भारत में कृषि, औद्योगिक एवं उत्पादन सम्बंधित प्रमुख क्रांतियों की सूची

कृषि, औद्योगिक एवं उत्पादन सम्बंधित क्रांतियाँ: (Production related revolutions in India in Hindi)

क्रांति का अर्थ या परिभाषा:

समान्यत: क्रांति का अर्थ होता है, ‘व्यवस्था परिवर्तन’। जब लंबे समय से चली आ रही परिस्थियों में अचानक किसी नीति या निर्णय के कारण सकारात्मक परिवर्तन के साथ-साथ गुणात्मक बदलाव हो तो ऐसी स्थिति को क्रांति कहा जाता है। यह बदलाव राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक या सांस्कृतिक भी हो सकते है।

यहाँ पर भारतीय इतिहास में कृषि, औद्योगिक एवं उत्पादन सम्बंधित प्रमुख क्रांतियों के बारे में महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान जानकारी दी गयी है।

कृषि, औद्योगिक एवं उत्पादन सम्बंधित क्रांतियों की सूची:

क्रांति का नाम क्रांति का उद्देश्य
हरित क्रांति (Green Revolution): कृषि क्षेत्र में उत्पादन तकनीक के सुधार एवं कृषि उत्पादकता में वृद्धि करना
हरित क्रांति की शुरुआत वर्ष 1967 से 1968 के मध्य एम. एस. स्वामीनाथन के द्वारा की गई थी, एम. एस. स्वामीनाथन को ही हरित क्रांति का जनक कहा जाता है। इस क्रांति का उद्देश्य भारत में कृषि क्षेत्र में उत्पादन तकनीक के सुधार एवं कृषि उत्पादकता में वृद्धि करना था। इस क्रांति की सफलता के कारण भारत में खाद्य फसलों के उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई, विशेषकर गेहूं के उत्पादन में। वर्ष 1968 में गेहूँ का उत्पादन लगभग 170 लाख टन हो गया जो कि उस समय का रिकॉर्ड था।
पीली क्रांति (Yellow Revolution): खाद्य तेलों और तिलहन फसलों के उत्पादन में वृद्धि करना
पीली क्रांति की शुरुआत वर्ष 1986 से 1987 के मध्य सैम पिटरोडा के द्वारा की गई थी, सैम पिटरोडा को ही पीली का जनक कहा जाता है। पीली क्रांति का उद्देश्य खाद्य तेलों और तिलहन फसलों के उत्पादन में वृद्धि करना था, विशेषकर सारसो, तिल और सीसम के तेल में वृद्धि करना।
श्वेत क्रांति या दुग्ध क्रांति (White Revolution): दूध के उत्पादन में वृद्धि करना।
श्वेत क्रांति या दुग्ध क्रांति की शुरुआत 13 जनवरी 1970 में गुजरात के आनंद में वर्गीज कुरियन के द्वारा की गई थी। वर्गीज कुरियन को ही इस क्रांति का जनक कहा जाता है। इस क्रांति का उद्देश्य दूध के उत्पादन में वृद्धि कर भारत को विश्व मे दुध का सबसे बढ़ा उत्पादक बनाना था।
नीली क्रांति (Blue Revolution): मछली उत्पादन में वृद्धि करना।
नीली क्रांति की शुरुआत वर्ष 1985 से वर्ष 1990 के बीच हीरालाल चौधरी और अरुण कृष्णन के द्वारा की गई थी। हीरालाल चौधरी और अरुण कृष्णन को ही नीली क्रांति का जनक कहा जाता है। इस क्रांति का उद्देश्य मछली उत्पादन में वृद्धि कर किसानों की आय को दोगुना करना था।
गुलाबी क्रांति (Pink Revolution): झींगा मछली के उत्पादन में वृद्धि करना।
गुलाबी क्रांति की शुरुआत वर्ष 1996 में दुर्गेश पटेल के द्वारा की गई थी। दुर्गेश पटेल को ही गुलाबी क्रांति का जनक कहा जाता है। इस क्रांति का उद्देश्य झींगा मछली और प्याज के उत्पादन में वृद्धि करना था।
रजत क्रांति (Silver Revolution) अंडे के उत्पादन में वृद्धि करना।
रजत क्रांति या सिल्वर क्रांति की शुरुआत वर्ष 1969 से 1978 के मध्य इन्दिरा गांधी के द्वारा की गई थी। रजत क्रांति या सिल्वर क्रांति का उद्देश्य अंडे के उत्पादन में वृद्धि करना था।
