सोमनाथ शर्मा का जीवन परिचय | Biography of Major Somnath Sharma in Hindi

सोमनाथ शर्मा का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे सोमनाथ शर्मा (Somnath Sharma) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए सोमनाथ शर्मा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Somnath Sharma Biography and Interesting Facts in Hindi.

सोमनाथ शर्मा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

नामसोमनाथ शर्मा (Somnath Sharma)
वास्तविक नाममेजर सोमनाथ शर्मा
जन्म की तारीख31 जनवरी 1923
जन्म स्थानदध, कांगड़ा, पंजाब प्रान्त, ब्रिटिश भारत
निधन तिथि03 नवम्बर 1947
माता व पिता का नामसरस्वती / अमर नाथ शर्मा
उपलब्धि1950 - परमवीर चक्र से सम्मानित प्रथम भारतीय पुरुष
पेशा / देशपुरुष / सेना अधिकारी / भारत

सोमनाथ शर्मा (Somnath Sharma)

मेजर सोमनाथ शर्मा भारतीय सेना की कुमाऊँ रेजिमेंट की चौथी बटालियन की डेल्टा कंपनी के कंपनी-कमांडर थे जिन्होंने अक्टूबर-नवम्बर, 1947 के भारत-पाक संघर्ष में अपनी वीरता से शत्रु के छक्के छुड़ा दिये। साल 1950 में भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरान्त भारत की सेना का सबसे बड़ा अलंकरण ‘परमवीर चक्र‘ से सम्मानित किया था।

सोमनाथ शर्मा का जन्म

मेजर सोमनाथ शर्मा का जन्म 31 जनवरी, 1923 को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में हुआ था। इनका पूरा नाम मेजर सोमनाथ शर्मा था| इनके पिता का नाम अमर नाथ शर्मा था| इनके पिता मेजर अमरनाथ शर्मा भी सेना में डॉक्टर थे और आर्मी मेडिकल सर्विस के डायरेक्टर जनरल के पद से सेवामुक्त हुए थे। इनके दो भाई और एक बहन भी थी| इनके भाई सुरिंदर नाथ शर्मा थलसेना में लेफ्टिनेंट जनरल रह चुके थे और जबकि दूसरे भाई विश्वनाथ शर्मा भी थलसेनाध्यक्ष रह चुके थे| उनकी बहन मेजर कमला तिवारी भी सेना में चिकित्सका थीं|

सोमनाथ शर्मा का निधन

सोमनाथ शर्मा का निधन 3 नवम्बर 1947 को (24 वर्ष) महज चोबीस वर्ष की आयु में बडगाम, भारत में पाकिस्तानी घुसपैठियों से लड़ते हुए शहीद हो गये थे।

सोमनाथ शर्मा की शिक्षा

शर्मा ने देहरादून के प्रिंस ऑफ वेल्स रॉयल मिलिट्री कॉलेज में दाखिला लेने से पहले नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। बाद में उन्होंने सैंडहर्स्ट के रॉयल मिलिट्री कॉलेज में अध्ययन किया। बचपन के दिनों में, सोमनाथ भगवद गीता में कृष्ण और अर्जुन की शिक्षाओं से प्रभावित थे, उन्हें उनके दादा ने सिखाया था।

सोमनाथ शर्मा का करियर

मेजर सोमनाथ ने अपना सैनिक जीवन 22 फरवरी, 1942 से शुरू किया जब इन्होंने सोमनाथ शर्मा की नियुक्ति ब्रिटिश भारतीय सेना की उन्नीसवीं हैदराबाद रेजिमेन्ट की आठवीं बटालियन में बतौर कमीशंड ऑफिसर हुई इस रेजिमेंट को बाद में चौथी कुमायूं रेजिमेंट के नाम से जाना गया है साल 1942 में ही इन्हें डिप्टी असिस्टेण्ट क्वार्टर मास्टर जनरल बनाकर बर्मा के मोर्चे पर भेजा गया। उन्होंने बर्मा में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अराकन अभियान में जापानी सेनाओं के विरुद्ध लड़े। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने अराकन अभियान बर्मा में जापानी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। उस समय उन्होंने कर्नल के एस थिमैया की कमान के तहत काम किया, जो बाद में जनरल के पद तक पहुंचे और 1957 से 1961 तक सेना में रहे। श्री सोमनाथ शर्मा को अराकन अभियान की लड़ाई के दौरान भी भेजा गया था। अराकन अभियान में उनके योगदान के कारण उन्हें मेन्शंड इन डिस्पैचैस में स्थान मिला। 15 अगस्त, 1947 को भारत के स्वतन्त्र होते ही देश का दुखद विभाजन भी हो गया। मेजर सोमनाथ शर्मा की कम्पनी को श्रीनगर के पास बड़गाम हवाई अड्डे की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गयी थी। 31 अक्टूबर को, कुमाऊँ रेजिमेंट की 4 थी बटालियन की डी कंपनी, श्री सोमनाथ शर्मा की कमान के तहत श्रीनगर पहुंची थी। इस समय के दौरान उनके बाएं हाथ पर प्लास्टर चढ़ा था जो हॉकी फील्ड पर चोट के कारण लगा था, लेकिन उन्होंने अपनी कंपनी के साथ युद्ध में भाग लेने पर जोर दिया और बाद में उन्हें जाने की अनुमति दी गई।

सोमनाथ शर्मा के पुरस्कार और सम्मान

21 जून 1947 को, श्रीनगर हवाई अड्डे के बचाव में ,3 नवम्बर1947 को अपने कार्यों के लिए, परम वीर चक्र से श्री सोमनाथ शर्मा को सम्मानित किया गया था। यह पहली बार था जब इसकी स्थापना के बाद किसी व्यक्ति को सम्मानित किया गया था। संयोगवश, श्री शर्मा के भाई की पत्नी सावित्री बाई खानोलकर , परमवीर चक्र की डिजाइनर थी। 1980 में जहाज़रानी मंत्रालय, भारत सरकार के उपक्रम भारतीय नौवहन निगम (भानौनि) ने अपने पन्द्रह तेल वाहक जहाज़ों के नाम परमवीर चक्र से सम्मानित महावीरों के सम्मान में उनके नाम पर रखे। तेल वाहक जहाज़ एमटी मेजर सोमनाथ शर्मा, पीवीसी 11 जून 1984 को भानौनि को सौंपा गया। 25 सालों की सेवा के पश्चात जहाज़ को नौसनिक बेड़े से हटा लिया गया। परम वीर चक्र विजेताओं के जीवन पर टीवी श्रृंखला का पहला एपिसोड, परम वीर चक्र (1988) ने 3 नवंबर 1947 के श्री सोमनाथ शर्मा के कार्यों को शामिल किया था। उस प्रकरण में, उनका किरदार फारूक शेख द्वारा अभिनीत किया गया था।

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व्यक्तिउपलब्धि

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