गरीबी एवं बेरोजगारी उन्मूलन योजनाएं - महत्त्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक कार्यक्रम/योजनाएं:

गरीबी या निर्धनता क्या है?

निर्धनता एक ऐसी सामाजिक घटना है, जो सामान्यता निर्धन या फिर वंचित होने की स्थिति को दर्शाता है। सामान्यता गरीब या निर्धन उस व्यक्ति को समझा जाता है, जो अपने जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं जैसे भोजन, शिक्षा, स्वस्थ्य, आवास आदि चीजों की पूर्ति करने में असमर्थ सिद्ध होता है ऐसे व्यक्ति को गरीब कहा जाता है और जब यह स्थिति एक बहुत बड़े समुदाय में हो तो यह गरीबी या निर्धनता कहलाती है।

गरीबी या निर्धनता के प्रकार:

गरीबी दो प्रकार की होती, जो इस प्रकार है-

  • सापेक्ष गरीबी- सापेक्ष गरीबी आय की असमानताओं पर आधारित होती है। सापेक्ष गरीबी में विभिन्न वर्गों, प्रदेशों और देशों की प्रति व्यक्ति आय की तुलना करके निर्धनता का अनुमान लगाया जाता है। जिस देश या वर्ग के लोगों का जीवन स्तर या प्रति व्यक्ति आय का स्तर नीचा रहता है, वे उच्च प्रति व्यक्ति आय वाले लोगों की तूलना में गरीब माने जाते है। निर्वाह स्तर को आय एवं उपयोग व्यय के आधार पर मापा जाता है।
  • निरपेक्ष गरीबी- निरपेक्ष गरीबी से अभिप्राय किसी देश की आर्थिक अवस्था को ध्यान में रखते हुए निर्धनता के माप से है। निरपेक्ष गरीबी में समान्यता उस व्यक्ति या समुदाय को गरीब माना जाता है, जिसकी आय इतनी कम होती है की वह अपनी न्यूनतम भरणपोषण की चीजों की पूर्ति नहीं कर पाता है।

गरीबी रेखा या निर्धनता रेखा:

गरीबी रेखा या निर्धनता रेखा से अभिप्राय आय के उस स्तर से है जिसमे व्यक्ति अपने न्यूनतम आवश्यकताओं और पोषण के स्तर को पूर्ण करने में समर्थ होता है।

गरीबी रेखा से नीचे (BPL):

गरीबी रेखा से नीचे उन व्यक्तियों को रखा जाता है, जो अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति करने में पूर्णता असमर्थ होते है। वह लोग जिनका दैनिक व्यय (खर्च) शहरों में 45 रुपए और ग्रामीण क्षेत्रों में 32 रुपए से कम होता है, अत्यधिक गरीब माने जाते है और गरीबी रेखा से नीचे (BPL) की श्रेणी में आते है।

बेरोजगारी:

बेरोजगारी सामान्यतः उस अवस्था को कहा जाता है जिसमें रोजगार का अभाव होता है। आज विश्व की अधिकतर अर्थव्यवस्थाओं का एकमात्र उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभप्रद रोजगार उपलब्ध कराना है, ऐसे में जब युवाओं का एक बहुत बड़ा समूह रोजगार विहीन हो जाता है तो यह स्थिति बेरोजगारी कहलाती है।

बेरोजगारी उन्मूलन अभियान किसे कहते है? बेरोजगारी उन्मूलन अभियान (Unemployment Abolition Campaign/UAC) का उद्देश्य लोगो को उनकी क्षमता के अनुशार रोजगार उपलब्ध करना है और यदि किसी के अंदर क्षमताओं की कमी है तो उसकी क्षमताओं को निःशुल्क विकसित किया जाएगा।

गरीबी एवं बेरोजगारी उन्मूलन योजनाएं एवं स्थापना वर्ष: आश्रय बीमा योजना की शुरुआत 10 अक्टूबर 2001 को शुरू की गई है। इस योजना का उद्देश्य नौकरी छुट जाने के कारण प्रभावित हुई लोगों को सुरक्षा प्रदान करना है।

