भारतीय राज्यों के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश- Current Chief Justice of Indian States

भारतीय राज्यों के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश

उच्चतम न्यायालय की जानकारी:

राज्य स्तर पर सबसे कड़ी न्यायिक शक्ति देश में हाई कोर्ट यानी उच्च न्यायालय के पास होती है। देश में कुल 25 हाई कोर्ट हैं, जिनमें से सात में कई न्यायालय हैं। इनका क्षेत्राधिकार राज्य, केंद्र शासित प्रदेश या राज्यों के समूह पर होता है। सबसे पुराना हाई कोर्ट वर्ष 1862 में कलकत्ता में स्थापित हुआ था। हाई कोर्ट के तहत सिविल और आपराधिक निचली अदालतें और ट्रिब्यूनल कार्य करते हैं। परंतु सभी हाई कोर्ट भारत की सुप्रीम कोर्ट के तहत आते हैं।

भारतीय राज्यों के वर्तमान मुख्य न्यायधीशों की सूची:

न्यायालय का नाम मुख्य न्यायाधीश (सीजे / एसीजे के रूप में नियुक्ति की तिथि)-(सेवानिवृत्ति की तिथि)
इलाहाबाद उच्च न्यायालय गोविंद माथुर (14-नवंबर-2018)-(13-अप्रैल-2021)
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय जे. के. माहेश्वरी (07-अक्टूबर-2019)-(28-जून-2023)
बॉम्बे हाई कोर्ट प्रदीप नंदराजोग (07-अप्रैल-2019)-(23-फरवरी-2020)
कलकत्ता उच्च न्यायालय टी. बी. राधाकृष्णन (04-अप्रैल-2019)-(28-अप्रैल-2021)
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय पी. आर. रामचंद्र मेनन (06-मई-2019)-(31-मई-2021)
दिल्ली उच्च न्यायालय धीरूभाई नारनभाई पटेल (07-जून-2019)-(12-मार्च-2022)
गौहाटी उच्च न्यायालय अजय लांबा (07-अक्टूबर-2019)-(20-सितंबर-2020)
गुजरात उच्च न्यायालय विक्रम नाथ (10-सितंबर-2019)-(23-सितंबर-2024)
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय लिंगप्पा नारायण स्वामी (06-अक्टूबर-2019)-(30-जून-2021)
जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय गीता मित्तल (11-अगस्त-2018)-(08-दिसंबर-2020)
झारखंड उच्च न्यायालय रवि रंजन (17-नवंबर-2019)-(19-दिसंबर -2022)
कर्नाटक उच्च न्यायालय अभय श्रीनिवास ओका (10-मई-2019)-(24-मई-2022)
केरल उच्च न्यायालय एस. मणिकुमार (11-अक्टूबर-2019)-(23-अप्रैल-2023)
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय अजय कुमार मित्तल (03-नवंबर-2019)-(29-सितंबर-2020)
मद्रास उच्च न्यायालय अमरेश्वर प्रताप साही (11-नवंबर-2019)-(31-दिसंबर-2020)
मणिपुर उच्च न्यायालय रामलिंगम सुधाकर (18-मई-2018)-(13-फरवरी-2021)
मेघालय उच्च न्यायालय मोहम्मद रफीक (13-नवंबर-2019)-(24-मई-2022)
उड़ीसा उच्च न्यायालय कल्पेश सत्येंद्र झावेरी (12-अगस्त-2018)-(04-जन-2020)
पटना उच्च न्यायालय संजय करोल (11-नवंबर-2019)-(22-अगस्त -23)
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय रविशंकर झां (06-अक्टूबर-2019)-(13-अक्टूबर-2023)
राजस्थान उच्च न्यायालय इंद्रजीत महंती (06-अक्टूबर-2019)-(10-नवंबर -22)
सिक्किम उच्च न्यायालय अरुप कुमार गोस्वामी (15-अक्टूबर-2019)-(10-मार्च-2023)
तेलंगाना उच्च न्यायालय राघवेंद्र सिंह चौहान (22-जून-2019)-(23-दिसंबर-2021)
त्रिपुरा उच्च न्यायालय अकिल अब्दुलहमीद कुरैशी (16-नवंबर-2019)-(06-मार्च-2022)
उत्तराखंड उच्च न्यायालय रमेश रंगनाथन (02-नवंबर-2018)-(27-जुलाई-2020)

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति:

उच्चतम न्यायालय के सभी न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय के परामर्शानुसार की जाती है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश इस प्रसंग में राष्ट्रपति को परामर्श देने से पूर्व अनिवार्य रूप से चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों के समूह से परामर्श प्राप्त करते हैं तथा इस समूह से प्राप्त परामर्श के आधार पर राष्ट्रपति को परामर्श देते हैं। अनुछेद 124 के अनुसार मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करते समय राष्ट्रपति अपनी इच्छानुसार सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सलाह लेगा। वहीं अन्य जजों की नियुक्ति के समय उसे अनिवार्य रूप से मुख्य न्यायाधीश की सलाह माननी पड़ेगी।
संविधान के अनुच्छेद 214 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय का प्रावधान है। अनुच्छेद 231 के तहत संसद को यह अधिकार प्राप्त है कि वह दो या अधिक राज्यों के लिए उच्च न्यायालय की स्थापना कर सकता है। उच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय अनुच्छेद 215 के अनुसार घोषित किया गया है।

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की योग्यताएँ:

  • व्यक्ति भारत का नागरिक हो।
  • कम से कम पांच साल के लिए उच्च न्यायालय का न्यायाधीश या दो या दो से अधिक न्यायालयों में लगातार कम से कम पांच वर्षों तक न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुका हो।
  • किसी उच्च न्यायालय या न्यायालयों में लगातार दस वर्ष तक अधिवक्ता रह चुका हो।
  • वह व्यक्ति राष्ट्रपति की राय में एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता होना चाहिए।
  • उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बनने हेतु किसी भी प्रदेश के उच्च न्यायालय में न्यायाधीश का पांच वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य है और वह 62 वर्ष की आयु पूरी न किया हो।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों का कार्यकाल:

भारतीय सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष होती है। न्यायाधीशों को केवल (महाभियोग) दुर्व्यवहार या असमर्थता के सिद्ध होने पर संसद के दोनों सदनों द्वारा दो-तिहाई बहुमत से पारित प्रस्ताव के आधार पर ही राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।

यह भी पढ़ें: भारतीय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की सूची

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