भारत के लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) और उनके कार्यकाल की सूची (1952 से 2018 तक)


General Knowledge: Name Of Speakers Of Lok Shabha In India In Hindi
Bharat Ke Lokasabha Adhyaksh (speekar) Aur Unke Kaaryakaal Ki Suchi 1952 Se Ab Tak



भारत के लोकसभा अध्यक्ष (1952-2018): (List of Lok Sabha Speakers in Hindi)

लोकसभा का अध्यक्ष (स्पीकर) किसे कहते है?

लोकसभा का अध्यक्ष (स्पीकर) संसद के निम्न सदन का सभापति होता है। ‘लोकसभा अध्यक्ष’ का पद भारतीय लोकतंत्र में एक महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। अध्यक्ष पद के बारे में कहा गया है कि संसद सदस्य अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, अध्यक्ष सदन के ही पूर्ण प्राधिकार का प्रतिनिधित्व करता है। कांग्रेस के बलराम जाखड़ सबसे लंबे समय तक सेवारत वक्ता थे , जो 9 साल 10 महीने और 27 दिन तक लोकसभा के अध्यक्ष रहे थे।

लोकसभा स्पीकर का कार्यकाल:

लोकसभा अध्यक्ष, इस पद पर निर्वाचित किये जाने की तारीख से लेकर जिस लोक सभा में उसका निर्वाचन किया गया हो, उसके भंग होने के बाद नई लोक सभा की प्रथम बैठक के ठीक पहले तक इस पर आसीन रहता है। वह पुनः इस पद पर निर्वाचित हो सकता है। लोक सभा भंग होने की स्थिति में यद्यपि अध्यक्ष संसद सदस्य नहीं रहता है परन्तु उसे अपना पद नहीं छोड़ना पड़ता है। अध्यक्ष किसी भी समय उपाध्यक्ष को लिखित सूचना देकर अपने पद से त्याग-पत्र दे सकता है। अध्यक्ष को उसके पद से लोक सभा में उपस्थित सदस्यों द्वारा बहुमत से पारित संकल्प द्वारा ही हटाया जा सकता है।

लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव:

भारतीय संसद के निचले सदन, लोक सभा में, दोनों पीठासीन अधिकारियों, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का निर्वाचन, इसके सदस्यों में से सभा में उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत द्वारा किया जाता है। वैसे तो अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए कोई विशेष योग्यता निर्धारित नहीं की गई है और संविधान में मात्र यह अपेक्षित है कि वह सभा का सदस्य होना चाहिए। परन्तु अध्यक्ष का पद धारण करने वाले व्यक्ति के लिए संविधान, देश के क़ानून, प्रक्रिया नियमों और संसद की परिपाटियों की समझ होना एक महत्त्वपूर्ण गुण माना जाता है।

लोकसभा के वर्तमान अध्यक्ष (स्पीकर):

भारत के लोकसभा की वर्तमान अध्यक्ष सुमित्रा महाजन हैं। वे इस पद पर आसीन होने वाली देश की दूसरी महिला हैं। वे भारत के इन्दौर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की 16वीं लोकसभा में सांसद हैं। वे इंदौर से लगातार वर्ष 1989,1991, 1996, 1998, 1999, 2004, 2009 और अब 2014 में आठवीं बार सांसद बनी हैं।

भारतीय लोक सभा के स्पीकर (अध्यक्षो)/वक्ताओं की सूची:

नाम कार्यकाल अवधि
जी॰ वी॰ मावलंकर 15 मई 1952 से 27 फ़रवरी 1956 तक
एमए अय्यंगर 08 मार्च 1956 से 16 अप्रैल 1962 तक
सरदार हुकम सिंह 17 अप्रैल 1962  से 16 मार्च 1967 तक
नीलम संजीव रेड्डी 17 मार्च 1967 से 19 जुलाई 1969 तक
जीएस ढिल्लों 08 अगस्त 1969  से 01 दिसम्बर 1975 तक
बलि राम भगत 15 जनवरी 1976 से 25 मार्च 1977 तक
एन संजीव रेड्डी 26 मार्च 1977 से 13 जुलाई 1977 तक
के. एस॰ हेगड़े 21 जुलाई 1977 से 21 जनवरी 1980 तक
बलराम जाखड़ 22 जनवरी 1980 से 18 दिसम्बर 1989 तक
रबी रे 19 दिसम्बर 1989 से 09 जुलाई 1991 तक
शिवराज पाटिल 10 जुलाई 1991 से 22 मई 1996 तक
पी॰ए॰ संगमा 25 मई 1996 से 23 मार्च 1998 तक
जी॰ एम॰ सी॰ बालयोगी 24 मार्च 1998 से 03 मार्च 2002 तक
मनोहर जोशी 10 मई 2002 से 02 जून 2004 तक
सोमनाथ चटर्जी 4 जून 2004 से 30 मई 2009 तक
मीरा कुमार 30 मई 2009 से 06 जून 2014 तक
सुमित्रा महाजन 06 जून 2014 से अब तक