गरीबी एवं बेरोजगारी उन्मूलन की प्रमुख योजनाओं की सूची:

कार्यक्रम/योजना वर्ष
अंत्योदय अन्न योजना 25 दिसंबर 2000
अन्त्योदय अन्न योजना (A.A.Y) भारत सरकार द्वारा 25 दिसंबर 2000 को शुरू की गई थी। यह योजना खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के तहत दस लाख गरीब परिवारों के लिए शुरू की गई है। इस योजना के तहत गरीब परिवारों को सार्वजनिक वितरण योजना के तहत गेहूं 2 रुपये प्रति किलोग्राम और धान 3 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से प्रदान किए जाने का प्रावधान किया गया।
दीनदयाल अंत्‍योदय योजना 25 सितंबर 2014
दीनदयाल अंत्योदय योजना (D.A.Y.) का उद्देश्य कौशल विकास और अन्य उपायों के माध्यम से आजीविका के अवसरों में वृद्धि कर शहरी और ग्रामीण निर्धनता और बेरोजगारी को कम करना है। दीनदयाल अंत्योदय योजना को आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय (एच.यू.पी.ए.) के तहत 25 सितंबर 2014 शुरू किया गया था। इस योजना के लिए भारत सरकार ने 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
अन्नपूर्णा योजना 2000-2001
अन्नपूर्णा योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2000 से 2001 के मध्य में शुरू की गई थी। इस योजना में तहत उन लोगो को सम्मिलित किया गया है, जिनकी आयु 65 वर्ष से अधिक है और जो राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत वृद्धावस्था पेंशन के लिए हकदार हैं, परंतु उन्हें यह पेंशन प्राप्त नहीं हो रही है, उन्हें इस योजना के अंतर्गत प्रति व्यक्ति प्रति माह 10 किलोग्राम अनाज की मुफ्त आपूर्ति की व्यवस्था की गई है।
आश्रय बीमा योजना 10 अक्टूबर 2001
आश्रय बीमा योजना की शुरुआत 10 अक्टूबर 2001 को शुरू की गई है। इस योजना का उद्देश्य नौकरी छुट जाने के कारण प्रभावित हुई लोगों को सुरक्षा प्रदान करना है।
इंदिरा आवास योजना (I.A.Y) या प्रधानमंत्री आवास योजना (P.M.A.Y) 1985 और 25 जून 2015
इंदिरा आवास योजना (I.A.Y) की शुरुआत वर्ष 1985 में तात्कालिक प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा शुरू की गई थी। इस योजना के तहत सरकार ने सार्वजनिक आवास योजना की शुरुआत की जिसके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को एक समान आवास प्रदान करने का प्रावधान किया गया। इस योजना का नाम 25 जून 2015 को बदलकर प्रधानमंत्री आवास योजना (P.M.A.Y) कर दिया गया।
एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (I.R.D.P) 1978
एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (I.R.D.P) की शुरुआत वर्ष 1978 में भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा की गई थी। इस योजना के तहत रोजगार और स्वरोजगार प्रोत्साहन का प्रयास किया गया है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद लोगों जैसे ग्रामीण मजदूर, पिछड़े वर्ग, महिलाओं, छोटे किसान आदि के लिए उनके क्षेत्र में ही रोजगार और स्वरोजगार की व्यवस्था करने का प्रयास जाता है।
काम के बदले अनाज कार्यक्रम 1977-1978 और पुन: 14 नवंबर 2004 को शुरू
काम के बदले अनाज कार्यक्रम की शुरुआत पहली बार वर्ष 1977-1978 के मध्य में केंद्र सरकार की गई थी। इस कार्यक्रम को पुन: 14 नवंबर 2004 को तात्कालिक भारत सरकार द्वारा संशोधित कर शुरू किया गया। यह योजना पूर्णत: केंद्र सरकार द्वारा संचालित है। कार्य के बदले अनाज कार्यक्रम का उद्देश्य पूरक रोजगार का निर्माण कर लोगो को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
जनश्री बीमा योजना 2000-2001
जनश्री बीमा योजना की शुरुआत वर्ष 2000 से 2001 के मध्य में भारत सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम की गई थी। इस योजना का उद्देश्य शहरी व ग्रामीण गरीबों को बीमा संरक्षण प्रदान करना है।
