पुणे महाराष्ट्र के शनिवार वाड़ा का इतिहास तथा महत्वपूर्ण जानकारी

✅ Published on July 6th, 2018 in प्रसिद्ध आकर्षण, प्रसिद्ध स्थान

शनिवार वाड़ा, पुणे (महाराष्ट्र) के बारे में जानकारी: (Shaniwar Wada, Pune, Maharashtra GK in Hindi)

भारत कई महान योद्धाओं और लोगो की जन्म भूमि है, जिनमे मराठा साम्राज्य के संस्थापक वीर शिवाजी राव और पेशवा बाजीराव भी सम्मिलत है। मराठा साम्राज्य भारत के सबसे शक्तिशाली और विशाल साम्राज्यों में से एक था जिसने अपना विस्तार लगभग पूरे मध्य भारत में किया था। भारतीय राज्य महाराष्ट्र के पुणे में स्थति शनिवार वाड़ा अपने यहाँ के रहस्यों, इतिहास और कलाकृति के लिए संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है।

शनिवार वाड़ा का संक्षिप्त विवरण: (Quick Info about Shaniwar Wada)

स्थान पुणे, महाराष्ट्र (भारत)
निर्माणकाल 1730 ई.-1732 ई.
निर्माता पेशवा बाजीराव I
वास्तुकला मराठा शाही वास्तुकला
प्रकार सांस्कृतिक, किला

शनिवार वाड़ा का इतिहास: (Shaniwar Wada History in Hindi)

शनिवार वाडा मूल रूप से मराठा साम्राज्य के पेशवा बाजीराव की राजधानी वाली एक प्रमुख इमारत थी। इस प्रसिद्ध किले का निर्माण वर्ष 1732 ई. में करवाया गया था। प्रारंभ में इस किले को पूरी तरह से पत्थर से बनाया जाना था लेकिन इसका आधार बनाने के बाद इसे ईंट से बनाया जाने लगा था। इस महल से कई वीर मराठा योद्धाओं का इतिहास जुड़ा हुआ है जिसमे पेशवा बाजीराव I और पेशावर बाजराओ II आदि प्रमुख थे।

शनिवार वाड़ा के बारे में रोचक तथ्य: (Interesting Facts about Shaniwar Wada in Hindi)

  • इस प्रसिद्ध किले के निर्माण की नीव छत्रपति शाहू के प्रधान मंत्री पेशवा बाजी राव I द्वारा जनवरी, 1730 में रखी गई थी, जिसे 3 वर्षो बाद वर्ष 1732 में बनाकर तैयार कर दिया गया था।
  • इस भव्य किले का निर्माण ठेकेदार कुमाहार क्षत्रिय ने किया था, जब उन्होंने इसका निर्माण पूरा किया था तो बाद में उन्हें पेशवा द्वारा “नाइक” नाम दिया गया था।
  • यह किला लगभग 7 मंजिलो जितना ऊँचा है। इस किले का आधार पत्थरो से बनाया गया था परंतु पुरे किले का निर्माण ईंटो से किया गया है।
  • इस भव्य शनीवार वाडा किले को बनाने के लिए जुन्नार के जंगलों को बहुत मेहनत से साफ किया गया था और थोड़ी दूरी पर स्थित चिनचवाड़ के पास की खदानों से इसके निर्माण के लिए पत्थर लाए गए।
  • शनिवारवाड़ा 1732 में बने सबसे महंगे किलो में से एक था जिसके निर्माण में उस समय लगभग 16,110 रूपये की लागत आई थी।
  • शनिवारवाड़ा में कई छोटे और बड़े द्वार मौजूद है परंतु इसका सबसे मुख्य द्वार “दिल्ली गेट” है जो उत्तर की ओर दिल्ली की तरफ खुलता है।
  • इस महान किले में वर्ष 1758 तक कम से कम एक हजार लोग रहते थे, जिनमे पेशवा और उनका परिवार और दास-दासियों का संग्रह सम्मिलित है।
  • ऐसा माना जाता है की शनिवारवाड़ा से 17 कि.मी. की दूरी पर स्थित अलंदी ज्ञानेश्वर मंदिर का शिखर शनिवारवाड़ा की सबसे ऊपरी मंजिल से स्पष्ट दिखाई देता था।
  • यह किला मूल रूप से मराठा साम्राज्य के पेशवों की सात मंजिला ऊँची राजधानी वाली इमारत थी जिस पर वर्ष 1818 तक मराठा साम्राज्य के पेशवों का शासन रहा था।
  • वर्ष 1818 में इस किले पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने नियंत्रण स्थापित कर लिया था क्यूंकि पेशवा बाजीराव II ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सर जॉन मैल्कम को अपनी गद्दी सौंप कर खुद को बिथूर के राजनीतिक निर्वासन में लीन कर लिया था।
  • वर्ष 1828 में महल परिसर के अंदर बहुत बड़ी आग लग गई जो सात दिनों के तक लगातार जलती रही, जिससे इस भव्य महल को भारी नुकसान हुआ और जिसके बाद यह लगभग पूरी तरह से खंडहर में बदल गया।
  • इस किले के बारे स्थानीय लोगो द्वारा यह अफवाह फैलाई जाती है कि नारायणराव पेशवा की आत्मा अभी भी किले में वास करती है। नारायणराव पांचवें और सत्ताधारी पेशवा थे जिनकी हत्या किले में ही 1773 में उनके चाचा रघुनाथराव और चाची आनंदबी के आदेश पर की गई थी।
  • इस विश्व प्रसिद्ध किले को 2015 की एक ऐतिहासिक हिंदी फिल्म “बाजीराव मस्तानी” में दिखाया गया था।

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