2020 में पारित बिलों की सूची- List of important bills passed in the year 2020

विधेयक का अर्थ

‘विधेयक’ अंग्रेजी के बिल (Bill) का हिन्दी रूपान्तरण है। इस लेख में ‘बिल’ शब्द का प्रयोग ‘संसद द्वारा पारित विधि’ के संबंध में किया गया है। इंग्लैंड की संसद ही आधुनिक काल में संसदीय पद्धति  को जन्मदाता माना जाता है।

संसद में विधायी प्रक्रिया The Legislative Process In Parliament

भारतीय संविधान ने वैधानिक विधि के लिए कुछ व्यवस्थाएं निश्चित की हुई हैं। इन व्यवस्थाओं के अतिरिक्त वैधानिक प्रक्रिया के विषय में विस्तृत विवरण लोकसभा और राज्यसभा के विधि नियमों में अंकित हैं। संवैधानिक व्यवस्थाओं के अनुसार वितीय विधेयक को छोड़कर कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। दोनों सदनों में से पारित होने के बाद ही कोई विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाता है। दोनों सदनों में विधेयक के संबंध में मतभेदों को दूर करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन बुलाया जा सकता है। इन प्रावधानों को छोड़कर वैधानिक विधि संसद की ओर से निर्मित नियमों पर आधारित है। दोनों सदनों में एक जैसी वैधानिक विधि की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक विधेयक को संसद में पास होने के लिए तीन वाचनों से गुजरना आवश्यक है।

संसद में पेश किये जाने वाले विधेयक दो तरह के होते हैं-

  1. सरकारी विधेयक,
  2. गैर-सरकारी विधेयक
सरकारी विधेयक गैर-सरकारी विधेयक
इसे संसद में मंत्री द्वारा पेश किया जाता है| इसे संसद में मंत्री के अलावा किसी भी सदस्य द्वारा पेश किया जाता है|
यह सरकार (सत्तारूढ़ दल) की नीतियों को प्रदर्शित करता है| यह सार्वजनिक विषयों पर विपक्षी दलों के मंतव्य (विचार) को प्रदर्शित करता है|
3. संसद द्वारा इसके पारित होने की पूरी उम्मीद होती है| इसके संसद में पारित होने की कम उम्मीद होती है|
संसद द्वारा सरकारी विधेयक अस्वीकृत होने पर सरकार को इस्तीफा देना पड़ सकता है| इसके अस्वीकृत होने पर सरकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है|
सरकारी विधेयक को संसद में पेश होने के लिए सात दिनों का नोटिस होना चाहिए| गैर-सरकारी विधेयक को संसद में पेश करने के लिए एक महीने का नोटिस होना चाहिए|
इसे संबंधित विभाग द्वारा विधि विभाग के परामर्श से तैयार किया जाता है| इसका निर्माण संबंधित सदस्य की जिम्मेदारी होती है|

विधेयक प्रस्तुत करना

संविधान के अनुच्छेद 107(1) के अनुसार धन या वित्तीय विधेयक से भिन्न साधारण विधेयक किसी भी सदस्य द्वारा किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। जो सदस्य विधेयक प्रस्तुत करता है, उसको एक मास की अग्रिम सूचना सदन के अध्यक्ष या सभापति को देनी पड़ती है। ऐसी सूचना के साथ ही विधेयक को पेश करने के कारण तथा उद्देश्य और विधेयक पर आने वाले व्यय का विवरण आदि वर्णित करना आवश्यक है। इसके बाद अध्यक्ष विधेयक को पेश करने की तिथि निश्चित करता है। निश्चित तिथि के अनुसार विधेयक को पेश किया जाता है। यदि इस अवस्था पर विधेयक का विरोध हो तो सदन का अध्यक्ष विधेयक पेश करने वाले तथा विरोधी सदस्यों को अपने-अपने विचार व्यक्त करने के लिए कहता है। इसके पश्चात् उपस्थित सदस्यों के साधारण बहुमत से विधेयक के संबंध में निर्णय किया जाता है। सदन से आज्ञा मिल जाने पर संबंधित सदस्य विधेयक का शीर्षक पढ़ता है तथा विधेयक के आम सिद्धांतों की जानकारी सदन को देता है। इस अवस्था में विधेयक पर विस्तृत वाद-विवाद नहीं होता है। इस प्रकार विधेयक पेश किए जाने के पश्चात् इसे सरकारी गजट में प्रकाशित कर दिया जाता है और छपी हुई प्रति प्रत्येक सदस्य को दी जाती है। अतः इस तरह विधेयक प्रथम पठन के बाद दूसरे पठन में प्रवेश करता है।

