हर्षवर्धन काल, पुष्यभूति वंश का इतिहास एवं महत्वपूर्ण तथ्यों की सूची

हर्षवर्धन काल, पुष्यभूति वंश का इतिहास एवं महत्वपूर्ण तथ्यों की सूची: (King Harshvardhan History and Facts about Punyabhuti Dynasty in Hindi)

पुष्यभूति वंश या वर्धन राजवंश की स्थापना छठी शताब्दी ई. में गुप्त वंश के पतन के बाद हरियाणा के अम्बाला ज़िले के थानेश्वर नामक स्थान पर हुई थी। इस वंश का संस्थापक ‘पुष्यभूति’ को माना जाता है, जो कि शिव का उपासक और उनका परम भक्त था। इस वंश में तीन राजा हुए- प्रभाकरवर्धन और उसके दो पुत्र राज्यवर्धन तथा हर्षवर्धन।

पुष्यभूति वंश के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य:

  • इसकी राजधानी कन्नौज थी।
  • इस वंश का शासन 647ई तक रहा।
  • यह वंश हूणों के साथ हुए अपने संघर्ष के कारण बहुत प्रसिद्ध हुआ।
  • यह साम्राज्य पूर्व में कामरूप (वर्तमान में असम) से दक्षिण में नर्मदा नदी तक फैला हुआ था।
  • संभवतः प्रभाकरवर्धन इस वंश का चौथा शासक था। इसके विषय में जानकारी हर्षचरित से मिलती है।
  • प्रभाकरवर्धन दो पुत्रों- राज्यवर्धन और हर्षवर्धन एवं एक पुत्री राज्यश्री का पिता था।
  • पुत्री राज्यश्री का विवाह प्रभाकरवर्धन ने मौखरि वंश के गृहवर्मन से किया था।
  • प्रभाकरवर्धन की मृत्यु के बाद राज्यवर्धन सिंहासनारूढ़ हुआ, पर शीघ्र ही उसे मालवा के ख़िलाफ़ अभियान के लिए जाना पड़ा।
  • भारत का अधिकांश उत्तरी तथा पश्चिमोत्तर भाग इस समय हर्ष के साम्राज्य के अन्तर्गत था।
  • अभियान की सफलता के उपरान्त लौटते हुए मार्ग में गौड़ वंश के शशांक ने राज्यवर्धन की हत्या कर दी।
  • इसके बाद हर्षवर्धन राजा बना और वह शशांक की मृत्यु के बाद ही अपने राज्य का पर्याप्त विस्तार कर सका।
  • इस वंश का सबसे प्रतापी तथा अन्तिम राजा हर्षवर्धन हुआ जिसके शासन काल में यह वंश अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँचा।

पुष्यभूति या वर्धन वंश के ज्ञात शासक निम्नलिखित हैं, शासन की अनुमानित अवधि के साथ:

  1. पुष्यभूति (पुष्यभूति) संभवतः पौराणिक
  2. नरवर्धन 500-525 ई.पू.
  3. राज्यवर्धन 525-555 ई.पू.
  4. आदित्यवर्धन (vdityvardhana या asdityasena) 555-580 ई.पू.
  5. प्रभाकर-वर्धन (प्रभाकरवर्धन) 580-605 ई.पू.
  6. राज्य-वर्धन (राजवर्धन 2) 605-606 सीई
  7. हर्ष-वर्धन (हरवर्धन) 606-647 ई.पू.

