श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन, मध्यप्रदेश

श्री महाकालेश्वर मंदिर  के बारे में जानकारी (Information about Shri Mahakaleshwar Temple):

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर (Mahakal Temple, Ujjain) भारत के मध्य प्रदेश राज्य के प्रसिद्ध एवं प्राचीन शहर उज्जैन में स्थित है। यह एक हिंदू मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है और भगवान शिव के बारह  ज्योतिर्लिंगों में से एक है। ज्योतिर्लिंग के सभी मंदिरों को भगवान शिव का निवास स्थान कहा जाता है। यह मंदिर उज्जैन में रुद्र सागर झील के निकट स्थित है। ज्योतिर्लिंग के सभी मंदिरों को शिवलिंग के रूप में माना जाता है और सभी शिवलिंग मंत्र-शक्ति के साथ स्थापित किए गए हैं।

श्री महाकालेश्वर मंदिर का संक्षिप्त विवरण (Quick Info About Sri Mahakaleshwar temple):

स्थानउज्जैन शहर, मध्य प्रदेश राज्य, भारत
निर्माण कालवर्तमान संरचना 1734 ई॰
निर्मातारानोजी सिंधिया
समर्पितमहाकालेश्व (शिव)
प्रकारऐतिहासिक हिन्दू मंदिर
वास्तुकलाद्रविड़ वास्तुकला

उज्जैन के महाकाल मंदिर का इतिहास (History of Shri Mahakaleshwar Mandir):

श्री महाकालेश्वर मंदिर 18 महाशक्ति पीठ में सबसे प्रतिष्ठित मंदिर माना जाता है। शक्तिपीठों के बारे में यह कहा जाता है, की देवी सती के शव के हिस्सों के गिरने के कारण ही शक्ति का जन्म हुआ जिसके साथ भगवान शिव ने इसे धारण किया था। 51 शक्तिपीठों में से प्रत्येक में शक्ति और कालभैरव के मंदिर हैं। ज्योतिर्लिंग मंदिरों के लिए शिव पुराण के अनुसार एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच सृष्टि में सर्वोच्च के लिए बहस हुई, उनका परीक्षण करने के लिए भगवान शिव ने एक अंतहिन स्तम्भ को ज्योतिर्लिंग के रूप में तीनों लोकों में भेज दिया जिसके साथ भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा क्रमशः प्रकाश का अंत पाने के लिए स्तम्भ के साथ यात्रा करते हैं और अंत में ब्रह्मा झूठ बोल देते हैं। परंतु विष्णु अपनी हार स्वीकार करते हैं तब शिव प्रकाश के दूसरे स्तंभ के रूप में प्रकट होते हैं ओर ब्रह्मा को शाप देते हैं की समारोह में उनका कोई स्थान नहीं होगा, जबकि विष्णु की अनंत काल तक पुजा की जाएगी। यही वजह है की प्रत्येक ज्योतिर्लिंग मंदिरों में भगवान शिव प्रकाश को एक उग्र स्तंभ के रूप में दिखाया गया है। 1107 ई॰ से 1728 ई॰ तक उज्जैन शहर में यवनों का शासन था और इनके शासनकाल में हिंदुओं की प्राचीन धार्मिक परंपराए नष्ट हो चुकीं थीं लेकिन मराठों ने मालवा के क्षेत्र में 29 नवंबर 1728 ई॰ में आक्रमण कर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया जिसके बाद उज्जैन की खोई हुई धार्मिक परंपराए दौबरा लौट आईं। इसके बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर का पुनः निर्माण 1734 ई॰ मराठा के जनरल रनोजी सिंधिया ने करवाया इसके बाद सिंधिया वंश के दौरान मंदिर की विकास कार्य आगे तक चलता रहा।

श्री महाकालेश्वर मंदिर  के बारे में रोचक तथ्य (Interesting facts about Ujjain Sri Mahakaleshwar Temple Madhyapradesh):

  1. श्री महाकालेश्वर की मूर्ति दक्षिणमूर्ति के रूप में जानी जाती है जिसका अर्थ है की यह दक्षिण की ओर है।
  2. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी महाकालेश्वर की मूर्ति है, जिसे तांत्रिक शिव नेत्र परंपरा द्वारा केवल 12 ज्योतिर्लिंगों में से केवल एक में पाया जाता है।
  3. ओंकारेश्वर महादेव की मूर्ति को महाकालेश्वर मंदिर के ऊपर गर्भगृह में स्थापित किया गया है।
  4. मंदिर के गर्भगृह के पश्चिम में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित है, जिसके साथ उत्तर में पार्वती की मूर्ति स्थापित है और पूर्व दिशा में कार्तिकेय के चित्र स्थापित हैं।
  5. महा शिवरात्रि के दिन, मंदिर के पास एक विशाल मेला लगता है, एवं श्रावण मास में हर सोमवार को इस मंदिर में भक्तों की अपार भीड़ होती है।
  6. मंदिर के निकट एक छोटा-सा जलस्त्रोत है जिसे कोटितीर्थ कहा जाता है। लोगों का कहना है की ग़ुलाम वंश के शासक इल्तुत्मिश ने जब मंदिर को तुड़वाया था, तब उसने शिवलिंग को इसी कोटितीर्थ में फिकवा दिया था।
  7. मंदिर के अंदर एक विशाल सभा मंडप है जिसका निर्माण बिड़ला उद्योग समूह ने 1980 ई॰ में करवाया था।
  8. मंदिर को संरक्षित रखने के लिए और आकर्षित करने के लिए हाल ही में मंदिर के 118 शिखरों पर लगभग 16 किलो स्वर्ण की परत चढ़ाई गई है।
  9. मंदिर में बना एक कुण्ड सोपानों से जुड़े मार्ग पर अनेक दर्शनीय परमारकालीन प्रतिमाएँ देखी जा सकती हैं जो उस समय निर्मित मन्दिर के कलात्मक वैभव का परिचय देती है। कुण्ड के पूर्व में जो विशाल कमरा है, वहाँ से महाकालेश्वर के गर्भगृह में प्रवेश किया जाता है।
  10. मन्दिर परिसर में दक्षिण की ओर अनेक छोटे-छोटे शिव मन्दिर हैं जिनका निर्माण सिंधिया वंश के राजाओं ने करवाया था।

श्री महाकालेश्वर मंदिर कैसे पहुंचे (How to reach Shri Mahakaleshwar Temple):

  1. मंदिर आने के लिए उज्जैन की सड़कें इंदौर, सूरत ग्वालियर, पुणे, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, उदयपुर, नासिक, मथुरा से सीधे सड़क मार्ग से जुड़ीं हुई हैं।
  2. मंदिर का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन उज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन है, इस स्टेशन की रेलवे लाइन राजकोट, मुंबई, फौजाबाद, लखनऊ, देहरादून, दिल्ली, बनारस, कोचीन, चेन्नई, बैंगलोर, हैदराबाद, जयपुर, हावड़ा और कई अन्य कई शहरों से सीधे जुड़ीं हुईं हैं।
  3. वायुमार्ग के लिए सबसे मंदिर का सबसे निकटतम अड्डा इंदौर में देवी अहिल्या बाई होल्कर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो मंदिर से केवल 53 किमी की दूरी पर है।

This post was last modified on July 10, 2019 4:47 pm

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