उत्तराखण्ड सामान्य ज्ञान

उत्तराखंड सामान्य ज्ञान (Uttarakhand General Knowledge):

उत्तराखण्ड उत्तर दिशा में स्थित भारत का 27वां राज्य है। उत्तराखण्ड का प्राचीन नाम उत्तरांचल है। सन 2000 से 2006 तक यह उत्तरांचल के नाम से ही जाना जाता था। जनवरी 2007 में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया। हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है। उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून है। राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है। उत्तराखण्ड, चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता है।

उत्तराखंड का इतिहास (Uttarakhand History):

उत्तराखंड का उल्लेख प्राचीन धर्मग्रंथों में केदारखंड, मानसखंड और हिमवंत के रूप में मिलता है। लोककथा के अनुसार पांडव यहाँ पर आए थे और विश्व के सबसे बड़े महाकाव्यों महाभारत व रामायण की रचना यहीं पर हुई थी। इस क्षेत्र विशेष के बारे में बहुत कुछ कहा जाता है, लेकिन प्राचीन काल में यहाँ मानव निवास के प्रमाण मिलने के बावजूद इस इलाक़े के इतिहास के बारे में बहुत कम जानकारी मिलती है।वर्तमान उत्तराखंड राज्य ‘आगरा और अवध संयुक्त प्रांत’ का हिस्सा था। यह प्रांत 1902 में बनाया गया। सन् 1935 में इसे ‘संयुक्त प्रांत’ कहा जाता था। जनवरी 1950 में ‘संयुक्त प्रांत’ का नाम ‘उत्तर प्रदेश’ हो गया। भारत का 27वां राज्य बनने से पहले 09 नंवबर, 2000 तक उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का हिस्सा था।

उत्तराखंड का भूगोल (Uttarakhand Geography):

उत्तराखण्ड राज्य का क्षेत्रफल 53,484 वर्ग किमी है। उत्तराखण्ड भारत के उत्तर – मध्य भाग में स्थित है। यह पूर्वोत्तर में तिब्बत, पश्चिमोत्तर में हिमाचल प्रदेश, दक्षिण-पश्चिम में उत्तर प्रदेश और दक्षिण-पूर्व में नेपाल से घिरा है।  राज्य का अधिकांश उत्तरी भाग वृहद्तर हिमालय शृंखला का भाग है, जो ऊँची हिमालयी चोटियों और हिमनदियों से ढ़का हुआ है, जबकि निम्न तलहटियाँ सघन वनों से ढ़की हुई हैं जिनका पहले अंग्रेज़ लकड़ी व्यापारियों और स्वतन्त्रता के बाद वन अनुबन्धकों द्वारा दोहन किया गया। हिमालय के विशिष्ठ पारिस्थितिक तन्त्र बड़ी संख्या में पशुओं – जैसे भड़ल, हिम तेंदुआ, तेंदुआ, और बाघ, पौंधो, और दुर्लभ जड़ी-बूटियों का घर है। राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं। इनके अलावा राज्य में काली, रामगंगा, कोसी, गोमती, टोंस, धौली गंगा, गौरीगंगा, पिंडर नयार (पूर्व) पिंडर नयार (पश्चिम) आदि प्रमुख नदियाँ हैं। भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखण्ड में ही स्थित है। उत्तराखंड का राजकीय पेड ‘अशोक’ है। उत्तराखंड का राजकीय फूल ‘ब्रह्म कमल’ है। उत्तराखंड का राजकीय पशु ‘कस्तूरी मृग’ है। उत्तराखंड का राजकीय पक्षी ‘सारस’ है।

उत्तराखंड की जलवायु (Uttarakhand Climate):

उत्तराखण्ड की जलवायु शीतोष्ण है। राज्य में मौसम के अनुसार तापमान परिवर्तन होता रहता है। उत्तराखण्ड का मौसम दो भागों में विभाजित किया जा सकता है: पर्वतीय और कम पर्वतीय या समतलीय। राज्य में सबसे ठण्डा महीना जनवरी का होता है, जब तापमान उत्तर में शून्य से नीचे की ओर दक्षिण-पूर्व में लगभग 5° से. हो जाता है। जुलाई दक्षिणी-पश्चिमी मॉनसून का महीना है। साल 2008 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में वार्षिक औसत वर्षा 1606 मि.मी. हुई थी। विभिन्न प्रकार की हरी भरी घाटियाँ, वनस्पति और जीव-जंतु उत्तराखंड की मुख्य विशेषता है।

उत्तराखंड की राजनीति (Uttarakhand Politics):

