भारत के प्रमुख दर्रो के नाम उनके स्थान और महत्वपूर्ण तथ्यों की सूची


General Knowledge: List Of Main Passes Of India In Hindi [Post ID: 5131]



भारत के प्रमुख दर्रे: (Important Facts about Main Passes of India in Hindi)

दर्रा किसे कहते है?

दर्रा का अर्थ: पहाडियों एव पर्वतिय क्षेत्रों मे पाए जाने वाले आवागमन के प्राकृतिक मार्गों को दर्रा कहा जाता हैं।

भारत में हिमालय पर कई खुबसूरत लेकिन परिवहन के लिए खतरनाक दर्रे हैं। ये दर्रे व्यापार, यात्रा, युद्ध और प्रवास में एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस पोस्ट में भारत के प्रमुख दर्रो के बारे में महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान जानकारी दी गयी है। आइये जानते है कौन सा दर्रा कहाँ स्थित है:-

भारत के प्रमुख दर्रो की सूची:

  • आफिल दर्रा: काराकोरम श्रेणी में K 2 के उत्तर लगभग 5306 मी. की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा लद्दाख को चीन के झिंजियांग (सिकियांग) प्रान्त से जोड़ता है। शीत ऋतु में यह नवंबर से मई के प्रथम सप्ताह तक बंद रहता है।
  • इमिस ला: समुद्र तल से 5271 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा लद्दाख को तिब्बत से जोड़ने का आसान रास्ता उपलब्ध कराता है। दुरूह भू-भाग और खड़ी ढाल वाला यह दर्रा शीत ऋतु में बर्फ से ढक जाने के कारण बंद रहता है।
  • काराताघ दर्रा: काराकोरम पर्वत श्रेणी में समुद्र तल से लगभग 5295 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा प्राचीन रेशम मार्ग की एक शाखा थी। शीतकाल में यह बर्फ से ढका रहता है।
  • खारदुंग ला: समुद्र तल से 5602 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा से का परिवहन योग्य भारत और संभवतः दुनिया का सबसे ऊँचा दर्रा है। परन्तु इसकी यह ऊँचाई विवादित भी है। लद्दाख क्षेत्र में लेह के पास स्थित यह दर्रा श्योक और नुब्रा घाटियों जोड़ता है।
  • खुन्जेराब दर्रा: समुद्र तल से 4,693 मीटर की ऊँचाई पर स्थित काराकोरम श्रेणी का यह दर्रा लद्दाख और चीन के सिक्यांग प्रान्त को जोड़ने वाल परंपरागत दर्रा है। यह चीन के झिंजियांग क्षेत्र के दक्षिण पश्चिमी सीमा पर और पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान की उत्तरी सीमा पर, एक सामरिक स्थिति में काराकोरम पर्वत पर स्थित है। शीत काल में यह बर्फ से ढका रहता है।
  • चंशल दर्रा: यह दर्रा हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में दोदरा क्वार और रोहड़ू को जोड़ता है। यह शिमला की सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर 4520 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
  • चांग ला: समुद्र तल से 5360 मीटर की ऊँचाई पर स्थित महान हिमालय का यह दर्रा लद्दाख को तिब्बत से जोड़ता है। यह दर्रा लेह से पांगोंग झील को जाने वाले रस्ते में पड़ता है। जो तिब्बत के एक छोटे से शहर तांगत्से से जोडता है। इसका नाम इस दर्रे में स्थित चांग-ला बाबा के मंदिर के नाम पर किया गया है। बर्फ से ढक जाने के कारण शीत ऋतु में यह बंद रहता है। यह दुनिया का तीसरा सबसे ऊँचा परिवहन योग्य दर्रा है, जो सिन्धु घाटी को पांगोंगझील के क्षेत्र से जोड़ता है।