हर्षवर्धन काल (606 ई. से 647 ई.) का इतिहास:

हर्षवर्धन पुष्यभूति राजवंश से संबंध रखता था जिसकी स्थापना नरवर्धन ने 5वीं या छठी शताब्दी ईस्वी के आरम्भ में की थी। यह केवल थानेश्वर के राजा प्रभाकर वर्धन (हर्षवर्धन के पिता) के अधीन था। पुष्यभूति समृद्ध राजवंश था और इसने महाराजाधिराज का खिताब प्राप्त किया था। हर्षवर्धन 606 ईस्वी में 16 वर्ष की आयु में तब सिंहासन का उत्तराधिकारी बना था जब उसके भाई राज्यवर्धन की शशांक द्वारा हत्या कर दी गयी थी जो गौड और मालवा के राजाओं का दमन करने निकला था। हर्ष को स्कालोट्टारपथनाथ के रूप में भी जाना जाता था। सिंहासन पर बैठने के बाद उसने अपनी बहन राज्यश्री को बचाया और एक असफल प्रयास के साथ शशांक की तरफ बढा था।

अपने दूसरे अभियान में, शशांक की मौत के बाद, उसने मगध और शशांक के साम्राज्य पर विजय प्राप्त की थी। उसने कन्नौज में अपनी राजधानी स्थापित की। एक बड़ी सेना के साथ, हर्षवर्धन ने अपने साम्राज्य को पंजाब से उत्तरी उड़ीसा तथा हिमालय से नर्मदा नदी के तट तक विस्तारित किया। उसने नर्मदा से आगे भी अपने साम्राज्य को विस्तारित करने की कोशिश की लेकिन ऐसा करने में वह विफल रहा था। उसे बादामी के चालुक्य राजा पुलकेसिन द्वितीय के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। 647 ईस्वी में हर्षवर्धन की मृत्यु के साथ ही उसके साम्राज्य का भी अंत हो गया।

हर्षवर्धन काल से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:

  • 606 ई. में हर्षवर्धन थानेश्वर के सिंहासन पर बैठा।
  • हर्षवर्धन के बारे में जानकारी के स्रोत है- बाणभट्ट का हर्षचरित, ह्वेनसांग का यात्रा विवरण और स्वयं हर्ष की रचनाएं।
  • हर्षवर्धन का दूसरा नाम शिलादित्य था। हर्ष ने महायान बौद्ध धर्म को संरक्षण प्रदान किया।
  • हर्ष ने 641 ई. में अपने दूत चीन भेजे तथा 643 ई. और 646 ई. में दो चीनी दूत उसके दरबार में आये।
  • हर्ष ने 646 ई. में कन्नौज तथा प्रयाग  में दो विशाल धार्मिक सभाओं का आयोजन किया।
  • हर्ष ने कश्मीर के शासक से बुद्ध के दंत अवशेष बलपूर्वक प्राप्त किये।
  • हर्षवर्धन शिव का भी उपासक था। वह सैनिक अभियान पर निकलने से पूर्व रूद्र शिव की आराधना किया करता था।
  • हर्षवर्धन साहित्यकार भी था। उसने प्रियदर्शिका, रत्नावली तथा नागानंद  तीन ग्रंथों (नाटक) की रचना की।
  • बाणभट्ट हर्ष का दरबारी कवि था। उसने हर्षचरित, कादम्बरी तथा शुकनासोपदेश आदि कृतियों की रचना की।
  • हर्षवर्धन की बहन राज्यश्री का विवाह कन्नौज के शासक ग्रहवर्मन से हुआ था।
  • मालवा के शासक देवगुप्त तथा गौड़ शासक शशांक ने, ग्रहवर्मन की हत्या करके कन्नौज पर अधिकार कर लिया।
  • हर्षवर्धन ने शशांक को पराजित करके कन्नौज पर अधिकार करके उसे अपनी राजधानी बना लिया था।
  • हर्षवर्धन को बांसखेड़ा तथा मधुबन अभिलेखों में परम महेश्वर कहा गया है।
  • ह्वेनसांग के अनुसार, हर्ष ने पड़ोसी राज्यों पर अपना अधिकार करके अपने अधीन कर लिया था। दक्षिण भारत के अभिलेखों से यह स्पष्ट होता है की हर्ष सम्पूर्ण उत्तरी भारत का स्वामी था।

