तमिलनाडू के कांची कैलासनाथर मंदिर के बारे में महत्वपूर्ण व रोचक जानकारी

कैलासनाथर मंदिर, कांचीपुरम तमिलनाडू,

कांची कैलासनाथर मंदिर के बारे में जानकारी (Information About Kanchi Kailasanathar Temple):

कांची कैलासनाथर मंदिर भारत के तमिलनाडू के प्रसिद्ध शहर कांचीपुरम में स्थित है। इस मंदिर के निर्माण का श्रेय पल्लव वंश को दिया जाता है जिसे द्रविड़ स्थापत्य शैली में बनाया गया है। कैलासनाथर मंदिर को “कांची” या “शिव कांची” के नाम से भी जाना जाता है। पल्लव वंश द्वारा बनाया गया यह मंदिर हिंदू धर्म के सात पवित्र शहरों में से एक माना जाता है।

कांची कैलासनाथर मंदिर का संक्षिप्त विवरण (Quick Info About Kanchi Kailasanathar Temple):

स्थान कांचीपुरम, तमिलनाडु, भारत
निर्माता नरसिंहवर्मन द्वितीय
निर्माणकाल 685 ई॰ से 705 ई॰ के मध्य
वस्तुशैली द्रविड़ स्थापत्य शैली
प्रकार ऐतिहासिक हिन्दू मंदिर
समर्पित भगवान शिव
अन्य नाम “राजसिम्हा पल्लवेश्वरम्” या “शिव विष्णु कांची”

कांची कैलासनाथर मंदिर का इतिहास (History of Kanchi Kailasanathar Temple):

मंदिर के निर्माण का श्रेय पल्लव राजवंश के राजा नरसिंहवर्मन द्वितीय को दिया जाता है। इतिहासकारो के अनुसार आठवीं शताब्दी में बना यह मंदिर राजा नरसिंहवर्मन द्वितीय ने अपनी पत्नी की प्रार्थना पर बनवाया था परंतु मंदिर के अग्रभाग का निर्माण राजा के पुत्र महेंद्र वर्मन तृतीय द्वारा करवाया गया था। नरसिंहवर्मन ने अपने शासनकाल में कई मंदिरों का निर्माण करवाया था लेकिन उनके द्वारा बनाया गया यह मंदिर प्रथम श्रेणी में आता है साथ ही राजा द्वारा दक्षिण भारत में निर्मित पहला संरचनात्मक मंदिर है और वर्तमान में कांची कैलासनाथर मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है।

कांची कैलासनाथर मंदिर के बारे में रोचक तथ्य (Interesting Facts About Kanchi Kailasanathar Temple):