  • जेलेप ला: जेलेप ला दर्रे 4,270 मीटर की ऊंचाई पर पूर्वी सिक्किम जिले में स्थित है। यह दर्रा सिक्किम को ल्हासा से जोड़ता है। यह चुम्बी घाटी में स्थित है।
  • जोजी ला: समुद्र तल से 3528 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा श्रीनगर को कारगिल और लेह से जोड़ता है। अत्यधिक बर्फ़बारी के कारण यह शीतकाल में बंद रहता है। सीमा सड़क संगठन द्वार इसे वर्ष की अधिकतर अवधि तक खोले रखने की कोशिश की जाती रही है। इसकी देखभाल और इस पर से बर्फ हटाने के लिए इस संगठन द्वारा एक बीकॅान फोर्स स्थापना भी की गयी है।
  • ट्रेल्स दर्रा: यह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में समुद्र तल से 5212 मी. की ऊँचाई पर स्थित है। नंदा देवी और नंदा कोट चोटियों के बीच स्थित है। पिंडारी हिमनद के कगार पर स्थित यह दर्रा पिंडारी घाटी को मिलाम घाटी से जोड़ता है। खड़ी ढाल और विषम सतह के कारण इस दर्रे को पर करना काफी कठिन है।
  • डिफू दर्रा: यह दर्रा 4587 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित यह दर्रा इस राज्य को मंडाले (म्यांमार) तक का आसान और सबसे छोटा रास्ता (दिहांग की तुलना में) उपलब्ध कराता है। यह भारत और म्यांमार के बीच का एक परंपरागत दर्रा है, जो व्यापार और परिवहन के लिए वर्ष भर खुला रहता है।
  • थांग ला (लद्दाख):  समुद्र तल से  लगभग 5,328 मीटर की ऊँचाई पर लद्दाख क्षेत्र में यह दर्रा स्थित है, खारदुंग ला के बाद परिवहन योग्य यह भारत का दूसरा सबसे ऊँचा दर्रा है।
  • दिहांग दर्रा: यह दर्रा अरुणाचलचल प्रदेश राज्य में समुद्र तल से लगभग 1220 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह अरुणांचल प्रदेश को मंडाले (म्यांमार) से जोड़ता है।
  • देब्सा दर्रा: समुद्र तल से 5360 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह हिमांचल प्रदेश के कुल्लू और स्पीति जिलों के मध्य यह दर्रा महान हिमालय पर स्थित है। कुल्लू और स्पीति को जोड़ने वाले पिन-परवती दर्रे की तुलना में यह एक असान और कम दूरी का विकल्प है। सुंदर स्पीति घाटी हिमालय के पहाड़ों में हिमाचल प्रदेश के उत्तर-पूर्वी भाग में तिब्बत और भारत के बीच एक रेगिस्तानी पहाड़ भूमि है। यह दर्रा कुल्लू में पार्वती नदी घाटी से होकर गुजरता है।
  • नाथू ला: यह भारत चीन सीमा पर तिब्बत क्षेत्र को सिक्किम से जोड़ता है।  समुद्र तल से लगभग 4,310 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा प्राचीन रेशम मार्ग की एक शाखा है। यह भारत और चीन के बीच खुले तीन व्यापारिक मार्गों में से एक है, अन्य दो हिमांचल प्रदेश में स्थित शिपकी-ला और उत्तराखंड में स्थित लिपुलेख है। भारत चीन युद्ध (1962) के पश्चात् इस वर्ष 2006 में पहली बार खोला गया था।
  • निति दर्रा: समुद्र तल से 5068 मी. की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा उत्तराखंड को तिब्बत से जोड़ता है। शीतकाल में यह बर्फ से ढके होने के कारण नवंबर से मध्य मई तक बंद रहता है। धौलीगंगा नदी उत्तराखंड के चमोली जिले में निति दर्रे से 5,070 मीटर (16,630 फीट) की ऊँचाई से निकलती है।