भूरी क्रांति (Gray Revolution): उर्वरक और गैर-परंपरागत ईंधन के उत्पादन में वृद्धि करना।
भूरी क्रांति की शुरुआत 1960 से 1970 के दशक के मध्य में की गई थी। भूरी क्रांति का उद्देश्य उर्वरक और गैर-परंपरागत ईंधन के उत्पादन में वृद्धि करना था।
सुनहरी क्रांति (Golden Revolution): बागवानी व शहद उत्पादन के उत्पादन में वृद्धि करना।
सुनहरी क्रांति या गोल्डन क्रांति की शुरुआत वर्ष 1991 से 2003 के मध्य में निर्पख तुतेज के द्वारा की गई थी। निर्पख तुतेज को ही गोल्डन क्रांति का जनक व पिता कहा जाता है। सुनहरी क्रांति या गोल्डन क्रांति का उद्देश्य फलों, शहद उत्पादन और अन्य बागवानी उत्पाद के उत्पादन में वृद्धि करना था।
बादामी क्रांति (Badami Revolution): मसाले के उत्पादन में वृद्धि करना।
बादामी क्रांति की शुरुआत गुजरात में की गई थी। बादामी क्रांति का संबंध मसाले के उत्पादन में वृद्धि करने से था।
लाल क्रांति (Red Revolution): मांस  और टमाटर के उत्पादन में वृद्धि करना।
भारत में लाल क्रांति की शुरुआत 1980 के दशक के मध्य में विशाल तिवारी द्वारा की गई थी। विशाल तिवारी को ही लाल क्रांति का पिता व जनक कहा जाता है। इस क्रांति का उद्देश्य भारत में मांस  और टमाटर के उत्पादन में वृद्धि करना था।
इन्द्रधनुष क्रांति (Rainbow Revolution): सभी क्षेत्रों के उत्पादन में वृद्धि करना।
रेनबो क्रांति या इंद्रधनुष क्रांति का नेतृत्व डॉ. आरएस परोदा और डॉ. एन.एन. सिंह द्वारा किया जा रहा है। इस क्रांति को रेनबो या इंद्र्धनुष नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि जिस तरह इंद्रधनुष के कई रंग होते हैं उसी प्रकार फसल व अन्य क्षेत्रों में उत्पादन में भी विभिन्नता लाना अनिवार्य है। इस क्रांति का उद्देश्य भारत में सभी उत्पादन के क्षेत्रों में वृद्धि व निगरानी कर वर्ष 2022 तक किसान की आमदानी को दोगुना करना है।
अमृत क्रांति (Amrit Revolution): अमृत क्रांति का सम्बन्ध नदी जोड़ो परियोजना से है।
अमृत क्रांति का संबंध नदी जोड़ो परियोजना से है। इस परियोजना से कृष्णा और गोदावरी नदियों के मिलन के साथ ही आंध्रप्रदेश का दशकों पुराना सपना साकार हो पाया अब नदियों के आपस में जुड़ने आंध्रप्रदेश की सरकार को तकरीबन साढ़े तीन लाख एकड़ के भूक्षेत्र को फायदा होगा।
कृष्ण क्रांति (Black Revolution): पेट्रोलियम उत्पादन में वृद्धि करना।
कृष्ण क्रांति का संबंध भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने का है। इसका उद्देश्य देश को पेट्रोल और डीजल में आत्मनिर्भर बनाने हैं।
गोल क्रांति (Round Revolution): गोल क्रांति आलू के उत्पादन में वृद्धि करना।
गोल क्रांति या राउंड क्रांति की शुरुआत भारत में वर्ष 1965 से 2005 के मध्य की गई थी। इस क्रांति का उद्देश्य भारत में आलू के उत्पादन को बढ़ावा देना है, जिसके लिए शिमला में केन्द्रीय आलू अनुसन्धान संस्थान की स्थापना की गई है।
सदाबहार क्रांति (Evergreen Revolution): कृषि का समग्र विकास करना।
सदाबहार क्रांति की शुरुआत वर्ष 2017 में एम. एस. स्वामीनाथन के द्वारा की गई है। इस क्रांति का संबंध वर्ष 2022 तक भारत में कृषि का समग्र विकास करना है।
सिल्वर फाइबर क्रांति (Silver Fiber Revolution): कपास उत्पादन में वृद्धि करना।