  • हर्ष के साम्राज्य का विस्तार उत्तर में थानेश्वर (पूर्वी पंजाब) से लेकर दक्षिण में नर्मदा नदी के तट तथा पूर्व में गंजाम से लेकर पश्चिम में वल्लभी तक फैला हुआ था।
  • भारतीय इतिहास में हर्ष का सर्वाधिक महत्त्व इसलिए भी है की वह उत्तरी भारत का अंतिम हिन्दू सम्राट था, जिसने आर्यावर्त पर शासन किया।
  • उसने कई विश्राम गृहों और अस्पतालों का निर्माण करवाया था।
  • ह्वेनसांग ने कन्नौज में आयोजित भव्य सभा के बारे में उल्लेख किया है जिसमें बीस राजाओं, चार हजार बौद्ध भिक्षुओं और तीन हजार जैन तथा ब्राह्मणों ने भाग लिया था।
  • हर्ष हर पांच साल के अंत में, प्रयाग (इलाहाबाद) में महामोक्ष हरिषद नामक एक धार्मिक उत्सव का आयोजन करता था। यहां पर वह दान समारोह आयोजित करता था।
  • हर्षवर्धन ने अपनी आय को चार बराबर भागों में बांट रखा था जिनके नाम–शाही परिवार के लिए, सेना तथा प्रशासन के लिए, धार्मिक निधि के लिए और गरीबों और बेसहारों के लिए थे।
  • ह्वेनसांग के अनुसार, हर्षवर्धन के पास एक कुशल सरकार थी। उसने यह भी उल्लेख किया है कि वहां परिवार पंजीकृत नहीं किये गये थे और कोई बेगार नहीं था। लेकिन नियमित रूप से होने वाली डकैती के बारे में उसे शिकायत थी।
  • पुलकेसिन द्वितीय के हाथों हर्षवर्धन की हार का उल्लेख ऐहोल शिलालेख (कर्नाटक) में किया गया है। वह पहला उत्तर भारतीय राजा था जिसे दक्षिण भारतीय राजा के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा था।

इन्हें भी पढे: शिशुनाग वंश का इतिहास, शासकों का नाम एवं महत्‍वपूर्ण तथ्य

This post was last modified on September 6, 2020 4:44 pm

You just read: King Harshvardhan And Punyabhuti Dynasty History In Hindi - MAJOR DYNASTIES OF INDIA Topic

Recent Posts

28 सितम्बर का इतिहास भारत और विश्व में – 28 September in History

आईये जानते हैं भारत और विश्व इतिहास में 28 सितम्बर यानि आज के दिन की महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में।…

September 28, 2020

राजा राममोहन राय का जीवन परिचय-Raja Ram Mohan Roy Biography

इंग्लैण्ड का दौरा करने वाले प्रथम भारतीय: राजा राममोहन राय का जीवन परिचय: (Biography of Raja Ram Mohan Roy in…

September 27, 2020

27 सितम्बर का इतिहास भारत और विश्व में – 27 September in History

आईये जानते हैं भारत और विश्व इतिहास में 27 सितम्बर यानि आज के दिन की महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में।…

September 27, 2020

2020 में पारित बिलों की सूची- List of important bills passed in the year 2020

विधेयक का अर्थ 'विधेयक' अंग्रेजी के बिल (Bill) का हिन्दी रूपान्तरण है। इस लेख में 'बिल' शब्द का प्रयोग 'संसद…

September 26, 2020

भारत के प्रथम सिक्ख प्रधानमंत्री: डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन परिचय

डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन परिचय (Biography of First Indian Sikh Prime Minister Dr. Manmohan Singh in Hindi) डॉ. मनमोहन…

September 26, 2020

विश्व मूक बधिर दिवस (26 सितम्बर)

विश्व मूक बधिर दिवस (26 सितम्बर): (26 September: World Deaf-Dumb Day in Hindi) विश्व मूक बधिर दिवस कब मनाया जाता है? हर…

September 26, 2020

This website uses cookies.