अर्जन सिंह का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

✅ Published on September 16th, 2021 in प्रसिद्ध व्यक्ति, भारतीय सेना

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे अर्जन सिंह (Arjan Singh) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए अर्जन सिंह से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Arjan Singh Biography and Interesting Facts in Hindi.

अर्जन सिंह के बारे में संक्षिप्त जानकारी

नामअर्जन सिंह (Arjan Singh)
वास्तविक नामएयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह
जन्म की तारीख15 अप्रैल 1919
जन्म स्थानफैसलाबाद, पाकिस्तान
निधन तिथि16 सितम्बर 2017
माता व पिता का नामकरतार सिंह / किशन सिंह
उपलब्धि1964 - भारतीय वायुसेना के पहले एयर चीफ मार्शल
पेशा / देश / मार्शल /

अर्जन सिंह (Arjan Singh)

भारतीय वायु सेना के मार्शल अर्जन सिंह औलख, भारतीय वायु सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी थे। उन्होंने 1964 से 1969 तक वायु सेना के तीसरे प्रमुख के रूप में कार्य किया, 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के माध्यम से वायु सेना का नेतृत्व किया। वह भारतीय वायु सेना (IAF) के पहले और एकमात्र अधिकारी थे, जिन्हें पाँच सितारा में पदोन्नत किया गया था

मार्शल अर्जन सिंह का जन्म 15 अप्रैल 1919 को लायलपुर (अब फैसलाबाद,पाकिस्तान) में ब्रिटिश भारत के एक प्रतिष्ठित सैन्य परिवार हुआ था। इनके पिता का नाम किशन सिंह था जो कि एक रिसालदार के रूप मे कार्य करते थे. वे एक डिवीजन कमांडर के एडीसी के रूप में सेवा प्रदान करते थे। इनकी माता का नाम करतार सिंह था, वह एक गृहणी थी अर्जन सिंह के दादाजी ने भी 1917 के दौरान रिसालदार मेजर के रूप में कार्य किया. इनके परिवार के अधिकांश लोग सेनाओ में कार्यरत थे।
मार्शल अर्जन सिंह का निधन 16 सितम्बर 2017 शाम 7:47 बजे दिल का दौरा पड़ने से हुआ। (IST) उस शाम उनके निधन के बाद, उनका पार्थिव शरीर नई दिल्ली के 7A कौटिल्य मार्ग स्थित उनके घर वापस आ गया, जहाँ कई आगंतुकों और गणमान्य व्यक्तियों ने अपने सम्मान की पेशकश की, जिनमें राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री निर्मला केतारमन और तीन सेवा प्रमुख शामिल थे। भारतीय सशस्त्र बल। भारत सरकार द्वारा एक राजकीय अंतिम संस्कार के लिए, 18 सितंबर को नई दिल्ली के बरार स्क्वायर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें भारतीय वायुसेना के लड़ाकू जेट और हेलीकॉप्टर भी शामिल थे। दिल्ली में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका हुआ था।
अर्जन सिंह ने अपनी शिक्षा मोंटगोमरी (अभी साहिवाल, पाकिस्तान) में पूरी की। उन्होंने 1938 में आरएएफ कॉलेज क्रैनवेल में प्रवेश किया और वर्ष 1939 में एक पायलट अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया।
अर्जन सिंह ने वायुसेना मे अपनी नौकरी की शुरुआत 1939 में की थी। सन 1964 मे अर्जन सिंह भारत के पहले एयर चीफ़ मार्शल बने थे। चीन के साथ 1962 की लड़ाई के बाद 1963 में उन्हें वायु सेना उप प्रमुख बनाया गया। एक अगस्त 1964 को जब वायु सेना अपने आप को नई चुनौतियों के लिए तैयार कर रही थी, उस समय एयर मार्शल के रूप में अर्जन सिंह को इसकी कमान सौंपी गई थी। जून 2008 में फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की मृत्यु के बाद अर्जन सिंह पांच सितारा रैंक वाले अकेले भारतीय सैन्य अधिकारी थे। अपने कई दशकों के करियर में उन्होंने 60 प्रकार के विमान उड़ाए, जिनमें दूसरे विश्व युद्ध से पहले के तथा बाद में समसामयिक विमानों के साथ साथ परिवहन विमान भी शामिल हैं। मार्शल अर्जन सिह वर्ष 1971 से 1974 तक स्विट्ज़रलैंड में भारत के राजदूत रह रहे है। अर्जन सिह वर्ष 1989 से 90 तक देश की राजधानी दिल्ली के उपराज्यपाल रह चुके हैं। उन्होंने दिसंबर 1990 तक एक वर्ष के लिए इस पद पर कार्य किया।अर्जन सिंह पहले ऐसे वायु सेना प्रमुख हैं, जिन्होंने इस पद पर पहुंचने तक विमान उड़ाना नहीं छोड़ा था और अपने कार्यकाल के अंत तक वह विमान उड़ाते रहे।लगभग पाँच वर्षों तक भारतीय वायुसेना के प्रमुख रहने के बाद, इतिहास में वायु सेना प्रमुख के रूप में दूसरा सबसे लंबा कार्यकाल, सिंह ने जुलाई 1969 में, 50 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त किया।
पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध मे महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उन्हे पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। 1944 में द्वितीय विश्वयुद्ध के बर्मा अभियान में उनकी भूमिका के लिए उन्हें डिस्टिग्विश्ड फ्लाइंग क्रॉस प्रदान किया गया था। वायु सेना के लिए उनकी सेवाओं के लिए सरकार ने जनवरी 2002 में वायु सेना के मार्शल के रैंक से नवाजा। यह उपलब्धि पाने वाले वह वायु सेना के एक मात्र अधिकारी हैं। 14 अप्रैल 2016 को, मार्शल के 97 वें जन्मदिन को चिह्नित करने के लिए एक कार्यक्रम में, तत्कालीन वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने घोषणा की कि पश्चिम बंगाल के पनागर में भारतीय वायु सेना के बेस का नाम बदलकर एयर फ़ोर्स स्टेशन अर्जन सिंह किया जा रहा है मार्शल की सेवा। एयरबेस का निर्माण 1944 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन बर्मा इंडिया थियेटर में संयुक्त राज्य वायु सेना द्वारा किया गया था, वही थिएटर जो युद्ध के दौरान सिंह ने सेवा की थी।