सिल्वर फाइबर क्रांति का संबंध भारत में कपास उत्पादन में वृद्धि कर, भारत को विश्व का सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश बनाना है। सिल्वर फाइबर क्रांति ही ऐसी क्रांति है जो कपास उत्पादन को बढ़ावा देती है।
गोल्डन फाइबर क्रांति (Golden Fiber Revolution): जूट उत्पादन में वृद्धि करना।
गोल्डन फाइबर क्रांति का संबंध भारत में जूट उत्पादन में वृद्धि करना है, इस क्रांति के परिणामस्वरूप भारत विश्व का सबसे बड़ा जुट उत्पादक देश बन गया है, जहाँ विश्व के लगभग 60 प्रतिशत से अधिक जुट का उत्पादन किया जाता है । भारत में जुट उद्योग का पहला कारख़ाना वर्ष 1854 में कोलकाता में स्थापित किया गया था।
ब्राउन क्रांति (Brown Revolution): चमड़ा /गैर पारंपरिक (भारत)/ कोको उत्पादन में वृद्धि करना।
ब्राउन क्रांति का संबंध भारत में चमड़ा, गैर पारंपरिक तथा कोको के उत्पादन में वृद्धि करना है। ब्राउन क्रांति का जनक व पिता हीरालाल चौधरी को कहा जाता है। इस क्रांति के परिणामस्वरूप ही भारत विश्व का सबसे बड़ा चमड़ा उत्पादक देश बन पाया है।
सूर्योदय क्रांति (Sunrise Revolution): इलेक्ट्रॉनिक उद्योग का विकास करना
सूर्योदय क्रांति का उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रॉनिक उद्योग का विकास करना।
गंगा क्रांति (Ganga Revolution): भ्रष्टाचार के खिलाफ सदाचार पैदा करना
गंगा क्रांति का संबंध भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ सदाचार पैदा करना है।
केसर क्रांति (Saffron Revolution): केसर उत्पादन में वृद्धि करना।
केसर क्रांति की शुरुआत भारत में 27 सितंबर 2007 को हुई है। केसर क्रांति का संबंध भारत के जम्मू कश्मीर में केसर उत्पादन में वृद्धि करना है।
मूक क्रांति (Silent Revolution): मोटे अनाजों के उत्पादन में वृद्धि करना।
मूक क्रांति जिसे साइलेंट क्रांति के नाम से भी जाना की शुरुआत भारत में मोटे अनाजों के उत्पादन में वृद्धि करने के लिए की गई है।
परामनी क्रांति (Paramani Revolution): भिन्डी उत्पादन में वृद्धि करना।
परामनी क्रांति का संबंध भारत में भिन्डी के उत्पादन में वृद्धि करना है।
खाद्य श्रंखला क्रांति (Food Chain Revolution): भारतीय कृषकों की 2020 तक आमदनी को दोगुना करना
खाद्य श्रंखला क्रांति का उद्देश्य भारत में भारतीय कृषकों की 2020 तक आमदनी को दोगुना कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
N.H. क्रांति (N.H. Revolution): स्वर्णिम चतुर्भुज योजना
N.H. क्रांति या राष्ट्रीय राजमार्ग क्रांति का उद्देश्य भारत में स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के तहत चार बड़े महानगरों दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई को एक राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ना है, जिसकी कुल लंबाई 5,846 किलोमीटर होगी। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना की शुरुआत भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा वर्ष 2001 में शुरू की गयी थी।

This post was last modified on May 11, 2020 2:16 pm

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  • क्रान्तियों के विवरण और अन्य क्रान्तियों को अपडेट करें तो अधिक बेहतर होगा।

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