सन 2000 में उत्तर प्रदेश पर्वतीय जिलों को अलग कर के उत्तराखण्ड राज्य बनाया गया था। इस राज्य में अब तक 8 मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जिनमे से चार भारतीय जनता पार्टी से व शेष तीन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से हैं। उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री बनने वाले प्रथम व्यक्ति नित्यानंद स्वामी थे। उन्होंने 09 नवम्बर 2000 में राज्य के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।

उत्तराखंड की सरकार (Uttarakhand Government):

उत्तराखण्ड की वर्तमान एकविधाई विधानसभा में 70 सदस्य हैं जिन्हें विधायक कहा जाता है। वर्तमान विधानसभा में 57 विधायक के साथ भारतीय जनता पार्टी का सबसे बड़ा दल है। सरकार का कार्यकाल पाँच वर्षों का होता है या फिर सरकार को पाँव वर्षों से पहले भी भंग किया जा सकता है।

वर्तमान समय में उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। उत्तराखंड के वर्तमान मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत है। उन्होंने 17 मार्च 2017 को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।

उत्तराखंड के वर्तमान राज्यपाल कृष्णकांत पॉल है। उन्होंने जनवरी 2015 को उत्तराखंड के छठे राज्यपाल के रूप में शपथ ली है।

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था (Uttarakhand Economy):

कृषि:

राज्य की अर्थ-व्यवस्था मुख्यतः कृषि और संबंधित उद्योगों पर आधारित है। उत्तराखण्ड की लगभग 90% जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। राज्य में कुल खेती योग्य क्षेत्र 7,84,117 हेक्टेयर (7,841 किमी²) है। इसके अलावा राज्य में बहती नदियों के बाहुल्य के कारण पनविद्युत परियोजनाओं का भी अच्छा योगदान है। राज्य में बहुत सी पनविद्युत परियोजनाएं हैं जिनक राज्य के लगभग कुल 5, 9 1,418 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई में भी योगदान है। उत्तराखण्ड में चूना पत्थर, राक फास्फेट, डोलोमाइट, मैग्नेसाइट, तांबा, ग्रेफाइट, जिप्सम आदि के भण्डार हैं। राज्य में कुल 54,047 हस्तशिल्प उद्योग क्रियाशील है।

उत्तराखंड की जनसंख्या (Uttarakhand Population):

2001 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड की जनसंख्या 8,479,562 है। जिसमें 43,25, 9 24 पुरुष और 9 1,63,825 महिलाएं थीं में सबसे अधिक जनसंख्या राजधानी देहरादून की 5,30,263 है।

उत्तराखंड की भाषा (Uttarakhand Languages):

हिन्दी एवं संस्कृत उत्तराखंड की राजभाषाऐं हैं। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड में बोलचाल की प्रमुख भाषाऐं ब्रजभाषा, गढ़वाली, कुमाँऊनी हैं। जौनसारी और भोटिया दो अन्य बोलियाँ, जनजाति समुदायों द्वारा क्रमशः पश्चिम और उत्तर में बोली जाती हैं। लेकिन हिन्दी पूरे प्रदेश में बोली और समझी जाती है और नगरीय जनसंख्या अधिकतर हिन्दी ही बोलती है।

उत्तराखंड की वेशभूषा (Uttarakhand Costumes):

पारम्परिक रूप से उत्तराखण्ड की महिलायें घाघरा तथा आँगड़ी, तथा पुरूष चूड़ीदार पजामा व कुर्ता पहनते थे। अब इनका स्थान पेटीकोट, ब्लाउज व साड़ी ने ले लिया है। जाड़ों (सर्दियों) में ऊनी कपड़ों का उपयोग होता है। विवाह आदि शुभ कार्यो के अवसर पर कई क्षेत्रों में अभी भी सनील का घाघरा पहनने की परम्परा है। गले में गलोबन्द, चर्‌यो, जै माला, नाक में नथ, कानों में कर्णफूल, कुण्डल पहनने की परम्परा है। सिर में शीषफूल, हाथों में सोने या चाँदी के पौंजी तथा पैरों में बिछुए, पायजेब, पौंटा पहने जाते हैं। घर परिवार के समारोहों में ही आभूषण पहनने की परम्परा है। विवाहित औरत की पहचान गले में चरेऊ पहनने से होती है। विवाह इत्यादि शुभ अवसरों पर पिछौड़ा पहनने का भी यहाँ चलन आम है।

उत्तराखंड की संस्कृति (Uttarakhand Culture):