अंतिम संशोधन: 24 अगस्त 2018

इन्हें भी पढे: भारतीय राज्यों के वर्तमान राज्यपाल एवं उप-राज्यपाल

लोकसभा अध्यक्ष के कार्य और अधिकार:

  • भारतीय संविधान द्वारा दी गई शक्तियों के जरिये लोकसभा की प्रक्रिया व कार्यवाही का संचालन करना।
  • संसदीय कार्यवाही के संचालन में नियमों प्रथाओं-परिपाटियों द्वारा सहायता करना।
  • अपने अधिकार क्षेत्र के प्रशासनिक न्यायिक व विनियमन संबंधी मामलों में विभिन्न कार्यों का का निष्पादन करना।
  • लोकसभा का परंपरागत मुखिया होने के नाते समस्त सदन की सामूहिक राय को अभिव्यक्त करना।
  • लोकसभा के कार्यों से जुड़े प्रावधानी पर उसका फैसला और उसकी व्याख्या अंतिम व बाध्यकारी होती है।
  • उसके निर्णय पर न तो सवाल, न ही कोई चुनौती खड़ी की जा सकती। आलोचना भी नहीं की जा सकती।
  • लोकसभा का पीठासीन अधिकारी होने के नाते प्रत्येक परिस्थिति में संसदीय शिष्टाचार का निर्वहन कराना उसका जिम्मा है।
  • वह लोक सभा सचिवालय का प्रमुख है और यह सचिवालय उसके नियंत्रण और निदेशों के अधीन कार्य करता है।
  • लोकसभा की कार्यवाही का विनियमन।
  • पीठासीन अध्य्क्ष ही तय करता है कि कोई प्रश्न स्वीकार्य है या नहीं।
  • वही तय करता है राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के लिए संशोधन किस रूप में पेश किए जाएं।
  • किसी विधेयक पर कोई भी संशोधन पेश करने के लिए उसकी अनुमति आवश्यक है।
  • सभा में चर्चाओं के बारे में वही फैसला करता है कि कोई सदस्य कब और कितनी देर तक बोलेगा।
  • वह यह तय भी करता है कि किसी सदस्य की गई कोई टिप्पणी सभा की कार्यवाही में शामिल की जाए या नहीं।
  • वह किसी सदस्य को किसी निर्धारित अवधि के लिए सभा से चले जाने का निर्देश भी दे सकता है।
  • वही सभा, सभा की समितियों और सदस्यों के अधिकारों तथा विशेषाधिकारों का संरक्षण करता है।
  • वह धन विधेयकों का प्रमाणन करता है और अंतिम निर्णय लेता है कि कौन से मामले देर तक बोलेगा
  • लोकसभा और राज्यसभा में असहमति होने की स्थिति में संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ही करता है।
  • संसदीय दलों को मान्यता प्रदान करने के लिए आवश्यक दिशानिर्देश निर्धारित करता है।
  • लोकसभा में विपक्ष के मान्यता प्रदान करने के बारे में निर्णय लेता है।
  • उसके पास-बदल के आधार पर किसी लोकसभा सदस्य को अयोग्य ठहराने की शक्ति है।
  • अध्यक्ष सभा में मतदान के दौरान केवल तभी मतदान करता है जब पक्ष व विपक्ष के मत बराबर हो जाएँ।
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5 Comments:

  1. thnx guru ji

  2. SarEnder kshAtriya

    Dhanyavad

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