बसंत पंचमी 2021 – त्यौहार का अर्थ, इतिहास एवं महत्व

✅ Published on March 7th, 2021 in भारतीय त्यौहार, महत्वपूर्ण दिवस

बसंत पंचमी (Basant Panchami Festival Information in Hindi)

बसंत पंचमी कब मनाई जाती है?

बसंत पंचमी या श्रीपंचमी हिन्दुओं का एक प्रसिद्ध त्योहार है। हिंदी पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्यौहार हर साल माघ महीने की पंचमी तिथि को मनाया जाता हैं, क्योकि इस दिन से बसंत ऋतू का आगमन होता हैं। अंग्रेजी पंचांग के अनुसार यह त्योहार जनवरी-फरवरी माह में मनाया जाता हैं। इस वर्ष 2018 मे बसंत पंचमी 22 जनवरी, दिन सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा आराधना की जाती है। बसंत पंचमी का त्यौहार पूर्वी भारत के साथ-2 पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई देशो में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण करती हैं। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।

बसंत ऋतु:

पूरे वर्ष को जिन छः मौसमों में बाँटा गया है, उनमें बसंत लोगों का सबसे पसंदीदा मौसम होता है। बसंत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। इस समय पंचतत्त्व अपना प्रकोप छोड़कर सुहावने रूप में प्रकट होते हैं। पंच-तत्त्व- जल, वायु, धरती, आकाश और अग्नि सभी अपना मोहक रूप दिखाते हैं। बसंत के सुहावने मौसम में फूलों पर बहार आ जाती है, पेड़ों के पुराने पत्ते झड़ जाते हैं और उनमें नयी कोपलें आने लगती हैं, खेतों में सरसों का सोना चमकने लगता है, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिल जाती है, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता है और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं है।

बसंत पंचमी की कथा:

संसार के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्माजी ने मनुष्य योनि की रचना की, परंतु वह अपनी सर्जना से संतुष्ट नहीं थे, तब उन्होंने विष्णु जी से आज्ञा लेकर अपने कमंडल से जल को पृथ्वी पर छि़ड़क दिया, जिससे पृथ्वी पर कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई। जिनके एक हाथ में वीणा एवं दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। वहीं अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। जब इस देवी ने वीणा का मधुर नाद किया तो संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई, तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा।
माता सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से जाना जाता है और उनकी पूजा अर्चना की जाती है। माँ सरस्वती को संगीत की उत्पत्ति करने के कारण संगीत की देवी भी कहा जाता हैं। वसंत पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पचंमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी। इस कारण हिंदू धर्म में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है।

बसंत पंचमी का महत्व:

बसंत ऋतु में दिनों में मौसम के प्राकृतिक बदलाव होते हैं जो बहुत मन मोहक एवम सुहावने होते हैं। वैसे तो माघ का पूरा महिना ही उत्साह देने वाला होता है, पर बसंत पंचमी का पर्व हमारे लिए कुछ खास महत्व रखता है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है, इसलिए इस दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे ज्ञानवान, विद्यावान होने की कामना की जाती है। वहीं कलाकारों में इस दिन का विशेष महत्व है। कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार, नृत्यकार अपने उपकरणों की पूजा के साथ मां सरस्वती की वंदना करते हैं।
बसंत पंचमी पूजन की विधि:

बसंत पंचमी आज बुधवार होने की वजह से अधिक फलदायी है। इसमें प्रातः उठकर बेसनयुक्त तेल का शरीर पर उबटन करके स्नान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ पीले वस्त्र धारणकर माँ शारदे की पूजा करना चाहिए। साथ ही केशरयुक्त मीठे चावल अवश्य घर में बनाकर उनका सेवन करना चाहिए।

बसंत पंचमी ऋतु कविता:

आई रे आई, ऋतुराज हैं आई,
चारों और वसंत बहार हैं छाई,
कोयल की कुंहूँ कुंहूँ फैली हैं बाग़ में,
पतझड़ बीता, बहारें छाई हैं बाग़ में,
भीनी- भीनी सी ठंडक लगती हैं सुहानी,
खेतो में लहराती सरसों और मक्का की बाली,
हर तरफ हैं सुर संगीत का वादन,
माता सरस्वती का संगीतमय अभिवादन,
ऐसी हैं वसंत ऋतू की सौगात,
सजी हैं धरती पर सुहावनी बारात….

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