लॉर्ड लुई माउंटबेटन का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

✅ Published on June 25th, 2019 in प्रसिद्ध व्यक्ति

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे लॉर्ड लुई माउंटबेटन (Lord Mountbatten) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए लॉर्ड लुई माउंटबेटन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Lord Mountbatten Biography and Interesting Facts in Hindi.

लॉर्ड लुई माउंटबेटन के बारे में संक्षिप्त जानकारी

नामलॉर्ड लुई माउंटबेटन (Lord Mountbatten)
वास्तविक नामलुई फ़्राँसिस एल्बर्ट विक्टर निकोलस
जन्म की तारीख25 जून 1900
जन्म स्थानफ़्रॉगमोर हाउस, विंडसर इंग्लैण्ड
निधन तिथि27 अगस्त 1979
उपलब्धि1947, 1948 - भारत के आखिरी वायसराय (20 फरवरी 1947) और स्वतंत्र भारतीय संघ के पहले गवर्नर-जनरल (1948)
पेशा / देशपुरुष / पूर्व वायसराय / इंग्लैण्ड

लॉर्ड लुई माउंटबेटन (Lord Mountbatten)

लॉर्ड लुई माउंटबेटन एक ब्रिटिश राजनीतिज्ञ और नौसैनिक अधिकारी थे। लॉर्ड माउंटबेटन का जन्म 25 जून, 1900 ई. में फ़्रॉगमोर हाउस, विंडसर इंग्लैण्ड में हिज सीरीन हाइनेस बैटनबर्ग के राजकुमार लुइस के रूप में हुआ था। लॉर्ड माउंटबेटन भारत के आखिरी वायसराय (1947) थे और स्वतंत्र भारतीय संघ के पहले गवर्नर-जनरल (1947-48) थे।

लॉर्ड लुई माउंटबेटन का जन्म

लॉर्ड माउंटबेटन का जन्म 25 जून, 1900 ई. में फ़्रॉगमोर हाउस, विंडसर इंग्लैण्ड में हिज सीरीन हाइनेस बैटनबर्ग के राजकुमार लुइस के रूप में हुआ था। इनका मूल नाम लुई फ़्राँसिस एल्बर्ट विक्टर निकोलस था। इनके पिता का नाम बैटनबर्ग लुइस और माता का नाम हेसे विक्टोरिया था। इनके पिता बैटनबर्ग के राजकुमार और इनकी माता भी बैटनबर्ग के राजकुमार थी। और इनकी इनके माता पिता की दूसरी संताने थे। ये परिवार में सबसे छोटे थे।

लॉर्ड लुई माउंटबेटन का निधन

लॉर्ड लुई माउंटबेटन जी मृत्यु 27 अगस्त, 1979 ई. में (उम्र 79) काउंटी सिल्गो, आयरलैंड प्रोविज़िनल जगह पर आइरिश रिपब्लिकन आर्मी के आतंकवादियों ने माउण्ट बेटेन की नौका में बम लगाकर उनकी हत्या कर दी थी।

लॉर्ड लुई माउंटबेटन की शिक्षा

1916 में रॉयल नेवी में प्रवेश करने से पहले माउंटबेटन ने रॉयल नेवल कॉलेज, ओसबोर्न में भाग लिया था। उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के समापन चरण युद्ध के बाद में क्राइस्ट कॉलेज, कैम्ब्रिज में भाग लिया। इंटरवार अवधि के दौरान, माउंटबेटन ने नौसेना संचार में विशेषज्ञता हासिल करते हुए अपने नौसैनिक कैरियर भाग लिया, और उसमें सफल भी हुए।

