पुरानी दिल्ली के सलीमगढ़ किला का इतिहास तथा महत्वपूर्ण जानकारी

✅ Published on August 4th, 2018 in प्रसिद्ध आकर्षण, प्रसिद्ध किले

सलीमगढ़ किला, पुरानी दिल्ली के बारे में जानकारी: (Information about Salimgarh Fort, Delhi in Hindi)

विश्व के सबसे विशाल प्रसाशनिक नगरो में से एक दिल्ली एशिया महाद्वीप के भारत देश में स्थित है। दिल्ली का इतिहास काफी पुराना और रोचक है, यह न केवल अपनी ऐतिहासिक स्थलों के लिए जानी जाती है अपितु यह अपने यहाँ की राजनीतिक, व्यापारिक गतिविधियों और रोचक व मनमोहक पार्को के लिए भी जानी जाती है। पुरानी दिल्ली में स्थित सलीमगढ़ किला का काफी पुराना होने के साथ-साथ काफी रोचक व अद्भुत भी है इसलिए यूनेस्को द्वारा इस किलो विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किया गया है।

सलीमगढ़ किले का संक्षिप्त विवरण: (Quick info about Salimgarh Fort, Delhi)

स्थान दिल्ली, नई दिल्ली (भारत)
निर्माण 1546 ई.
निर्माता सुर राजवंश के इस्लाम शाह सूरी
प्रकार किला

सलीमगढ़ किले का इतिहास: (Salimgarh Fort, Delhi History in Hindi)

इस विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक और अद्भुत किले का निर्माण दिल्ली में स्थापित सूरी रजवंश के शासक इस्लाम शाह सूरी द्वारा वर्ष 1546 ई. में करवाया था। इस्लाम शाह सूरी, सूरी राजवंश के सबसे प्रसिद्ध शासक शेर सूरी के पुत्र थे। शेर शाह सूरी ने ही वर्ष 1532 ई. में सूरी राजवंश की स्थापना की थी और कुछ समय बाद ही वर्ष 1540 ई. में दिल्ली में चल रहे मुगल सम्राट हुमांयू को बिल्ग्राम की लड़ाई में हराकर दिल्ली में अपनी सल्तनत स्थापित कर दी थी। सूरी राजवंश का शासन दिल्ली में लगभग 17 साल तक चला और वर्ष 1556 ई. में हुमांयू के भारत लौटने के बाद उन्होंने आदिल शाह सूरी को एक युद्ध में हराने के बाद सूरी राजवंश का नामोनिशान मिटाकर दिल्ली में मुगल साम्राज्य की पुन:स्थापना की थी।

सलीमगढ़ किले के बारे में रोचक तथ्य: (Interesting facts about Salimgarh Fort, Delhi in Hindi)

  • इस लोकिप्रिय किले का निर्माण वर्ष 1546 ई. सूरी राजवंश के संस्थापक और प्रसिद्ध शासक शेर शाह सूरी के पुत्र इस्लाम शाह सूरी ने यमुना नदी के किनारे करवाया था।
  • यह किला यमुना नदी के किनारे अरावली पर्वत के उत्तरी-पूर्वी मैदानी क्षेत्र में लगभग 24-34 मीटर की ऊंचाई पर बनाया गया था।
  • यह किला भारत के सबसे विस्तृत किलो में से एक है जो लगभग 40 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में फैला हुआ और लगभग 5 फीट ऊँचा है।
  • यह किला त्रिकोणीय आकार में बनाया गया था जिसकी मोटी दीवारे पत्थर के टुकड़ों को जोडकर बनाई गई थी, इस किले में एक गोलाकार बुर्ज भी बनाए गये थे।
  • वर्ष 1622 ई. में प्रसिद्ध मुगल सम्राट जहाँगीर ने इस किले को यमुना के दूसरी और के क्षेत्रो से जोड़ने के लिए एक पुल बनाया था जोकि ब्रिटिश शासनकाल के दौरान रेलवे लाइन को बनाने के लिए अंग्रेजो तोड़ दिया गया।
  • दिल्ली में स्थित लाल किले का एक अष्टकोणीय संरचना है जिसका निर्माण वर्ष 1639 ई. से 1648 ई. के मध्य मुगल सम्राट शाहजहां ने करवाया था जिसके कुछ समय बाद ही वर्ष 1658 में अपने ही पुत्र औरंगजेब द्वारा आगरा के किले में केद कर लिया गया था जिसके बाद लाल किले को सलीमगढ़ किले के साथ जोड़ने का काम औरंगजेब ने अपने शासनकाल (1658-1707) के दौरान किया था।
  • वर्ष 1857 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान तत्कालीन मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर II ने स्वतंत्रता सेनानियों के साथ इस किले में गुप्त बैठक की थी और यंही से 1857 की क्रांति का नेतृत्व भी किया था जिसे बाद वर्ष 1858 में ब्रिटिशो ने उन्हें गुन्हेगार करार देते हुये हुमायूं मकबरे में कैदी बना लिया गया था।
  • इस किले को लाल किले के पूर्व से जोड़ने के लिए एक मेहराब वाले पुल का निर्माण बहादुर शाह जफर II द्वारा उनके शासनकाल (1775-1862) में किया गया था जिस कारण इस पुल को बहादुर शाह गेट के नाम से भी जाना जाता है।
  • इस किले का जेल के रूप में उपयोग सर्वप्रथम औरंगजेब द्वारा अपने शासन काल (1658-1707) में किया गया था, जिसने अपने बड़े भाई दारा सिकोह और अपनी बेटी ज़ेब-उन-निसा को इस में कैद कर लिया था, जिसकी मृत्यु मात्र 21वर्ष की आयु में ही हो गई थी।
  • वर्ष 1858 ई. के बाद इस किले को कैदखाने के रूप में ब्रिटिशो द्वारा उपयोग किया जाने लगा था, जिसमे उन्होंने 1857 की क्रांति के प्रमुख दोषियों और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर II को यहाँ कुछ समय के लिए कैदी बनाकर रखा था जिन्हें बाद में काला पानी की सजा सुनाकर रंगून भेज दिया गया था।
  • इस किले को वर्ष 1942 में बनी आज़ाद हिन्द फ़ौज (आई.एन.ए.) ने अपने कैदियों को रखने के लिए जेल में परिवर्तित कर दिया था बाद में वर्ष 1945 में आज़ाद हिन्द फ़ौज को भारतीय राष्ट्रीय सेना (आई.एन.ए.) में परिवर्तित कर दिया गया जिसने इसका उपयोग कैदियों को पकड़ने और दंड देने के लिए किया।
  • इस किले को इसके इतिहास, सुंदर कलाकृतियों और मनमोहक दृश्यों के कारण वर्ष 2007 में यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल घोषित कर दिया गया था।
  • भारत में 2010 में आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी बड़े जोर-शोर से की जा रही थी जिस कारण दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों को भी पुन:निर्मित किया जा रहा था, इस किले को भी पुन:निर्मित किया गया जिसमे लगभग 160,000 डॉलर की लागत आई थी।

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