इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए सुनीता विलियम्स से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Sunita Williams Biography and Interesting Facts in Hindi.

सुनीता विलियम्स का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान

नामसुनीता विलियम्स (Sunita Williams)
जन्म की तारीख19 सितम्बर 1965
जन्म स्थानओहियो, अमेरिका
माता व पिता का नामबॉनी जालोकर पांड्या / दीपक पाण्डया
उपलब्धि2006 - अंतरिक्ष में सर्वाधिक समय व्यतीत करने वाली प्रथम भारतीय मूल की महिला
पेशा / देशमहिला / अंतरिक्ष यात्री / संयुक्त राज्य अमेरिका

सुनीता विलियम्स (Sunita Williams)

सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितम्बर 1965 में हुआ था। सुनीता लिन पांड्या विलियम का जन्म अमेरिका के ओहियो राज्य में युक्लिड (स्थित क्लीवलैंड) नगर में हुआ था। वह अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के माध्यम से अंतरिक्ष जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला है। यह भारत के गुजरात के अहमदाबाद से ताल्लुक रखती है। इन्होंने एक महिला अंतरिक्ष यात्री के रूप में 195 दिनों तक अंतरिक्ष में रहने का विश्व किर्तिमान स्थापित किया है। उनके पिता दीपक पाण्डया अमेरिका में एक डॉक्टर हैं।

सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितम्बर 1965 को अमेरिका के ओहियो राज्य में यूक्लिड नगर (स्थित क्लीवलैंड) में हुआ था। इनका पूरा नाम सुनीता लिन पांड्या विलियम्स है। इनके पिता का नाम डॉ॰ दीपक एन. पांड्या और माता का नाम उर्सुलीन बोनी पांड्या है। इनके पिता अमेरिका में एक डॉक्टर है। ये अपने माता पिता की तीन संतानों में से सबसे छोटी है इनके बड़े भाई का नाम जय थॉमस पांड्या और बड़ी बहन का नाम डायना एन, पांड्या है।
सुनीता विलियम्स ने 1983 में मैसाचुसेट्स के नीडम हाई स्कूल से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने 1987 में संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना अकादमी से भौतिक विज्ञान में विज्ञान स्नातक की डिग्री प्राप्त की और 1995 में फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग प्रबंधन में विज्ञान की डिग्री प्राप्त की।
जून 1998 में उनका अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा में चयन हुआ और प्रशिक्षण शुरू हुआ। सुनीता विलियम्स भारत के गुजरात के अहमदाबाद से ताल्लुक रखती है। इन्होंने एक महिला अंतरिक्ष यात्री के रूप में 195 दिनों तक अंतरिक्ष में रहने का विश्व किर्तिमान स्थापित किया है। सुनीता विलियम्स ने सितंबर-अक्टूबर 2007 में भारत का दौरा भी किया। जुलाई 2015 में, नासा ने विलियम्स को अमेरिका के वाणिज्यिक अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पहले अंतरिक्ष यात्रियों में से एक घोषित किया। इसके बाद, उसने बोइंग और स्पेसएक्स के साथ अपने वाणिज्यिक चालक दल के वाहनों में प्रशिक्षित करने के लिए, अन्य चुने हुए अंतरिक्ष यात्रियों के साथ काम करना शुरू कर दिया है। अगस्त 2018 में उसे बोइंग CST-100 स्टारलाइनर के अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए पहली मिशन उड़ान, CTS-1 को सौंपा गया था। अगस्त 2012 तक, विलियम्स ने 50 घंटे और 40 मिनट में कुल सात स्पेसवॉक किए, विलियम्स को सबसे अनुभवी स्पेसवॉकरों की सूची में नौवें स्थान पर हैं। 30 अगस्त, 2012 को, विलियम्स और जेएक्सए अंतरिक्ष यात्री होशाइड ने यूएस ईवा -18 का संचालन करने के लिए आईएसएस के बाहर उद्यम किया। उन्होंने फेलिंग मेन बस स्विचिंग यूनिट -1 (MBSU-1) को हटा दिया, और दबावयुक्त संभोग एडेप्टर -2 (PMA-2) पर एक थर्मल कवर स्थापित किया। मई 2020 में, विलियम्स ने संयुक्त राज्य में 500,000 से अधिक भारतीय और अन्य अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को संबोधित किया, 2020 के COVID-19 महामारी के दौरान स्टूडेंट हब ऑफ़ इंडिया, वाशिंगटन, डीसी द्वारा आयोजित एक आभासी साक्षात्कार में।
सुनीता विलियम्स को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है जिसमे "नेवी कमेंडेशन मेडल", "नेवी और मरीन कॉर्प्स अचीवमेंट मेडल", "मानवीय सेवा पदक" और नासा स्पेसफ्लाइट मेडल" सम्मिलित हैं इसके अतिरिक्त उन्हें वर्ष 2011 में रशिया की सरकार द्वारा "अंतरिक्ष अन्वेषण में योग्यता के लिए", पदक दिया गया है। 25 जून 2008 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। 2013 में भारत की गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इसी वर्ष 20 मई 2013 को गोल्डन ऑर्डर ऑफ मेरिट्स से भी सम्मानित किया गया। उन्हें ‘सरदार वल्लभभाई पटेल विश्व प्रतिभा अवार्ड" से सम्मानित किया और वह पहली ऐसी महिला बनी, जिन्होंने विदेश में रहते हुए यह पुरस्कार हासिल किया।

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