पन्हाला किला संक्षिप्त जानकारी

स्थानकोल्हापुर, महाराष्ट्र (भारत)
निर्माण1178 ई. और 1489 ई.
निर्माताभोज II और आदिल शाह I
प्रकारसांस्कृतिक, किला

पन्हाला किला का संक्षिप्त विवरण

पन्हाला किला भारतीय राज्य महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले से लगभग 20 कि.मी. की दूरी पर पन्हाला नामक क्षेत्र में स्थित है। यह किला भारत के सबसे प्राचीन किलो में से एक है। इस किले ने कई प्रसिद्ध राजाओ और कई प्रसिद्ध साम्राज्यों को सुरक्षा प्रदान की है, जिनमे भोज II और आदिल शाह सम्मिलित है। यह किला भारतीय और मुगल संस्कृति, कलाकृति और नक्काशी के मिश्रण का उचित उदाहरण है।

पन्हाला किला का इतिहास

इस विश्व प्रसिद्ध किले का सर्वप्रथम निर्माण 12वीं शताब्दी में शिलाहरा के शासक भोज II ने करवाया था। वर्ष 1209 ई. से 1210 ई. के मध्य भोज II को एक युद्ध में देवगिरी के यादव राजा सिंघाना ने पराजित कर दिया था और उसके बाद इस किले पर यादवो ने नियंत्रण लागू करने की कोशिश की परंतु यह किला उनके हाथ न लग सका।

वर्ष 1489 ई. में बीजापुर के सुल्तान आदिल शाह ने इस किलो को अपने नियन्त्रण में लेकर इसको चारो तरफ़ से सुरक्षित करने काम किया था। शाही वंश के शासक अफजल खान की मौत के बाद छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस किले को बीजापुर से छीन लिया था, लेकिन आदिल शाह II ने उनसे यह किला वापस पाने लिए लगभग 5 महीनो तक युद्ध का आगाज किया, जिसके बाद कुछ ऐसी परिस्थिति आई की शिवाजी महाराज को वहाँ से भागना पड़ा था।

इस युद्ध में बाजी प्रभु देशपांडे और शिवा काशिद जैसे महान मराठा योद्धा आदिल शाह II के विरोध में युद्ध लड़ रहे थे, इस भयंकर लड़ाई में मराठा साम्राज्य की सेना को काफी बड़ा नुकसान झेलना पड़ा था क्यूंकि इस युद्ध में मराठा साम्राज्य ने बाजी प्रभु देशपांडे जैसे योद्धा को खो दिया था। इसके बाद यह किला आदिल शाह II ने फिर से अपने कब्जे में ले लिया था, वह इस किले का ज्यादा दिनों तक उपयोग नही कर पाया और वर्ष 1673 ई. में मराठा साम्राज्य के शासक शिवाजी महाराज ने इस किले को फिर से हासिल कर लिया।

