डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे डॉ. मनमोहन सिंह (Dr Manmohan Singh) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Dr Manmohan Singh Biography and Interesting Facts in Hindi.

डॉ. मनमोहन सिंह का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान

नामडॉ. मनमोहन सिंह (Dr Manmohan Singh)
जन्म की तारीख26 सितंबर 1932
जन्म स्थानगाह, पंजाब
माता व पिता का नामअमृत कौर / गुरुमुख सिंह
उपलब्धि2004 - भारत के प्रथम सिख प्रधानमंत्री
पेशा / देशपुरुष / राजनीतिज्ञ / भारत

डॉ. मनमोहन सिंह (Dr Manmohan Singh)

डॉ. मनमोहन सिंह भारत के 13वें प्रधानमंत्री के रूप में प्रसिद्ध है। वह अपनी नम्रता, कर्मठता और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। वे एक अर्थशास्त्री भी हैं। डॉ. मनमोहन सिंह ने 2004 के आम चुनाव के बाद 22 मई 2004 को प्रधानमंत्री के रूप के शपथ ली और 22 मई 2009 को दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री बने। मनमोहन सिंह की पत्नी का नाम श्रीमती गुरशरण कौर है। मनमोहन सिंह और अमृत कौर की 3 बेटियां हैं।

डॉ मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितम्बर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रान्त के एक गाँव में हुआ था। इनके माता का नाम अमृत कौर और पिता का नाम गुरुमुख सिंह था| इन्होने अपनी माता का बचपन में ही खो दिया था माता की मृतु के बाद इनका लालन पालन इनकी दादी ने किया था जो एक गरीब परिवार से थी|
भारत देश के विभाजन के बाद मनमोहन सिंह का परिवार भारत चला आया। यहाँ पंजाब विश्वविद्यालय से उन्होंने स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई पूरी की। बाद में वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गये। जहाँ से उन्होंने पीएच. डी. की डिग्री हासिल की। तत्पश्चात् उन्होंने आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डी. फिल. भी किया। उनकी पुस्तक इंडियाज़ एक्सपोर्ट ट्रेंड्स एंड प्रोस्पेक्ट्स फॉर सेल्फ सस्टेंड ग्रोथ भारत की अन्तर्मुखी व्यापार नीति की पहली और सटीक आलोचना मानी जाती है।
डॉ. मनमोहन सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में शिक्षक के रूप में कार्य किया जो उनकी अकादमिक श्रेष्ठता दिखाता है। इसी बीच में कुछ वर्षों के लिए उन्होंने यूएनसीटीएडी सचिवालय के लिए भी कार्य किया। इसी के आधार पर उन्हें 1987 और 1990 में जिनेवा में दक्षिण आयोग के महासचिव के रूप में नियुक्ति किया गया। डॉ॰ सिंह ने अर्थशास्त्र के अध्यापक के तौर पर काफी ख्याति अर्जित की। वे पंजाब विश्वविद्यालय और बाद में प्रतिष्ठित दिल्ली स्कूल ऑफ इकनामिक्स में प्राध्यापक रहे। इसी बीच वे संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन सचिवालय में सलाहकार भी रहे और 1987 तथा 1990 में जेनेवा में साउथ कमीशन में सचिव भी रहे। प्रधानमन्त्री के आर्थिक सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष भी रहे हैं। साल 1971 में मनमोहन सिंह भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त किये गये थे। साल 1972 में वित्‍त मंत्रालय में मुख्‍य आर्थिक सलाहकार के रूप में उनकी नियुक्ति हुई। नमोहन सिंह 16 सितम्बर 1982 से 14 जनवरी 1985 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर पद पर भी कार्यरत रहे है। 1985 में राजीव गांधी के शासन काल में मनमोहन सिंह को भारतीय योजना आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था इसके अतिरिक्त उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और एशियाई विकास बैंक के लिये भी काफी महत्वपूर्ण काम किया है। साल 2002 में मनमोहन सिंह को सर्वश्रेष्ठ सांसद के सम्मान से सम्मानित किया गया था। मनमोहन सिंह ने 22 मई 2004 को देश के पहले सिख प्रधानमंत्री के रूप के शपथ ली। जिसके बाद वे भारत के पहले ऐसे व्यक्ति बन गए जिन्होंमे भारत सरकार के लिए गवर्नर और प्रधानमंत्री के पद पर कार्य किया। लोकसभा चुनाव 2009 में मिली जीत के बाद मनमोहन सिंह जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने, जिनको 5 सालों का कार्यकाल सफलता पूर्वक पूरा करने के बाद लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिला। इसके अतिरिक्त उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और एशियाई विकास बैंक के लिये भी काफी महत्वपूर्ण काम किया है।
डॉ. मनमोहन को मार्च 1983 में, पंजाब यूनिवर्सिटी ने उन्हें डॉक्टर ऑफ लेटर्स से सम्मानित किया गया 1997 में, अल्बर्टा विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद डॉक्टर ऑफ लॉ की डिग्री से सम्मानित किया। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने उन्हें जुलाई 2005 में डॉक्टर ऑफ सिविल लॉ की मानद उपाधि से सम्मानित किया, और अक्टूबर 2006 में, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने भी उसी सम्मान के साथ पालन किया। डॉ. मनमोहन सिंह छात्रवृत्ति के बाद सेंट जॉन्स कॉलेज ने उन्हें पीएचडी छात्रवृत्ति का नाम देकर सम्मानित किया। 2008 में, उन्हें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया या और बाद में उसी वर्ष उन्हें मद्रास विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। 2010 में, उन्हें राजा सऊद विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था 2013 में, उन्हें मास्को स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था। 2017 में शांति, निरस्त्रीकरण और विकास के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

📅 Last update : 2021-09-26 00:30:28

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