भारतीय इतिहास के गुप्तकालीन शासक और उनके अभिलेख:

 गुप्त सम्राटों के समय में गणतंत्रीय राजव्यवस्था का ह्मस हुआ। गुप्त प्रशासन राजतंत्रात्मक व्यवस्था पर आधारित था। देवत्व का सिद्वान्त गुप्तकालीन शासकों में प्रचलित था। राजपद वंशानुगत सिद्धान्त पर आधारित था। राजा अपने बड़े पुत्र को युवराज घोषित करता था। उसने उत्कर्ष के समय में गुप्त साम्राज्य उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में विंघ्यपर्वत तक एवं पूर्व में बंगाल की खाड़ी से लेकर पश्चिम में सौराष्ट्र तक फैला हुआ था।

भारतीय इतिहास के गुप्तकालीन शासक और उनके अभिलेखों की सूची:

शासक का नाम सम्बंधित अभिलेख
समुद्रगुप्त (335-375ई) प्रयाग प्रशस्ति, एरण प्रशस्ति, नालंदा, गया ताम्र शासन लेख।
चन्द्रगुप्त द्वितीय (375-414ई) मथुरा स्तंभलेख, उदयगिरी का प्रथम और द्वितीय गुहा लेख, गढ़वा का प्रथम शिलालेख, साँची शिलालेख, महरौली प्रशस्ति।
कुमारगुप्त महेन्द्रादित्य (414-455ई) बिल्सड़ स्तंभलेख, गढ़वा का द्वितीय शिलालेख, गढ़वा का तृतीय शिलालेख, उदयगिरी का तृतीय गुहलेख, धनदैह अभिलेख, मथुरा का जैन मूर्ति लेख, तुमैन शिलालेख, मंदसौर शिलालेख, कर्मदंडा लिंगलेख, कुलाईकुरी ताम्रलेख, दामोदरपुर प्रथम एवं द्वितीय ताम्रलेख, बैग्राम ताम्रलेख, मानकुंवर बुद्धमूर्ति लेख।
स्कंदगुप्त जूनागढ़ प्रशस्ति, कहाँव स्तम्भ लेख, सुपिया स्तंभलेख, इंदौर ताम्रलेख, भितरी स्तम्भलेख।
कुमारगुप्त द्वितीय सारनाथ बुद्धमूर्ति लेख।
पुरुगुप्त (467-476ई.) बिहार स्तम्भ लेख।
बुद्धगुप्त सारनाथ बुद्धमूर्ति लेख, पहाडपुर ताम्रलेख, राजघाट (वाराणसी), स्तम्भ लेख, नंदपुर ताम्रलेख।
वैन्यगुप्त गुनईधर (टिपरा) ताम्रलेख।
भानुगुप्त एरण स्तंभलेख।
विष्णुगुप्त पंचम दामोदरगुप्त ताम्र लेख।

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गुप्तकालीन शासक प्रश्नोत्तर (FAQs):

गुप्तकालीन नवरत्न चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के दरबार में थे। विक्रमादित्य के नवरत्नों के नाम इस प्रकार हैं- धन्वंतरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, बेताल भट्ट, घटखर्पर, कालिदास, वराहमिहिर और वररुचि।

गुप्त राजवंश भारत का एक हिंदू साम्राज्य था। जिसने लगभग पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर शासन किया। इस काल को इतिहासकार भारत का स्वर्ण युग मानते हैं।

गुप्त वंश का वह राजा स्कंदगुप्त विक्रमादित्य था जिसने हूणों को भारत पर आक्रमण करने से रोका था। हूणों को परास्त करने और भारत को पुनः चक्रवर्ती साम्राज्य बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।

गुप्त वंश का पहला "महान" सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य था। वह गुप्त वंश के संस्थापक और अग्रणी सम्राट थे। चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने अपने शासनकाल के दौरान एक विस्तारित साम्राज्य की स्थापना की और भारतीय इतिहास में अपनी प्रभावशाली जीतों के लिए प्रसिद्ध हुए।

विष्णुगुप्त को आम तौर पर गुप्त साम्राज्य का अंतिम मान्यता प्राप्त शासक माना जाता है। भारतीय इतिहास में मौर्य काल के प्रसिद्ध आचार्य चाणक्य का दूसरा नाम विष्णुगुप्त है। इतिहास में चाणक्य को कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता है।

  Last update :  Fri 7 Oct 2022
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