ग्वालियर मध्य प्रदेश के जय विलास पैलेस का इतिहास तथा महत्वपूर्ण जानकारी

✅ Published on July 18th, 2019 in प्रसिद्ध आकर्षण, प्रसिद्ध महल

जय विलास पैलेस के बारे में जानकारी (Information About Jai Vilas Palace):

जय विलास पैलेस भारत के मध्य प्रदेश राज्य के ग्वालियर शहर में स्थित है। इसका निर्माण जयाजी राव सिंधिया द्वारा कराया गया था और वर्तमान में भी उनके वंशज पूर्वी शाही मराठा सिंधिया राजवंश का यह निवास स्थान है। यह पैलेस ग्वालियर के सभी पर्यटक स्थानों से अधिक सुंदर और मराठा वंश की उत्क्रष्ट शैली को संभोधित करता है।

जय विलास पैलेस का संक्षिप्त विवरण (Quick Info About Jai Vilas Palace):

स्थान ग्वालियर शहर, मध्य प्रदेश (भारत)
निर्माता जयाजी राव सिंधिया
निर्माण 1874 ई॰
निर्माणकर्ता सर माइकल फिलोस
निर्माण लागत 1 करोड़ रुपए

जय विलास पैलेस का इतिहास (History of Jai Vilas Palace):

मध्य प्रदेश राज्य में स्थित सिंधिया राजवंश का जय विलास पैलेस वर्तमान में भी अपनी भव्यता के लिए जाना है। इसका निर्माण सिंधिया वंश के राजा जयाजी राव सिंधिया 1874 ई॰ में करवाया था और इस महल का निर्माण नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित सर माइकल फिलोसे ने किया था। वर्तमान में महल यूरोपीय वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है।

जय विलास पैलेस के बारे में रोचक तथ्य (Interesting facts about Jai Vilas Palace):

  1. जय विलास महल का क्षेत्रफल 12,40,771 वर्ग फीट है।
  2. इस महल में कुल 400 कमरे है जिसमें 40 कमरे म्यूजियम के तौर पर रखे गए हैं और इसमे एक बड़ा एक दरबार हॉल भी है जिसके लिए यह प्रसिद्ध है।
  3. पैलेस के दरबार हॉल के अंदरूनी हिस्से को गिल्ट और सोने के सामान से सजाया गया है और एक विशाल कालीन और विशालकाय झाड़ से सजाया गया है। यह 100 फीट लंबा, 50 फीट चौड़ा और 41 फीट ऊंचा है
  4. जयविलास पैलेस का एक विंग स्वर्गीय राजमाता श्रीमंत विजयाराजे सिंधिया द्वारा श्रीमंत जीवाजी राव सिंधिया की स्मृति में एक संग्रहालय में परिवर्तित किया गया था। तब भारत के राष्ट्रपति डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 12 दिसंबर 1964 ई॰ में महाराजा सर जीवाजीराव सिंधिया संग्रहालय को जनता के लिए खोला गया।
  5. पैलेस के संग्रहालय में फर्नीचर की विविधता का एक बड़ा संग्रह है, अर्थात फ्रेंच, अंग्रेजी, मालाबार, ओरिएंटल और क्रिस्टल। ये भी भारत में सिंधियों के संरक्षण में बने थे। जयाजी राव सिंधिया यात्रा के शौकीन थे, और पश्चिमी देशों की अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए और जय विलास महल के लिए विभिन्न प्रकार के फर्नीचर और कलाकृतियाँ एकत्र कीं, जिनमें से कुछ को संग्रहालय में देखा जा सकता है।
  6. जयाजी राव सिंधिया को हमेशा महंगी वस्तुओं को रखने का शोक था। इसलिए चांदी की छोटी गाड़ी, चांदी का रथ, शाही पालकी, खुले पालकी, उपहार में लदी गाड़ियां, शिकारगाह और आधुनिक वाहन कुछ मुख्य संग्रह हैं जिन्हे संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है।
  7. सिंधिया वंश के राजा मान सिंह तोमर कला के महान संरक्षक थे, इसलिए संग्रहालय में पूर्वोक्त विद्यालय और ग्वालियर में निर्मित मराठा शैली के चित्र रखे हुए हैं। पश्चिमी कला तेल चित्रों में, टोंडोस और 3-डी पेंटिंग भी मूल्यवान हैं जिन्हें शाही परिवार द्वारा समय-समय पर एकत्र किया गया था।
  8. पैलेस के संग्रहालय में नेपोलियन और टीपू सुल्तान के लिथोग्राफ, सिंधियों के कुछ दुर्लभ संग्रह हैं जो प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अलावा, शाही परिवार द्वारा एकत्र किए गए पश्चिमी कलाकृतियों के मूल्यवान पेटेंट-रंग-प्रिंट, उनके संग्रह को समृद्ध बनाते हैं। ये सभी पैलेस के संग्रहालय में प्रदर्शित किए गए हैं।
  9. पैलेस में दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 20वीं शताब्दी तक की मूर्तियां संग्रहालय में रखी गई हैं। ग्वालियर किले से सैंडस्टोन की मूर्तियां हासिल की गईं जो तोमरों की थीं। इसके अलावा, संगमरमर की कुछ मूर्तियां शाही परिवार द्वारा एकत्र की गई उत्कृष्ट कृतियों के पेटेंट प्रतिकृतियां संग्रह की सुंदरता बनाती हैं।
  10. पैलेस की सबसे बड़ी विशेषता दरबार हॉल है। जिसमें एक बैंक्वेट हॉल शामिल है। दरबार हॉल में सिल्वर टॉय ट्रेन, टाट-पैट भजन हॉल, बिलियर्ड्स रूम और एक विशाल कारपेट के साथ एक विशेष गोल्ड-गिल्ट दरबार हॉल और विशाल झूमर की एक जोड़ी है। जय विलास का यह दरबार हॉल विश्व प्रसिद्ध है।
  11. जयविलस पैलेस का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन ग्वालियर एनजी रेलवे स्टेशन है।

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