विधेयक को पेश करने की उपरोक्त विधि के अतिरिक्त अध्यक्ष किसी विधेयक की सरकारी गजट में प्रकाशित करने की आज्ञा दे सकता है और ऐसी स्थिति में विधेयक की सदन में पेश करने की आवश्यकता नहीं होती तथा विधेयक का दूसरा पठन आरम्भ कर दिया जाता है। प्रायः सरकारी विधायक को गजट में प्रकाशित कर दिया जाता है और इस विधेयक को प्रत्यक्ष रूप में दूसरे पठन से ही आरम्भ किया जाता है। इसका कारण यह है कि सरकारी विधेयकों को सदन द्वारा स्वीकृति प्राप्त होने के प्रति कोई संदेह नहीं होता है।

वार्ष 2020 में पारित मत्वपूर्ण विधेयकों की सूची List of important bills passed in the year 2020

जम्मू एवं कश्मीर आधिकारिक भाषा बिल, 2020 (The Jammu and Kashmir Official Languages Bill, 2020)

मंत्रालय गृह मंत्रालय
लोकसभा में प्रस्तावित 22 सितंबर 2020
लोकसभा में पारित 22 सितंबर 2020
राज्यसभा में पारित 23 सितंबर 2020

विदेशी योगदान (रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2020 The Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2020

लोकसभा में 22 सितंबर, 2020 को जम्मू एवं कश्मीर आधिकारिक भाषा बिल, 2020 को पेश किया गया। बिल कश्मीरी, डोगरी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी को जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में आधिकारिक उद्देश्य से इस्तेमाल होने वाली आधिकारिक भाषाएं घोषित करता है। यह प्रावधान उस तारीख से लागू होगा, जिस तारीख को केंद्र शासित प्रदेश का एडमिनिस्ट्रेटर अधिसूचित करेगा। बिल कहता है कि केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा इन आधिकारिक भाषाओं में काम करेगी। बिल स्पष्ट करता है कि एक्ट के लागू होने से पहले जिन प्रशासनिक और विधायी उद्देश्यों के लिए अंग्रेजी का इस्तेमाल होता था, उनके लिए अब भी अंग्रेजी का इस्तेमाल होता रहेगा।

मंत्रालय गृह मंत्रालय
लोकसभा में प्रस्तावित 20 सितंबर 2020
लोकसभा में पारित 21 सितंबर 2020
राज्यसभा में पारित 23 सितंबर 2020

लोकसभा में 20 सितंबर, 2020 को विदेशी योगदान (रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2020 को प्रस्तावित किया गया। यह बिल विदेशी योगदान (रेगुलेशन) एक्ट, 2010 में संशोधन करता है। एक्ट व्यक्तियों, संगठनों और कंपनियों के विदेशी योगदान की मंजूरी और उपयोग को रेगुलेट करता है। विदेशी योगदान किसी विदेशी स्रोत से किसी करंसी, सिक्योरिटी या आर्टिकल (एक निर्दिष्ट मूल्य से अधिक) के दान या ट्रांसफर को कहा जाता है।

एक्ट के अंतर्गत चुनावी उम्मीदवार, अखबार के संपादक या पब्लिशर, जज, सरकारी कर्मचारी (गवर्नमेंट सर्वेंट), विधायिका का कोई सदस्य और राजनैतिक दल, इत्यादि लोगों के विदेशी योगदान देने पर पाबंदी है। बिल इस सूची में लोक सेवक (पब्लिक सर्वेंट्स) को शामिल करता है (जैसा भारतीय दंड संहिता में परिभाषित है)। पब्लिक सर्वेंट्स में ऐसा कोई भी व्यक्ति शामिल है जो सरकार की सेवा या वेतन पर है या उसे किसी लोक सेवा के लिए सरकार से मेहनताना मिलता है।

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 The Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020

मंत्रालय श्रम एवं रोजगार
लोकसभा में प्रस्तावित 19 सितंबर 2020
लोकसभा में पारित 22 सितंबर 2020
राज्यसभा में पारित 23 सितंबर 2020