लॉर्ड लुई माउंटबेटन का करियर

लॉर्ड माउंटबेटन ने प्रथम विश्व युद्ध के समय शाही नौसेना में एक मिडशिपमैन के रूप में सेवा दी थी। सन 1922 में माउंटबेटन भारत के एक शाही दौरे पर प्रिंस ऑफ़ वेल्स एडवर्ड के साथ आये थे। अपनी यात्रा के दौरान ही वह अपनी होने वाली पत्नी एडविना से मिले और उन्होंने 18 जुलाई 1922 को शादी की। लॉर्ड लुइस माउंटबेटन को 1926 में एडमिरल सर रोजर कीज के कमान वाले भूमध्य बेड़े के सहायक फ्लीट वायरलेस और सिग्नल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। द्वितीय विश्वयुद्ध छिड़ने पर ध्वंसक कैली और पाँचवें ध्वंसक बेड़े की कमान में उन्हें 1941 ई. में एक विमानवाहक पोत का कमाण्डर नियुक्त किया गया। सन् 1934 में माउंटबेटन अपने पहले कमान पर नियुक्त किया गया। उनका जहाज एक नया विध्वंसक था जिसे एक पुराने जहाज के बदले सिंगापुर जाना था। वह उस पुराने जहाज को सफलतापूर्वक माल्टा में बंदरगाह में वापस लाये. 1936 तक माउंटबेटन को व्हाइटहॉल में नौसेना विभाग की एयर बेड़े की शाखा के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया। भारत के बाद, माउंटबेटन ने 1948–1950 तक भूमध्य बेड़े में एक क्रूजर स्क्वाड्रन के कमांडर के रूप में कार्य किया। उसके बाद वे नौवाहन विभाग में 1950-52 चौथे समुद्र रक्षक के रूप में कार्य करने गए और फिर तीन सालों तक भूमध्य सागर के बेड़े में कमांडर-इन-चीफ के रूप में कार्य करने के लिए भूमध्य सागर लौटे. माउंटबेटन ने 1955-59 तक नौवाहन विभाग में पहले समुद्र रक्षक के रूप में अपनी अंतिम पोस्टिंग में सेवा दी, उसी पोजीशन पर जहां करीब चालीस साल पहले उनके पिता नियुक्त थे। शाही नौसेना के इतिहास में यह पहलीबार था कि बाप और बेटे ने समान रैंक हासिल की थी। सन 1940 में लॉर्ड माउण्टबेटेन ने सेना के काम आने वाले एक छलावरण का अविष्कार किया, जिसका नाम ‘माउंटबेटन पिंक नेवल केमोफ्लाज पिगमेंट" था। 20 फरवरी 1947 में लॉर्ड लुइस माउंटबेटन को भारत का आखिरी वायसराय नियुक्‍त किया गया था। लॉर्ड माउण्टबेटेन सन 1959-65 ई. में यूनाइटेड किंगडम डिफ़ेन्स स्टाफ़ के प्रमुख एवं चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ कमिटी के अध्यक्ष बने।

पुरस्कार और सम्मान की सूची (List of Awards)

वर्षपुरस्कार और सम्मानपुरस्कार देने वाला देश एवं संस्था
1922ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ इसाबेल द कैथोलिक ऑफ स्पेनस्पेन
1924ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ द क्राउन ऑफ रोमानियारोमानिया
1937ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ रोमानियारोमानिया
1941वार क्रॉस (ग्रीस)ग्रीस
1943चीफ कमांडर ऑफ द लिजन ऑफ मैरिटसंयुक्त राज्य अमेरिका
1945स्पेशल ग्रैंड कार्डन ऑफ द ऑर्डर ऑफ द क्लाउड एंड बैनर ऑफ चाइनाचाइना
1945विशिष्ट सेवा मेडलसंयुक्त राज्य अमेरिका
1945एशियाई प्रशांत अभियान पदकसंयुक्त राज्य अमेरिका
1946ग्रैंड क्रॉस ऑफ़ द लिजन द"होनेरे ऑफ़ फ्रांसफ्रांस
1946क्रोइक्स डी गुएरेफ्रांस
1946ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ नेपालनेपाल
1946ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ व्हाइट एलिफेंट ऑफ़ थाईलैंडथाईलैंड
1946नाइट ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ जॉर्ज I ऑफ ग्रीसग्रीस
1948ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नीदरलैंड्स लायननीदरलैंड्स
1951ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ एविज ऑफ पुर्तगाल - GCAपुर्तगाल
1952नाइट ऑफ द रॉयल ऑर्डर ऑफ़ द सेरफिम ऑफ स्वीडनस्वीडन
1956ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ थिरी थुधम्मा (बर्मा)बर्मा
1962ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ द डान्नेब्रोग ऑफ डेनमार्क - SKDOडेनमार्क
1965ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ द सील ऑफ सोलोमोन ऑफ इथियोपियाइथियोपिया


नीचे दिए गए प्रश्न और उत्तर प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रख कर बनाए गए हैं। यह भाग हमें सुझाव देता है कि सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं। यह प्रश्नोत्तरी एसएससी (SSC), यूपीएससी (UPSC), रेलवे (Railway), बैंकिंग (Banking) तथा अन्य परीक्षाओं में भी लाभदायक है।

महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर (FAQs):

प्रश्न: लॉर्ड माउंटबेटन ने किस समय शाही नौसेना में एक मिडशिपमैन के रूप में सेवा की थी?
उत्तर: प्रथम विश्व युद्ध के समय
प्रश्न: 1922 में लॉर्ड माउंटबेटन भारत के एक शाही दौरे पर जिसके साथ आए थे उस व्यक्ति का नाम बताये?
उत्तर: प्रिंस ऑफ वेल्ड एडवर्ड
प्रश्न: लॉर्ड माउंटबेटन को कब विमानवाहक तोप का कमांडर नियुक्त किया गया था?
उत्तर: 1941 ई. में
प्रश्न: सन 1940 में 'माउंटबेटन पिंक नेवल केमोफ्लाज पिगमेंट' नामक छलावरण का अविष्कार किसने किया था?
उत्तर: लॉर्ड माउंटबेटन
प्रश्न: 1959 में यूनाइटेड किंगडम डिफेन्स स्टाफ के प्रमुख एवं चीफ़ ऑफ स्टाफ़ कमिटी के अध्यक्ष कौन बने थे?
उत्तर: लॉर्ड माउंटबेटन

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