जवाहर ग्राम समृद्धि योजना (JGSY) 1 अप्रैल 1999
जवाहर ग्राम समृद्धि योजना (J.G.S.Y) की शुरू 1 अप्रैल 1999 में भारत सरकार द्वारा की गई थी। यह योजना पूर्ववर्ती जवाहर रोजगार योजना (JRY) का ही संशोधित रूप है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगार और गरीबों के लिए निरंतर रोजगार और पूरक रोजगार के अवसरों निर्माण करना है।
जवाहर रोजगार योजना (J.R.Y) 1 अप्रैल 1989
जवाहर रोजगार योजना (J.R.Y) की शुरुआत 1 अप्रैल 1989 को की गई थी। इस योजना की शुरुआत दो प्रमुख कार्यक्रमों, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम (N.R.E.P) और ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम (R.L.E.G.P) के एक साथ मिल जाने के कारण हुई।
जयप्रकाश रोजगार गारंटी योजना (J.P.R.G.Y) 23 जुलाई 2002
जयप्रकाश रोजगार गारंटी योजना (J.P.R.G.Y) की शुरुआत 23 जुलाई 2002 को की गई थी। जयप्रकाश रोजगार गारंटी योजना का उद्देश्य देश के सबसे अधिक पीड़ित जिलों के बेरोजगारों को रोजगार दिलाना है।
ग्रामीण युवाओं स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण (ट्रायसेम) 15 अगस्त 1979
ग्रामीण युवाओं स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण (TRYSEM) की शुरुआत 15 अगस्त 1979 में भारत सरकार द्वारा ग्रामीण युवाओं की बेरोजगारी को दूर करने हेतु प्रशिक्षण देने के लिए की गई थी।
ग्रामीण क्षेत्रीय महिला बाल विकास योजना (D.W.C.R.A) 1982
ग्रामीण क्षेत्रीय महिला बाल विकास योजना (D.W.C.R.A) की शुरुआत सितंबर 1982 को की गई थी। प्रारम्भ में इस योजना का एक ही उद्देश्य 'ग्रामीण क्षेत्रों की गरीब महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराना' था, परंतु वर्ष 1995 से 1996 के मध्य इस योजना के उद्देश्यों में शिशु पालन क्रियाओं का भी शामिल किया गया। 1 अप्रैल 1999 में ड्वाकरा योजना को स्वर्ण जयंती ग्रामीण स्वरोजगार योजना में मिला दिया गया है।
दस लाख कुआँ योजना (M.W.S) 1989
दस लाख कुआँ योजना (M.W.S) की शुरुआत 1989 में की गई थी।
नेहरू रोजगार योजना (N.R.Y) 1 अप्रैल 1989
नेहरू रोजगार योजना (N.R.Y) की शुरुआत 1 अप्रैल 1989 में की गई तथा वर्ष 1990 में इसे संशोधित किया गया था। इस योजना को संचालित व नियंत्रित करने का कार्य शहरी विकास मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना है और इस योजना द्वारा उत्पन्न रोजगार में 30 प्रतिशत रोजगार स्त्रियों को उपलब्ध कराना है।
प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना 2000-2001
प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना की शुरुआत वर्ष 2000 से 2001 के मध्य में भारत सरकार द्वारा की गई थी। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण आवश्यकताओं जैसे- स्वास्थ्य रक्षण, आवास, पेयजल, सड़क, प्राथमिक शिक्षा और विद्युतीकरण की पूर्ति करना है।
प्रधानमंत्री रोजगार योजना (P.M.R.Y) 2 अक्टूबर 1993
प्रधानमंत्री रोजगार योजना (P.M.R.Y) की शुरुआत 2 अक्टूबर 1993 में भारत सरकार द्वारा की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विनिर्माण के क्षेत्र में छोटे व्यवसाय शुरू करने के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को आसानी से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
भारत निर्माण कार्यक्रम 16 दिसम्बर 2005
भारत निर्माण कार्यक्रम की शुरुआत 16 दिसम्बर 2005 को भारत सरकार द्वारा की गई थी। इस योजना को शुरू करने का उद्देश्य भारत में आधारभूत संरचना का निर्माण करना है। इस योजना के तहत ग्रामीण आवास, ग्रामीण विद्युतीकरण, ग्रामीण सड़कों, पेयजल, सिंचाई तथा दूरसंचार का विकास करना है।