श्रम और रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने 19 सितंबर, 2020 को लोकसभा में सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 को पेश किया। यह संहिता सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नौ कानूनों, जिनमें कर्मचारी प्रॉविडेंट फंड एक्ट, 1952, मातृत्व लाभ एक्ट, 1961 और असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा एक्ट, 2008 का आदि जैसे जगाह लेती है। सामाजिक सुरक्षा उन उपायों को कहा जाता है जो श्रमिकों को स्वास्थ्य सेवा संबंधी सुविधा और आय सुरक्षा के प्रावधान को सुनिश्चित करते हैं।

सामाजिक सुरक्षा योजनाएं: संहिता के अंतर्गत केंद्र सरकार श्रमिकों के लाभ के लिए विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को अधिसूचित कर सकती है। इनमें कर्मचारी प्रॉविडेंट फंड (ईपीएफ) योजना, कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (ईडीएलआई) योजना शामिल हैं। ये क्रमशः प्रॉविडेंट फंड, पेंशन फंड और बीमा योजना प्रदान करती हैं। सरकार निम्नलिखित को भी अधिसूचित कर सकती है: (i) बीमारी, मातृत्व और अन्य लाभ प्रदान करने के लिए कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) योजना, (ii) रोजगार के पांच वर्ष पूर्ण होने (या कुछ मामलों में पांच वर्ष से कम होने पर, जैसे पत्रकार और निश्चित अवधि के श्रमिक) पर श्रमिकों को ग्रैच्युटी, (iii) महिला कर्मचारियों को मातृत्व लाभ, (iv) भवन निर्माण और निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए सेस, और (v) व्यवसायगत चोट या बीमारी की स्थिति में कर्मचारियों और उनके आश्रितों को मुआवजा।

औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक, 2020 The Industrial Relations Code Bill, 2020

मंत्रालय श्रम एवं रोजगार
लोकसभा में प्रस्तावित 19 सितंबर 2020
लोकसभा में पारित 22 सितंबर 2020
राज्यसभा में पारित 23 सितंबर 2020

लोकसभा में 19 सितंबर, 2020 को औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 को पेश किया गया। यह संहिता तीन श्रम कानूनों (i) औद्योगिक विवाद एक्ट, 1947, (ii) ट्रेड यूनियन एक्ट, 1926 और (iii) औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) एक्ट, 1946 का स्थान लेती है। संहिता के अंतर्गत, ट्रेड यूनियन के सात या उससे अधिक सदस्य उसे रजिस्टर करने का आवेदन कर सकते हैं। कम से कम 10% सदस्यों वाली या 100 श्रमिकों वाली (इनमें से जो भी कम हो) ट्रेड यूनियन्स रजिस्टर की जाएंगी। केंद्र और राज्य सरकार ट्रेड यूनियन या ट्रेड यूनियन्स के परिसंघ को क्रमशः केंद्रीय या राज्य ट्रेड यूनियन्स के रूप में मान्यता दे सकती है।

व्यवसायगत सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियां संहिता, 2020

मंत्रालय श्रम एवं रोजगार
लोकसभा में प्रस्तावित 19 सितंबर 2020
लोकसभा में पारित 22 सितंबर 2020
राज्यसभा में पारित 23 सितंबर 2020

श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने 19 सितंबर, 2020 को लोकसभा में व्यवसागत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता, 2020 को पेश किया। संहिता स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं कार्य स्थितियों को रेगुलेट करने वाले 13 मौजूदा एक्ट्स को एकीकृत करती है। इनमें कारखाना एक्ट, 1948, खदान एक्ट, 1952 और कॉन्ट्रैक्ट श्रमिक (रेगुलेशन और उन्मूलन) एक्ट, 1970 शामिल हैं।

संहिता न्यूनतम 10 श्रमिकों वाले इस्टैबलिशमेंट्स पर लागू होगी। यह सभी खदानों एवं डॉक्स पर और उन इस्टैबलिशमेंट्स पर लागू होगी जहां जोखिमपरक या जानलेवा किस्म के कार्य किए जाते हैं (केंद्र सरकार इन्हें अधिसूचित कर सकती है)। संहिता के कुछ प्रावधान जैसे स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां सभी कर्मचारियों पर लागू होंगे। कर्मचारियों में श्रमिक और प्रबंधकीय, प्रशासनिक या सुपरवाइजरी जैसे कार्यों से वेतन अर्जित करने वाले सभी लोग शामिल होंगे।

