कण्व वंश का इतिहास एवं महत्वपूर्ण तथ्यों की सूची


General Knowledge: History And Facts About Kanva Dynasty In Hindi [Post ID: 5381]



कण्व वंश का इतिहास एवं महत्वपूर्ण तथ्यों की सूची: (Important History and Facts about Kanva Dynasty in Hindi)

कण्व वंश का इतिहास:

कण्व वंश या ‘काण्व वंश’ या ‘काण्वायन वंश’ (लगभग 73 ई. पू. पूर्व से 28 ई. पू.) शुंग वंश के बाद मगध का शासनकर्ता वंश था। कण्व वंश वंश की स्थापना वासुदेव ने की थी। वासुदेव शुंग वंश के अन्तिम शासक देवभूति के मंत्री थे, वासुदेव ने उसकी हत्या करके राजसिंहासन पर अधिकार कर लिया। वासुदेव पाटलिपुत्र के कण्व वंश का प्रवर्तक था। वैदिक धर्म एवं संस्कृति संरक्षण की जो परम्परा शुंगो ने प्रारम्भ की थी। उसे कण्व वंश ने जारी रखा। इस वंश का अन्तिम सम्राट सुशमी कण्य अत्यन्त अयोग्य और दुर्बल था। और मगध क्षेत्र संकुचित होने लगा। कण्व वंश का साम्राज्य बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश तक सीमित हो गया और अनेक प्रान्तों ने अपने को स्वतन्त्र घोषित कर दिया तत्पश्चात उसका पुत्र नारायण और अन्त में सुशमी जिसे सातवाहन वंश के प्रवर्तक सिमुक ने पदच्युत कर दिया था।

शिशुनाग वंश के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य:

  • कण्व वंश जाति से मूलतः ब्राह्मण थे।
  • कण्व ऋषि के वंशज माने जाते थे।
  • वासुदेव के पश्चात कण्व वंश की सत्ता भीमिदेव को प्राप्त हुई।
  • कण्व वंश के बाद सत्ता सतवाहनों के हाथों मे आई।
  • कण्व वंश के अन्तिम राजा सुशर्मा थे।

शकों का आक्रमण:

अपने स्वामी देवभूति की हत्या करके वासुदेव ने जिस साम्राज्य को प्राप्त किया था, वह एक विशाल शक्तिशाली साम्राज्य का ध्वंसावशेष ही था। इस समय भारत की पश्चिमोत्तर सीमा को लाँघ कर शक आक्रान्ता बड़े वेग से भारत पर आक्रमण कर रहे थे, जिनके कारण न केवल मगध साम्राज्य के सुदूरवर्ती जनपद ही साम्राज्य से निकल गये थे, बल्कि मगध के समीपवर्ती प्रदेशों में भी अव्यवस्था मच गई थी। वासुदेव और उसके उत्तराधिकारी केवल स्थानीय राजाओं की हैसियत रखते थे। उनका राज्य पाटलिपुत्र और उसके समीप के प्रदेशों तक ही सीमित था।

कण्व वंश के शासक (राजा):

कण्व वंश में कुल चार राजा ही हुए, जिनके नाम निम्नलिखित हैं:-

  1. वासुदेव
  2. भूमिमित्र
  3. नारायण
  4. सुशर्मा

कण्व वंश का अंत:

कण्व वंश के अन्तिम राजा सुशर्मा को लगभग 28 ई. पू. में आंध्र वंश के संस्थापक सिमुक ने मार डाला और इसके साथ ही कण्व वंश का अंत हो गया।

इन्हें भी पढे: प्राचीन भारतीय इतिहास के प्रमुख राजवंश और उनके संस्थापक


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