मकर संक्रान्ति 2021 – त्यौहार का अर्थ, इतिहास एवं महत्व

✅ Published on January 14th, 2019 in भारतीय त्यौहार, महत्वपूर्ण दिवस

मकर संक्रान्ति: (Makar Sankranti Festival Information in Hindi)

मकर संक्रान्ति कब मनाई जाती है?

मकर संक्रान्ति भारत के मुख्य त्यौहारों में से एक है। मकर संक्रान्ति हिन्दुओं द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है। मकर संक्रान्ति का त्यौहार पौष मास (जनवरी के महीने) में मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। इस पर्व की विशेष बात यह है कि यह अन्य त्योहारों की तरह अलग-अलग तारीखों पर नहीं, बल्कि हर साल 14 जनवरी को ही मनाया जाता है। मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। इसलिये इस पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं। तमिलनाडु में इसे पोंगल पर्व के रूप में मनाते हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहा जाता हैं।

संक्रांति का अर्थ:

‘संक्रान्ति’ का अर्थ है: सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाना, अत: वह राशि जिसमें सूर्य प्रवेश करता है, संक्रान्ति की संज्ञा से विख्यात है।

मकर संक्रांति के त्यौहार का इतिहास एवं महत्व:

मकर संक्रांति के त्यौहार को लोहड़ी के त्यौहार के एक दिन बाद मनाया जाता है। यह वैदिक उत्सव है। इस दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। गुड़–तिल, रेवड़ी, गजक का प्रसाद बाँटा जाता है। इस त्यौहार का सम्बन्ध प्रकृति, ऋतु परिवर्तन और कृषि से है। ये तीनों चीज़ें ही जीवन का आधार हैं। प्रकृति के कारक के तौर पर इस पर्व में सूर्य देव को पूजा जाता है, जिन्हें शास्त्रों में भौतिक एवं अभौतिक तत्वों की आत्मा कहा गया है। इन्हीं की स्थिति के अनुसार ऋतु परिवर्तन होता है और धरती अनाज उत्पन्न करती है, जिससे जीव समुदाय का भरण-पोषण होता है। इस त्यौहार को मनाने का सबसे बड़ा कारण यह होता है कि इसी समय नई-नई फसल काटी जाती है और किसान लोगों का घर अन्न से भर जाता है। लोग इसी खुशी में अन्न की पूजा करते हैं और अच्छा-अच्छा खाना बनाकर खाते हैं। मकर संक्रांति गर्मी शुरुआत होने का संकेत है। भारत के कुछ प्रदेशों में यह एक से ज्यादा दिनों तक चलता है, लेकिन ज्यादातर जगहों में यह त्यौहार सिर्फ एक दिन का होता है। यह एक अति महत्त्वपूर्ण धार्मिक कृत्य एवं उत्सव है।

भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति:

मकर संक्रांति पूरे भारत में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। भारत के सभी राज्यों में कई परंपरा और संस्कृतियों के कारण मकर संक्रांति के उत्सव की एक अलग झलक देखने को मिलती है। साथ ही अलग प्रक्रिया और पौराणिक कथाओं के अनुसार ही इस त्यौहार को हर क्षेत्र में अलग-अलग प्रकार से मनाया जाता है।