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर:

प्रश्न: सन 1964 मे भारत के पहला एयर चीफ़ मार्शल कौन बना था?
उत्तर: अर्जन सिंह
प्रश्न: अर्जन सिंह ने वायुसेना मे अपनी नौकरी की शुरुआत कब की थी?
उत्तर: 1939
प्रश्न: पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध मे महत्वपूर्ण भूमिका के लिए अर्जन सिंह को किससे सम्मानित किया गया था?
उत्तर: पद्म विभूषण
प्रश्न: अर्जन सिह वर्ष 1989 से 90 तक कहाँ के उपराज्यपाल रह चुके हैं?
उत्तर: दिल्ली
प्रश्न: वर्ष 1980 से 1983 तक इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलोजी,दिल्ली के अध्यक्ष कौन रह चुके है?
उत्तर: अर्जन सिंह

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी:

प्रश्न: सन 1964 मे भारत के पहला एयर चीफ़ मार्शल कौन बना था?
Answer option:

      करियप्पा

    ❌ Incorrect

      अरुप राहा

    ❌ Incorrect

      अर्जन सिंह

    ✅ Correct

      मुहम्मद हिदायतुल्लाह

    ❌ Incorrect

प्रश्न: अर्जन सिंह ने वायुसेना मे अपनी नौकरी की शुरुआत कब की थी?
Answer option:

      1980

    ❌ Incorrect

      1932

    ❌ Incorrect

      1934

    ❌ Incorrect

      1939

    ✅ Correct

प्रश्न: पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध मे महत्वपूर्ण भूमिका के लिए अर्जन सिंह को किससे सम्मानित किया गया था?
Answer option:

      भारत रत्न

    ❌ Incorrect

      पद्म विभूषण

    ✅ Correct

      अर्जुन पुरस्कार

    ❌ Incorrect

      साहित्य अकादमी पुरस्कार

    ❌ Incorrect

प्रश्न: अर्जन सिह वर्ष 1989 से 90 तक कहाँ के उपराज्यपाल रह चुके हैं?
Answer option:

      दिल्ली

    ✅ Correct

      बंगाल

    ❌ Incorrect

      हरियाणा

    ❌ Incorrect

      पंजाब

    ❌ Incorrect

प्रश्न: वर्ष 1980 से 1983 तक इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलोजी,दिल्ली के अध्यक्ष कौन रह चुके है?
Answer option:

      अर्जन सिंह

    ✅ Correct

      बाबा आमटे

    ❌ Incorrect

      भगत सिंह

    ❌ Incorrect

      महात्मा गांधी

    ❌ Incorrect

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