  • पंगसान दर्रा: समुद्र तल से 4000 मी. से भी अधिक ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा अरुणाचल प्रदेश को मंडले (म्यांमार) से जोड़ता है।
  • पीर-पंजाल दर्रा: जम्मू को श्रीनगर से जोड़ने वाला यह पारंपरिक दर्रा ‘मुग़ल रोड’ पर स्थित है। पीर की गली के नाम से विख्यात यह मुगल सड़क के माध्यम से राजौरी और पुंछ के साथ कश्मीर घाटी को जोड़ता है। जम्मू कश्मीर को घाटी  से जोड़ने वाला यह सबसे सरल और छोटा एवं पक्का मार्ग है। पीर की गली में मुगल रोड का उच्चतम बिंदु है 11500 फुट के लगभग है। यहाँ का निकटम शहर सोपियां है, जिसे सेबों की घाटी भी कहते हैं।
  • पेंजी ला: जोजी ला दर्रे के पूरब में, समुद्र तल से 4,400 मीटर की ऊँचाई पर स्थित महान हिमालय का यह दर्रा कश्मीर घाटी को कारगिल (लद्दाख) से जोड़ता है। इसे जांस्कर के लिए प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है। यह जांस्कर घाटी क्षेत्र को सुरु घाटी क्षेत्र से जोड़ता है शीतकाल में यह बर्फ से ढके होने के कारण नवंबर से मध्य मई तक आवागमन के लिए बंद रहता है। प्रसिद्द रंगदुम मठ यहाँ से लगभग 25 किमी दूर है।
  • बनिहाल दर्रा: समुद्र तल से 2832 मीटर की ऊँचाई पर पीरपंजाल श्रेणी में स्थित यह दर्रा जम्मू को श्रीनगर से जोड़ता है। शीत ऋतु में यह बर्फ से ढका रहता है। वर्ष पर्यन्त सड़क परिवहन की व्यवस्था करने के उद्देश्य से यहाँ जवाहर टनल (पंडित जवाहर लाल नेहरु के नाम पर) बने गयी, जिसका उद्घाटन 1956 में किया गया। जिसके कारण इस दर्रे का बहुत उपयोग नहीं रह गया।
  • बार लाप्चा: जम्मू कश्मीर में समुद्र तल से 4890 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह मनाली को लेह से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। शीत ऋतु में नवंबर से मध्य मई तक यह बर्फ से ढके होने के कारण आवागमन के लिये बंद रहता है।  यह जास्कर श्रेणी का सबसे ऊँचा दर्रा है।
  • बुर्जिल दर्रा: समुद्र तल बुरज़िल दर्रा 4,100 मीटर की ऊँचाई पर कश्मीर, गिलगित और श्रीनगर के बीच का एक प्राचीनमार्ग है। यह दर्रा कश्मीर घटी को लद्दाख के देवसाईं मैदानों से जोड़ता है। यह भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर स्थित है।
  • बोमाडी ला: भूटान के पूरब में अरुणाचल प्रदेश में में स्थित यह दर्रा समुद्र तल से 2217 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह अरुणाचल प्रदेश को तिब्बत की राजधानी ल्हासा से जोड़ता है।
  • बोरासु दर्रा: बोरासु दर्रा चीन के साथ सीमा के पास 5,450 मीटर  की ऊंचाई पर महान हिमालय पर्वत में स्थित है। यह उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को जोड़ता है। उच्च ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा अदभुत दून घाटी और किन्नौर घाटी के बीच एक पुराना व्यापार मार्ग था।
  • मंगशा धुरा दर्रा: समुद्र तल से लगभग 5674 मीटर की ऊँचाई पर पिथौरागढ़ स्थित यह दर्रा उत्तराखंड को तिब्बत से जोड़ता है। मानसरोवर की यात्रा लिए यात्रियों को इस दर्रे से भी गुजरना पड़ता है। पर्यटकों एवं तीर्थ यात्रियों के लिए भूस्खलन एक बड़ी समस्या है।
  • माना दर्रा:  समुद्र तल से लगभग 5545 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा उत्तराखंड को तिब्बत से जोड़ता है। इसे दुनिया की सबसे ऊँची परिवहन योग्य सड़क भी माना जाता है। शीतकाल में यह लगभग 6 महीने बर्फ से ढका रहता है। यह उत्तराखंड में हिंदू तीर्थ बद्रीनाथ से 27 किमी दूर उत्तर में स्थित है।