  • बिहार में इस दिन ज्यादातर लोग नए अनाज से खिचड़ी बनाते हैं। लोग सुबह-सुबह दही चूड़ा और तिल से बने हुए मिठाइयां जैसे तिलकुट, तिल और गुड़ से बना लड्डू खाते हैं।
  • गुजरात में मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा है।
  • पंजाब में मकर संक्रांति के दिन लोग नदी में सुबह-सुबह पवित्र स्नान करते हैं। उसके बाद वह सब अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ मिलकर भांगड़ा करते हैं। भांगड़ा करने के बाद वह सब स्वादिष्ट पकवान खाते हैं, जिसमें खीर भी होता है। पंजाब में इस त्योहार को लोहड़ी के नाम से भी जाना जाता है।
  • तमिलनाडु में मकर संक्रांति पोंगल के नाम से जाना जाता है और यह चार दिनों का त्योहार होता है। प्रथम दिन भोगी-पोंगल, द्वितीय दिन सूर्य-पोंगल, तृतीय दिन मट्टू-पोंगल अथवा केनू-पोंगल और चौथे व अन्तिम दिन कन्या-पोंगल। इस प्रकार पहले दिन कूड़ा करकट इकठ्ठा कर जलाया जाता है, दूसरे दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और तीसरे दिन पशु धन की पूजा की जाती है। पोंगल मनाने के लिये स्नान करके खुले आँगन में मिट्टी के बर्तन में खीर बनायी जाती है, जिसे पोंगल कहते हैं।
  • उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति के दिन इलाहाबाद और वाराणसी की पवित्र नदियों में लोग स्नान करते हैं, स्नान करने के बाद लोग मिठाइयां और पकवान साथ में गुड़ भी खाते हैं और पतंग उड़ाते हैं।
  • पश्चिम बंगाल में मकर संक्रांति के दिन पीठा बनाया जाता है जो एक स्वादिष्ट मिठाई की तरह है। मकर संक्रांति में कई जगह मेले भी लगाए जाते हैं जहां गांव के लोग घूमने जाते हैं।
  • असम में मकर संक्रान्ति को माघ-बिहू अथवा भोगाली-बिहू के नाम से मनाते हैं।
  • आंध्रप्रदेश में मकर संक्रान्ति को संक्रांति के नाम से तीन दिन का पर्व मनाते हैं।
  • राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएँ अपनी सास को वायना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। साथ ही महिलाएँ किसी भी सौभाग्यसूचक वस्तु का चौदह की संख्या में पूजन एवं संकल्प कर चौदह ब्राह्मणों को दान देती हैं।
  • महाराष्ट्र में मकर संक्रांति के दिन लोग अलग-अलग रंगों के दानों वाला लड्डू खाते हैं और मेहमानों को भी खिलाते हैं। इस प्रकार मकर संक्रान्ति के माध्यम से भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की झलक विविध रूपों में दिखती है।
नेपाल में मकर-संक्रान्ति:

सम्पूर्ण नेपाल में भी अलग-अलग नाम व भाँति-भाँति के रीति-रिवाजों द्वारा भक्ति एवं उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया जाता है। नेपाल में मकर संक्रान्ति को माघे-संक्रान्ति, सूर्योत्तरायण और थारू समुदाय में माघी कहा जाता है। इस दिन नेपाल सरकार सार्वजनिक छुट्टी देती है। थारू समुदाय का यह सबसे प्रमुख त्यैाहार है। नेपाल के बाकी समुदाय भी तीर्थस्थल में स्नान करके दान-धर्मादि करते हैं और तिल, घी, शर्करा और कन्दमूल खाकर धूमधाम से मनाते हैं। वे नदियों के संगम पर लाखों की संख्या में नहाने के लिये जाते हैं। तीर्थस्थलों में रूरूधाम (देवघाट) व त्रिवेणी मेला सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। मकर संक्रान्ति के दिन किसान अपनी अच्छी फसल के लिये भगवान को धन्यवाद देकर अपनी अनुकम्पा को सदैव लोगों पर बनाये रखने का आशीर्वाद माँगते हैं। इसलिए मकर संक्रान्ति के त्यौहार को फसलों एवं किसानों के त्यौहार के नाम से भी जाना जाता है।

मकर संक्रांति से जुडी मुख्य बातें:

  • मकर संक्रांति का त्यौहार बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ भारत के अलग-2 राज्यों में विभिन्न परम्परा के अनुसार मनाया जाता है।
  • लोग इस दिन नए कपडे पहनते हैं और मिठाइयाँ भी बांटते हैं।
  • सभी लोग इस दिन पवित्र स्नान करते हैं।
  • देश के अलग-अलग स्थानों में गंगा नदी के किनारे माघ मेला या गंगा स्नान का आयोजन किया जाता है
  • विश्व प्रसिद्ध कुंभ के पहले स्नान की शुरुआत भी इसी दिन से होती है।
  • मकर संक्रांति के दिन लोग तिल की मिठाइयाँ बनाते हैं, बांटते हैं और खाते हैं।
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