मरूभूमि विकास कार्यक्रम (D.D.P) 1977-1978
मरूभूमि विकास कार्यक्रम (D.D.P) की शुरुआत वर्ष 1977 से 1978 के मध्य में की गई थी। मरूभूमि विकास कार्यक्रम का उद्देश्य भूमि के मरुस्थलीकरण के विपरीत परिणामों से बचाव करना है। योजना का 75% खर्च केंद्र सरकार और 25% खर्च राज्य सरकारें देंगी।
महिला सवयं सिद्धि योजना 12 जुलाई 2001
महिला स्वयं सिद्धि योजना की शुरुआत 12 जुलाई 2001 को भारत सरकार द्वारा की गई थी। महिला स्वयं सिद्धि योजना का उद्देश्य महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण करना है। इस योजना में इन्दिरा महिला योजना और महिला समृद्धि योजना को मिलाया गया है।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना या महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (M.N.R.E.G.A) 7 सितंबर 2005 और पुन: 2 अक्टूबर 2009
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (N.R.E.G.A) की शुरुआत 7 सितंबर 2005 को भारत सरकार द्वारा की गई थी। इस योजना के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक मेहनत करने के इच्छुक है, को वर्ष में 100 दिन का रोजगार दिलाने का कानून बनाया गया है। इस कानून में 30% रोजगार महिलाओं को देने का प्रावधान किया गया है। 2 अक्टूबर 2009 को इस कानून को संशोधित कर इसका नाम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (M.N.R.E.G.A) कर दिया गया।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (N.R.H.M) 12 अप्रैल 2005
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (N.R.H.M) की शुरुआत 12 अप्रैल 2005 में भारत सरकार द्वारा की गई थी। इस मिशन का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, उपलब्धता, गुणवत्ता और जवाबदेही में सुधार करना था। यह मिशन 2012 में समाप्त हो गया था।
रोजगार आश्वासन योजना 2 अक्टूबर 1993
रोजगार आश्वासन योजना की शुरूआत 2 अक्टूबर 1993 को तात्कालीन प्रधानमंत्री श्री नरसिम्हा राव द्वारा हुई थी। इस योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत करने वाले परिवार में कम स कम 02 लोगो को 100 दिनों तक सरकार द्वारा लाभप्रद रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया।
स्वजलधारा कार्यक्रम 25 दिसंबर 2002
स्वजलधारा कार्यक्रम की शुरूआत 25 दिसंबर 2002 को भारत के तात्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वजपायी द्वारा हुई थी। इस योजना के तहत सूखाग्रत ग्रामीण इलाको में 1 लाख हैंडपम्प व 1 लाख प्राथमिक स्कूलों में पेयजल की व्यवस्था का प्रावधान किया गया।
स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (S.G.S.Y) 1 अप्रैल 1999
स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (S.G.S.Y) की शुरुआत 1 अप्रैल 1999 में की गई थी। इस योजना का निर्माण भारत की प्रमुख 6 योजनाओं को मिलकर किया गया था। इस योजना का उद्देश्य लघु उद्योगो को बढ़ावा देना और ग्रामीण निर्धनों की सहायता करना है।
स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना (S.J.S.R.Y) 1 दिसंबर 1997
स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना (S.J.S.R.Y) की शुरुआत 1 दिसंबर 1997 में की गई थी। इस योजना का निर्माण तीन प्रमुख योजनाओं शहरी बुनियादी सेवाएँ, प्रधानमंत्री की समन्वित शहरी गरीबी उन्मूलन योजनाऔर नेहरू रोजगार योजना को मिलकर किया गया था।

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  Last update :  Wed 16 Nov 2022
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