  • मुनिंग ला: गंगोत्री के उत्तर स्थित यह एक मौसमी दर्रा है, जो उत्तराखंड को तिब्बत से जोड़ता है। शीतकाल में यह बर्फ से ढका रहता है तथा यहाँ से कोई आवागमन संभव नहीं होता है।
  • रुपिन दर्रा: उत्तराखंड में रुपिन नदी के पार स्थित यह दर्रा उत्तराखंड में धौला से शुरू होता है और हिमाचल प्रदेश में सांगला में खत्म होता है। निर्जन रुपिन दर्रा महान हिमालय पर्वतमाला में 4650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इस दर्रे में गहरी अंधेरी घाटियों, बर्फीले ढलानों और क्षेत्रों से होकर गुजरना पड़ता है।
  • रोहतांग दर्रा: समुद्र तल से लगभग 3,978 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा हिमांचल प्रदेश की कुल्लू, लाहुल,एवं स्पीति घाटियों को जोड़ता है। प्रसिद्ध रोहतांग दर्रा महान हिमालय की पीर पंजाल रेंज में स्थित है। सीमा सड़क संगठन यहाँ एक उच्च कोटि के सड़क मार्ग की वयवस्था की गयी है। सैनिक वाहनों, बसों, ट्रकों एवं अन्य मालवाहकों के भरी आवागमन के कारण इस पर ट्राफिक जाम एक आम समस्या है। यह मई से नवंबर तक खुला  रोहतांग दर्रा बाकी समय बर्फीले तूफानों और हिमस्खलन के कारण इसको पार करना मुश्किल है।
  • लनक ला: अक्साई चिन (लद्दाख) में 5466 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा लद्दाख को ल्हासा से जोड़ता है। चीन ने यहाँ एक सड़क का निर्माण किया है। जो उसके सिक्यांग प्रान्त को तिब्बत से जोडती है। अक्साई चिन क्षेत्र के दक्षिणी-पश्चिमी सीमा पर है।
  • लिखापनी: अरुणाचल प्रदेश में 4000 मीटर से अधिक ऊँचाई पर स्थित इस दर्रे द्वारा इस राज्य को म्यांमार से जोड़ा जाता है। व्यापार एवं  यातायात के लिए यह वर्ष पर्यन्त काम करने वाला दर्रा है।
  • लिपु लेख: पिथौरागढ़ में स्थित यह दर्रा उत्तराखंड को तिब्बत से जोड़ता है। 5,334 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा  तिब्बत में पुरंग  को उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र से जोड़ता है। कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के तीर्थयात्री दर्रे इस से होकर जाते है। यह भारत के चीन से होने वाले व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • शिपकी ला: समुद्र तल से 4300 मीटर से भी अधिक ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा, सतलज महाखड्ड से होकर हिमांचल प्रदेश को तिब्बत से सम्बद्ध करता है। यह हिमाचल प्रदेश में किन्नौर जिले में स्थित है। तिब्बत से आने वाली सतलज नदी इसी दर्रे से भारत में प्रवेश करती है। भारत के चीन से होने वाले व्यापर के लिए यह तीसरा (नाथु ला और लिपुलेख के बाद) दर्रा (राजमार्ग 22) है। शीतकाल में यह बर्फ से ढका रहता है।
  • सेला दर्रा: जमा हुआ सेला दर्रा अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में 4,170 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। सेला दर्रा में सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है, लेकिन यह साल भरखुला रहता है। यह  तेजपुर और गुवाहाटी के माध्यम से तवांग को भारत से जोड़ता है। यह तवांग और प्रसिद्द बौद्ध तवांग मठ का प्रवेश द्वार है।

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