जयपुर राजस्थान के आमेर किला आंबेर का किला का इतिहास तथा महत्वपूर्ण जानकारी

आमेर का किला संक्षिप्त जानकारी

स्थानजयपुर, राजस्थान (भारत)
निर्माणकाल1558-1592
निर्माता (किसने बनबाया)राजा मान सिंह प्रथम और सवाई जयसिंह
प्रकारकिला और महल

आमेर का किला का संक्षिप्त विवरण

आमेर का किला भारतीय राज्य राजस्थान की राजधानी जयपुर में आमेर क्षेत्र के ऊँचे पहाड़ों पर स्थित है। यह दुर्ग दुनिया भर में अपनी कलात्मक शैली, शीश महल और सुन्दर नक्काशियों के लिए मशहूर है। इस किले को उच्च् कोटि की मुगल वास्तुकला और राजपूत वास्तुकला शैली का उत्कृष्ट नमूना माना जाता है। यह किला जयपुर के मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक है, इसकी ख़ूबसूरती को देखने हर साल हजारो की संख्या में लोग राजस्थान आते है।

आमेर का किला का इतिहास

मूल रूप से इसकी स्थापना 967 ई॰ में राजस्थान के मीणाओं में चन्दा वंश के राजा एलान सिंह द्वारा की गयी थी। आज आप जिस किले को देखते है, उसका निर्माण मुगल सेना के जनरल और आमेर के कछवाहा राजा मान सिंह प्रथम के शासनकाल के दौरान सन 1592 में पुराने किले के अवशेषों के आधार पर किया गया था। उनके वंशज जय सिंह प्रथम द्वारा मानसिंह द्वारा बनवाये गए इस किले का अच्छा विस्तार किया गया।

अगले 150 सालों में कछवाहा राजपूत राजाओं ने किले में बहुत से सुधार एवं प्रसार किये गए। सन 1727 में सवाई जयसिंह द्वितीय के शासनकाल के दौरान इन्होंने अपनी राजधानी नवनिर्मित जयपुर शहर में स्थानांतरित कर ली। जयपुर से पहले कछवाहा (मौर्य) राजवंश की राजधानी आमेर ही थी।

आमेर का किला के रोचक तथ्य

  1. राजा मान सिंह प्रथम द्वारा इस किले का निर्माण कार्य 1558 में शुरू हुआ था और 1592 में बनकर सम्पन्न हुआ था।
  2. इस किले का निर्माण लाल व सफ़ेद संगमरमर के पत्थरों को मिलाकर किया गया है।
  3. यहां निकटस्थ चील के टीले नामक पहाड़ी पर बने अम्बिकेश्वर मन्दिर के कारण ही इसका नाम आमेरका किला पड़ा था।
  4. आमेर का कस्बा इस किले एवं महल का अभिन्न अंग है तथा इसका प्रवेशद्वार भी है।
  5. यह कस्बा 4 वर्ग कि.मी. (4,30,00,000 वर्ग फीट) के क्षेत्रफल में फ़ैला हुआ है और यहां 18 मन्दिर, 3 जैन मन्दिर और 2 मस्जिदें हैं।
  6. किले के परिसर में कछवाहा राजपूत राजघराने की कुल देवी शिला माता अथवा काली माता का एक मंदिर भी हैं।
  7. आमेर के किले में बना शीश-महल अपनी अद्भुत नक्काशी के लिए जाना जाता है, जिसके कारण इसे विश्व का सबसे बढ़िया काँच घर माना जाता है।
  8. इस महल को बनाने में लगभग 40 खम्बो का प्रयोग किया गया है। इसके अन्दर एक माचिस क़ी तीली जलाने से पूरा महल जगमगा उठता है।
  9. इस किले के भीतर एक डोली महल भी है, जिसका आकार डोली (पालकी) की तरह है, जिनमें प्राचीन काल में राजपूती महिलाएँ आया-जाया करती थीं।
  10. आमेर किले और जयगढ़ किले के मध्य में 2 किलोमीटर का एक ख़ुफ़िया रास्ता (गुप्त मार्ग) भी बना हुआ है, जिसके माध्यम से पर्यटक एक किले से दूसरे किले में जा सकते है।
  11. किले के अंदर 27 कचेहरी नामक एक इमारत भी है, जो यहाँ के दर्शनीय स्थलों में से एक है।
  12. इस किले के सामने माओटा नामक एक खूबसूरत झील भी है, जो इसकी शान में चार चाँद लगा देती है।
  13. पुरातत्त्वविज्ञान एवं संग्रहालय विभाग के अधीक्षक द्वारा दिए गए वार्षिक पर्यटन आंकड़ों के अनुसार इस किले को देखने प्रतिदिन करीब 5000 पर्यटक आते हैं। वर्ष 2007 के प्राप्त आंकड़ों के अनुसार उस साल 14 लाख सैलानी घुमने आये थे।
  14. इस किले को जून 2013 में यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल की सूची में शामिल किया गया था।
  15. महल के अंदर ही एक बाजार लगता है, जहाँ से आप हस्तशिल्प की वस्तुओं के आलावा, रंग-बिरंगे पत्थरों तथा मोतियों से बनी चीज़ों की खरीदारी कर सकते है।
  16. इस दुर्ग में बहुत सी बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग भी की गई है, जिनमे बाजीराव मस्तानी, मुगले आज़म, जोधा अकबर, शुद्ध देसी रोमांस, भूल भुलैया आदि शामिल है, इसके अलावा कुछ हॉलीवुड फ़िल्मों जैसे नार्थ वेस्ट फ़्रन्टियर, द बेस्ट एग्ज़ॉटिक मॅरिगोल्ड होटल आदि की शूटिंग भी यहां की गई है।
  17. इस किले का खुलने का समय सुबह 9 बजे से शाम 5:00 बजे तक है।
  18. इस किले में अन्दर जाने के लिए आम भारतीय नागरिको को 100 रूपए, विदेशी नागरिको को 500 रूपए प्रवेश शुल्क देना पड़ता है। इसके अलावा भारतीय छात्रों को 10 रूपए और विदेशी छात्रों को 100 रूपए प्रवेश शुल्क देना पड़ता है।
  Last update :  2022-08-03 11:44:49
  Post Views :  1588