड़ियों तक फैला हुआ था। सुप्रसिद्ध कालिंजर का क़िला, खजुराहो, महोबा और अजयगढ़ उनके प्रमुख गढ़ थे। चंदेलकालीन स्‍थापत्‍य कला ने समूचे विश्‍व को प्रभावित किया उस दौरान वास्तुकला तथा मूर्तिकला अपने उत्‍कर्ष पर थी। खजुराहो के मंदिर इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं।

चन्देल वंश (साम्राज्य) का इतिहास:

चन्देल वंश गोंड जनजातीय मूल का राजपूत वंश था, जिसने उत्तर-मध्य भारत के बुंदेलखंड पर कुछ शताब्दियों तक शासन किया। गोंड (जनजाति), भारत की एक प्रमुख जनजाति हैं।

गोंड भारत के कटि प्रदेश – विंध्यपर्वत, सतपुड़ा पठार, छत्तीसगढ़ मैदान में दक्षिण तथा दक्षिण-पश्चिम में गोदावरी नदी तक फैले हुए पहाड़ों और जंगलों में रहनेवाली आस्ट्रोलायड नस्ल तथा द्रविड़ परिवार की एक जनजाति, जो संभवत: पाँचवीं-छठी शताब्दी में दक्षिण से गोदावरी के तट को पकड़कर मध्य भारत के पहाड़ों और जंगलों में फैल गई। आज भी मोदियाल गोंड जैसे समूह हैं जो जंगलों में प्राय: नंगे घूमते और अपनी जीविका के लिये शिकार तथा वन्य फल मूल पर निर्भर हैं। गोंडों की जातीय भाषा गोंडी है जो द्रविड़ परिवार की है और तेलुगु, कन्नड़, तमिल आदि से संबन्धित है।

चन्देल वंश की स्थापना तथा शासक:

जेजाकभुक्ति के प्रारम्भिक शासक गुर्जर प्रतिहार शासकों के सामंत थे। इन्होनें खजुराहो को अपनी राजधानी बनाया। ‘नन्नुक’ चन्देल वंश का पहला राजा था। उसके अतिरिक्त अन्य सामंत थे- वाक्पति, जयशक्ति (सम्भवतः इसके नाम पर ही बुन्देलखण्ड का नाम जेजाक भुक्ति पड़ा) विजय शक्ति, राहिल एवं हर्ष।

चन्देल राजवंश के शासकों की सूची:

  • नन्नुक (831 – 845 ई.) (संस्थापक)
  • वाक्पति (845 – 870 ई.)
  • जयशक्ति चन्देल और विजयशक्ति चन्देल (870 – 900 ई.)
  • राहिल (900 – ?)
  • हर्ष चन्देल (900 – 925 ई.)
  • यशोवर्मन (925 – 950 ई.)
  • धंगदेव (950 – 1003 ई.)
  • गंडदेव (1003 – 1017 ई.)
  • विद्याधर (1017 – 1029 ई.)
  • विजयपाल (1030 – 1045 ई.)
  • देववर्मन (1050-1060 ई.)
  • कीरतवर्मन या कीर्तिवर्मन (1060-1100 ई.)
  • सल्लक्षणवर्मन (1100 – 1115 ई.)
  • जयवर्मन (1115 – ?)
  • पृथ्वीवर्मन (1120 – 1129 ई.)
  • मदनवर्मन (1129 – 1162 ई.)
  • यशोवर्मन द्वितीय (1165 – 1166 ई.)
  • परमार्दिदेव अथवा परमल (1166 – 1203 ई.)

चन्देल वंश (साम्राज्य) का अंत:

चंदेल राजा नंद या गंड ने लाहौर में तुर्कों के ख़िलाफ़ अभियान में एक अन्य राजपूत सरदार जयपाल की मदद की, लेकिन ‘ग़ज़ना’ (ग़ज़नी) के महमूद ने उन्हें पराजित कर दिया था। 1023 ई. में चंदेलों का स्थान बुंदेलों ने ले लिया। 1203 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने परार्माददेव को पराजित कर कालिंजर पर अधिकार कर लिया और अंततः 1305 ई. में चन्देल राज्य दिल्ली में मिल गया।

इन्हें भी पढे: प्राचीन भारत के प्रमुख राजवंश और संस्थापक


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