पन्हाला किला के रोचक तथ्य

  1. इस किले को पन्हालगढ़, पहलल्ला आदि नामो से भी जाना जाता है, परंतु इस किले का सबसे प्रसिद्ध नाम पन्हाला किला है जिसका शाब्दिक अर्थ "सांपों का घर" होता है।
  2. यह किला भारत के महाराष्ट्र के कोल्हापुर से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में पन्हाला में स्थित है। यह रणनीतिक रूप से सह्याद्री पर्वत श्रृंखला में के पास ही स्थित है, जिसमे महाराष्ट्र का एक प्राचीन तटीय क्षेत्र बीजापुर सम्मिलित था।
  3. इस किले का सर्वप्रथम निर्माण वर्ष 1178 ई. में शिलाहरा के प्रसिद्ध शासक राजा भोज II ने करवाया था, जिसके बाद यह किला वर्ष 1489 में आदिल शाह I द्वारा पुन: निर्मित किया गया था।
  4. वर्ष 1659 में बीजापुर के शासक अफजल खान की मृत्यु के बाद इस किले को छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा अपने कब्जे में ले लिया गया था। इसके बाद वर्ष 1672 ई. में आदिल शाह II ने छत्रपति शिवाजी के खिलाफ एक युद्ध जीतकर इसे पुन प्राप्त किया था, जिसे 1673 ई. में मराठा साम्राज्य के शासक शिवाजी महाराज ने पुन: अपने कब्जे में ले लिया था।
  5. वर्ष 1678 ई. में जब शिवाजी महाराज इस किले में शासन कर रहे थे, तो उस समय किले में लगभग 15,000 घोड़े और 20,000 सेना थी।
  6. वर्ष 1693 ई. में प्रसिद्ध मुगल शासक औरंगजेब ने इस किले पर हमला कर दिया था, जिसके परिणाम स्वरूप यहाँ पर शासन कर रहे राजाराम को पन्हाला छोड़कर जिंजी किले पर इतनी जल्दी जाना पड़ा था, कि वह अपनी 14 साल की पत्नी ताराबाई को पन्हाला किले में ही छोड़ गये थे।
  7. वर्ष 1700 ई. में राजाराम की मृत्यु हो गयी थी जिसके बाद उनकी रानी ताराबाई ने सत्ता अपने हाथ में ली और अपने 12 वर्षीय बेटे शिवाजी II को राजा का प्रतिनिधि बनाकर पन्हाला किले पर शासन करने लगी थी।
  8. वर्ष 1708 ई. में ताराबाई को सातारा के शाहूजी से युद्ध लड़ना पड़ा जिसमे वह हार गई और उन्हें रत्नागिरी के मालवण में मजबूर होकर जाना पड़ा। वर्ष 1709 ई. में ताराबाई ने पन्हाला को फिर से जीत लिया और नए राज्य कोल्हापुर की स्थापना की और पन्हाला को राजधानी बना दिया, इन्होने वर्ष 1782 ई. तक यहाँ शासन किया था।
  9. वर्ष 1782 ई. में रानी की मृत्यु के बाद इस पन्हाला को राजधानी से बदलकर कोल्हापुर बना दिया गया, जिसे 1827 में शहाजी I के शासनकाल के दौरान अंग्रेजो को सौंप दिया गया था, जिसके बाद यह वर्ष 1947 तक उनके ही नियंत्रण में रहा था।
  10. यह किला दक्कन के सबसे बड़े और लोकप्रिय किलों में से एक है, जिसकी परिधि लगभग 14 कि.मी. के क्षेत्रफल में फैली हुई है और जिसमे लगभग 110 चौकसी के लिये स्थान बने हुये है।
  11. किले की लगभग 7 कि.मी. से अधिक की किलेबंदी के कारण इसका क्षेत्र त्रिकोण जैसा प्रतीत होता है।
  12. इस किले पर जब भी कोई दुश्मन हमला करता था तो वह इस किले के जल स्रोत को जहरीला बना देता था जिससे बचने के लिए आदिल शाह ने अंधाहर बावाडी का निर्माण करवाया जोकि एक 3 मंजिला संरचना है, जिसमे घुमावदार सीढ़ियों और सैनिकों को तैनात करने के लिए कक्ष बनाए गये थे।
  13. इस किले के नजदीक कलावंतीचा महल स्थित है जिसे नायकिनी सजजा भी कहा जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है "वेश्याओं के झज्जे का कमरा"। यह महल किले की सुरक्षा दीवार के पूर्वी तरफ खड़ा है, जो वर्ष 1886 तक खंडर बन चुका था।
  14. इस किले में 3 धान्यागार मौजूद है, जिसमे सबसे पहले अम्बरखाना धान्यागार है जिसमे 950 वर्ग मीटर का क्षेत्र शामिल है और यह 10.5 मीटर ऊंची है, दूसरे नम्बर पर धर्म कोठी धान्यागार है, जो लगभग 55 फीट से 48 फीट 35 फीट ऊंची थी और तीसरे नम्बर पर सजजा कोठी है जोकि 1500 ई. में आदिल शाह द्वारा बनवाई गई थी।
  15. इस किले की अन्य प्रमुख संरचनाओ में तीन दरवाजा, वाघ दरवाजा, राजदीन्दी बुर्ज, मंदिर और मकबरे सम्मिलित है।

  Last update :  Wed 3 Aug 2022
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