  1. कैलासनाथर का अर्थ है “ब्रह्मांडीय पर्वत का भगवान” और हिंदू धर्म में शिव, विष्णु, देवी, सूर्य (सूर्य), गणेश और कार्तिकेय की स्मार्ट पूजा की परंपरा में बनाया गया यह मंदिर एक बौद्ध धर्म को प्रतिस्थापित करता है।
  2. राजाओं द्वारा बनाई गई मंदिर में एक गुप्त सुरंग जिसे गुप्त मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया गया था, यह आज मंदिर में मौजूद है।
  3. मंदिर को चोल राजवंश और विजयनगर सम्राटों द्वारा विकसित शैलियों के प्रभाव और वास्तुकला में बनाया गया था, जो आज भी मंदिर में देखा जा सकता है।
  4. मंदिर को पत्थर से निर्मित वास्तुकला के विपरीत बनाया गया है परंतु पत्थर की कटी हुई वश्तुशैली को देखा जा सकता है और इसी वस्तुशैली का उपयोग महाबलीपुरम के मंदिरों में किया गया था।
  5. मंदिर में स्थित लंबा गोपुरम मंदिर के मुख्य द्वार से बाईं ओर स्थित है और मंदिर की नींव ग्रेनाइट पत्थर से बनी है जो मंदिर के भार को आसानी से सहन कर सकता है।
  6. मंदिर की दीवारों पर नक्काशी का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। क्योंकि नक्काशी की सभी रचनाएँ बलुआ पत्थर से की गई हैं।
  7. मंदिर के अंदर एक गर्भगृह और एक आंतरिक परिक्षेत्र शामिल है, जो चारो तरफ से एक उच्च दीवार से घिरा हुआ है और मंदिर के अंदर प्रवेश करने के लिए केवल एक मुख्य द्वार गोपुरम है।
  8. मंदिर परिसर के केंद्र में एक टॉवर सहित संरचना का एक सरल नक्शा है और मुख्य मंदिर गर्भगृह की संरचना वर्गाकार की है। परंतु गर्भगृह के ऊपर का भाग पिरामिडनुमा आकार में उभरा है
  9. मंदिर के प्रवेश द्वार पर, गोपुरम की दीवारों को प्लास्टर किया गया है और मुख्य प्रवेश द्वार की दीवार में आठ छोटे मंदिर और एक गोपुरा है, जो मुख्य गोपुरा के अग्रदूत हैं।
  10. मुख्य मंदिर के गर्भगृह में काले ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित 16 एक पक्षीय शिवलिंग है और साथ में देवता की रक्षा के करने के लिए थोड़ी दूर पर एक नंदी बैल के साथ देवता की अत्यंत भव्य नक्काशीदार प्रतिमा हैं।
  11. मंदिर की दक्षिणी दीवारों पर मूर्तिकला के रूप में भगवान शिव का लिंगम रूप और पार्वती जी का उमामहेश्वर रूप को दर्शाया गया है और निचले स्तंभ में मूर्तिकला के रूप में ब्रह्मा और विष्णु एवं अमर उजाला के चित्रों को दर्शाया गया है।
  12. मंदिर की उत्तरी दीवारों पर भगवान शिव की नक्काशी उनके “त्रिपुरान्तक” रूप में की गई है, जिसमें तीन देवियों को भी प्रदर्शीत किया गया है वे देवी दुर्गा, देवी भैरवी और देवी कौशिकी हैं।
  13. मंदिर के परिधिगत मार्ग में भीतरी दीवारों पर भगवान की कई छवियों को दिखया गया है। जिनमें कार्तिकेय, दुर्गा, त्रिपुरंतक, गरुड़ारुध-विष्णु, असुर संहारा (राक्षसों का वध), नरसिंह (विष्णु का अवतार), त्रिविक्रम (एक और विष्णु का अवतार), शिव तांडव (एक नृत्य मुद्रा में शिव), शिव ब्रह्मा के पांचवें सिर को काटते हुए, भगवान ब्रह्मा और उनकी पत्नी, गंगाधारा, उर्ध्व तांडव, भुदेवी, लिंगोद्भव, भिक्षाटन, रावण और एक बैल पर बैठे अर्धनारीश्वर इत्यादि की छवि दिखाई गई है।
  14. मंदिर की दक्षिणी दीवार के सामने विमना की शांति और शांत मुद्रा में शिव की बहुत सुंदर छवि स्थित है जिसे दक्षिणामूर्ति के रूप में जाना जाता है।
  15. मंदिर के परिसर में मुख्य मंदिर के चारो तरफ कंपाउंड की दीवार के निकट 58 छोटे मंदिर और मंदिर के मुख्य द्वार पर 8 छोटे मंदिर बने हुए हैं जिसमें शिव और उनकी पत्नी पार्वती चित्रों को कई नृत्य रूप में दिखया गया है।

कांची कैलासनाथर मंदिर कैसे पहुंचे (How to Reach Kanchi Kailasanathar Temple):

  1. कैलासनाथर मंदिर का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन कांचीपुरम रेलवे स्टेशन है यह मंदिर से केवल 2.6 किमी की दूरी पर स्थित है।
  2. इसके अतिरिक्त मंदिर का सबसे निकटतम हवाई अड्डा चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है यह मंदिर से 64.3 किमी की दूरी पर स्थित है यहाँ से मंदिर तक टैक्सी और सार्वजनिक बस द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।
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