कराधान एवं अन्य कानून (कुछ प्रावधानों से छूट) अध्यादेश, 2020 The Taxation and Other Laws (Relaxation and Amendment of Certain Provisions) Bill, 2020

मंत्रालय वित्त
लोकसभा में प्रस्तावित 18 सितंबर 2020
लोकसभा में पारित 19 सितंबर 2020
राज्यसभा में पारित 22 सितंबर 2020

इस विधेयक के जरिये पीएम केयर्स फंड में उसी तरह का कर लाभ देने का प्रावधान किया गया है जिस प्रकार की कर छूट प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में उपलब्ध है. कराधान एवं अन्य कानून (कुछ प्रावधानों से छूट) अध्यादेश, 2020 को मार्च में लाया गया था. विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 के दौरान वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और आयकर अधिनियम के तहत विभिन्न अनुपालन समय सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए अध्यादेश लाना जरूरी हो गया था।

दि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2020 The Insolvency and Bankruptcy Code (Second Amendment) Bill, 2020

मंत्रालय वित्त
राज्यसभा में प्रस्तावित 15 सितंबर 2020
राज्यसभा में पारित 19 सितंबर 2020
लोकसभा में पारित 21 सितंबर 2020

संसद ने ‘इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2020’ को मंजूरी दे दी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत कर्ज भुगतान में चूक करने वाली कंपनियों और व्यक्तिगत गारंटी देने वालों के खिलाफ साथ-साथ दिवाला कार्रवाई चल सकती है।

क्वालिफाइड फाइनांशियल कॉन्ट्रैक्ट्स की द्वपक्षीय नेटिंग बिल, 2020 The Bilateral Netting of Qualified Financial Contracts Bill, 2020

मंत्रालय वित्त
लोकसभा में प्रस्तावित 14 सितंबर 2020
लोकसभा में पारित 20 सितंबर 2020
राज्यसभा में पारित 23 सितंबर 2020

लोकसभा में 14 सितंबर, 2020 को क्वालिफाइड फाइनांशियल कॉन्ट्रैक्ट्स की द्विपक्षीय नेटिंग बिल, 2020 पेश किया गया। यह बिल उन क्वालिफाइड फाइनांशियल कॉन्ट्रैक्ट्स की द्विपक्षीय नेटिंग के लिए कानूनी संरचना प्रदान करता है जो ओवर द काउंटर डेरेवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स हैं। दो पक्षों के बीच सौदे से उत्पन्न दावों की भरपाई को नेटिंग कहा जाता है जिसमें एक पक्ष से दूसरे पक्ष को देय या प्राप्य राशि का निर्धारण किया जाता है। बिल क्वालिफाइड फाइनांशियल कॉन्ट्रैक्ट्स की नेटिंग को लागू करता है।

क्यूएफसी ऐसा कोई भी द्विपक्षीय कॉन्ट्रैक्ट है जिसे संबंधित अथॉरिटी ने क्यूएफसी के तौर पर अधिसूचित किया है। यह अथॉरिटी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी), इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (इरडा), पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) या इंटरनेशनल फाइनांशियल सर्विसेज़ अथॉरिटी (आईएफएससीए) हो सकती है। केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए कुछ पक्षों के बीच या कुछ शर्तों वाले कॉन्ट्रैक्ट्स को क्यूएफसी की सूची से हटा सकती है।

महामारी रोग (संशोधन) बिल, 2020 Epidemic Diseases Amendment Bill 2020

मंत्रालय स्वास्थ्य
राज्यसभा में प्रस्तावित 14 सितंबर 2020
राज्यसभा में पारित 19 सितंबर 2020
लोकसभा में पारित 21 सितंबर 2020

महामारी रोग (संशोधन) बिल, 2020 को 14 सितंबर, 2020 को राज्यसभा में पेश किया गया। बिल महामारी रोग एक्ट, 1897 में संशोधन करता है। एक्ट में खतरनाक महामारियों की रोकथाम से संबंधित प्रावधान हैं। बिल इस एक्ट में संशोधन करता है जिससे महामारियों से जूझने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को संरक्षण प्रदान किया जा सके, तथा ऐसी बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार की शक्तियों में विस्तार करता है। बिल महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश को रद्द करता है जिसे 22 अप्रैल, 2020 को जारी किया गया था।