उत्तराखण्ड राज्यलोक कला की दृष्टि से बहुत समृद्ध है। घर की सजावट में ही लोक कला सबसे पहले देखने को मिलती है। दशहरा, दीपावली, नामकरण, जनेऊ आदि शुभ अवसरों पर महिलाएँ घर में ऐंपण (अल्पना) बनाती है। इसके लिए घर, ऑंगन या सीढ़ियों को गेरू से लीपा जाता है। प्राचीन गुफाओं तथा उड्यारों में भी शैल चित्र देखने को मिलते हैं। उत्तराखण्ड की लोक धुनें भी अन्य प्रदेशों से भिन्न है। यहाँ के बाद्य यन्त्रों में नगाड़ा, ढोल, दमुआ, रणसिंग, भेरी, हुड़का, बीन, डौंरा, कुरूली, अलगाजा प्रमुख है। ढोल-दमुआ तथा बीन बाजा विशिष्ट वाद्ययन्त्र हैं जिनका प्रयोग आमतौर पर हर आयोजन में किया जाता है। यहाँ के लोक गीतों में न्योली, जोड़, झोड़ा, छपेली, बैर व फाग प्रमुख होते हैं। उत्तराखण्ड का छोलिया नृत्य काफी प्रसिद्ध है। इस नृत्य में नृतक लबी-लम्बी तलवारें व गेण्डे की खाल से बनी ढाल लिए युद्ध करते है। नृत्यों में सर्प नृत्य, पाण्डव नृत्य, जौनसारी, चाँचरी भी प्रमुख है।

उत्तराखंड का खानपान (Uttarakhand Food):

भारत के प्रत्येक राज्य में खान-पान की अपनी अलग आदतें होती हैं। उत्तराखंड में  भी अपनी खान-पान की खास आदतें हैं। पारम्परिक उत्तराखण्डी खानपान बहुत पौष्टिक और बनाने में सरल होता है। आलू टमाटर का झोल, चैंसू, झोई, कापिलू, पीनालू की सब्जी, बथुए का पराँठा, बाल मिठाई, गौहोत की दाल, मडुए की रोटी, कुमाऊंनी रायता, भांग की चटनी या तिल की चटनी, आलू के गुटके, सिसौंण का साग, डुबुक या डुबुके यहाँ के कुछ विशिष्ट खानपान है।

उत्तराखंड के मुख्य त्योहार (Uttarakhand Famous Festivals):

उत्तराखण्ड में भी अन्य राज्यों के तरह से धर्म जाती के लोग वर्षभर अपने-2 त्योहार हर्षौल्लास के साथ मानते हैं। भारत के प्रमुख उत्सवों जैसे दीपावली, होली, दशहरा इत्यादि के अतिरिक्त यहाँ के कुछ स्थानीय त्योहार हैं जैसे: देवीधुरा मेला (चम्पावत), पूर्णागिरि मेला (चम्पावत), नन्दा देवी मेला (अल्मोड़ा), गौचर मेला (चमोली), वैशाखी (उत्तरकाशी), माघ मेला (उत्तरकाशी), उत्तरायणी मेला (बागेश्वर), विशु मेला (जौनसार बावर), हरेला (कुमाऊँ), गंगा दशहरा, नन्दा देवी राजजात यात्रा जो हर बारहवें वर्ष होती है।

उत्तराखंड के पर्यटन स्थल (Uttarakhand Tourist Places):

उत्तराखण्ड में बहुत से पर्यटन स्थल है, जहाँ पर भारत ही नहीं बल्कि विश्व के अन्य स्थानों से विदेशी पर्यटक भी आते हैं। नैनीताल, मसूरी, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ, अल्मोड़ा, ऋषिकेश, हेमकुण्ड साहिब, नानकमत्ता, फूलों की घाटी, देहरादून, हरिद्वार, औली, चकराता, रानीखेत, बागेश्वर, भीमताल, कौसानी और लैंसडाउन राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।

उत्तराखंड के जिले (Uttarakhand Districts):

उत्तराखण्ड में 13 जिले हैं जो दो मण्डलों में समूहित हैं: 1. कुमाऊँ मण्डल और 2. गढ़वाल मण्डल।

कुमाऊँ मण्डल के 6 जिले हैं: अल्मोड़ा, उधम सिंह नगर, चम्पावत, नैनीताल, पिथौरागढ़ और बागेश्वर।

गढ़वाल मण्डल के 7 जिले हैं: उत्तरकाशी, चमोली गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, रूद्रप्रयाग और हरिद्वार।

This post was last modified on July 27, 2019 9:10 pm

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