बिल स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को ऐसे व्यक्तियों के रूप में परिभाषित करता है जिन पर अपने कर्तव्यों का पालन करने के दौरान महामारियों के संपर्क में आने का जोखिम है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) पब्लिक और क्लिनिकल स्वास्थ्यसेवा प्रदाता जैसे डॉक्टर और नर्स, (ii) ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसे एक्ट के अंतर्गत बीमारी के प्रकोप की रोकथाम के लिए सशक्त किया गया है, और (iii) अन्य कोई व्यक्ति जिसे राज्य सरकार ने ऐसा करने के लिए नामित किया है।

बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 The Banking Regulation (Amendment) Bill, 2020

मंत्रालय वित्त
लोकसभा में प्रस्तावित 14 सितंबर 2020
लोकसभा में पारित 16 सितंबर 2020
राज्यसभा में पारित 22 सितंबर 2020

राज्यसभा ने बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस बिल को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करने और भारतीय रिज़र्व बैंक के नियामक ढांचे के तहत लाकर सहकारी बैंकों के कामकाज को विनियमित करने के उद्देश्य से पेश किया था। परंतु संसद जून में सत्र में नहीं थी, इसलिए उस महीने के 26 तारीख को राष्ट्रपति द्वारा इस आशय का एक अध्यादेश लागू किया गया था। विधेयक अध्यादेश को बदलने और बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में संशोधन करना चाहता है। इसे 16 सितंबर को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था। बिल ‘बैंकिंग गतिविधियों’ को नियंत्रित करता है और अन्य सहकारी समितियों पर लागू नहीं होता है। संविधान की सूची 1 की प्रविष्टि 45 केंद्र सरकार को “बैंकिंग” के लिए कानून बनाने का अधिकार देती है।

मंत्रियों के वेतन और भत्ते का संशोधन (संशोधन) अध्यादेश, 2020, The Salaries and Allowances of Ministers (Amendment) Ordinance, 2020

मंत्रालय संसदीय मामले
लोकसभा में प्रस्तावित 14 सितंबर 2020
लोकसभा में पारित 15 सितंबर 2020
राज्यसभा में पारित 18 सितंबर 2020

सरकार ने एक वर्ष के लिए सांसदों के कुछ भत्तों में कटौती के लिए 1954 के एक्ट के कुछ अधिसूचित नियमों में भी संशोधन किए हैं। इनमें निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और कार्यालयी भत्ता शामिल हैं। वेतन तथा भत्तों में उपरिलिखित परिवर्तन एक वर्ष के लिए किए गए हैं जोकि 1 अप्रैल, 2020 से प्रभावी हैं। वेतन-भत्तों में कटौतियों का उद्देश्य यह है कि केंद्र को कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए वित्तीय संसाधन हासिल हों।

आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020 The Essential Commodities (Amendment) Bill, 2020

मंत्रालय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण
लोकसभा में प्रस्तावित 14 सितंबर 2020
लोकसभा में पारित 15 सितंबर 2020
राज्यसभा में पारित 22 सितंबर 2020

संसद ने आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020 को पारित कर दिया है. इसके तहत अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू को आवश्यक वस्तु की सूची से हटा दिया गया है।

भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2020 The Indian Medicine Central Council (Amendment) Bill, 2020

मंत्रालय आयुर्वेदा, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिध्द और गृहप्रवेश
लोकसभा में प्रस्तावित 14 सितंबर 2020
लोकसभा में पारित 21 सितंबर 2020
राज्यसभा में पारित 18 सितंबर 2020

राज्य सभा ने आज होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक, 2020 और भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक, 2020 को पारित कर दिया। होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक होम्योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1973 में संशोधन किया गया है। इस अधिनियम में केंद्रीय होम्योपैथी परिषद की व्यवस्था की गई है जो होम्योपैथिक शिक्षा और प्रेक्टिस को नियंत्रित करेगी। यह विधेयक अप्रैल में जारी होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन अध्यादेश का स्थान लेगा। इसके तहत केंद्रीय परिषद की अवधि को दो साल से बढ़ाकर तीन साल करने के लिए 1973 के कानून में संशोधन किया गया है।

भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक, 2020 को 1970 के भारतीय चिकित्‍सा केन्‍द्रीय परिषद कानून में संशोधन के लिए लाया गया है। यह अधिनियिम आर्युवेद, योग और नेचुरोपैथिक सहित भारतीय चिकित्‍सा पद्धति की शिक्षा और अभ्‍यास को नियंत्रित करता है।

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