रज़िया सुल्तान का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

✅ Published on October 14th, 2021 in प्रसिद्ध व्यक्ति, शासक

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे रज़िया सुल्तान (Razia Sultan) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए रज़िया सुल्तान से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Razia Sultan Biography and Interesting Facts in Hindi.

रज़िया सुल्तान का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान

नामरज़िया सुल्तान (Razia Sultan)
वास्तविक नामजलॉलात उद-दिन रज़ियॉ
जन्म की तारीख 1205
जन्म स्थानबूदोन, भारत
निधन तिथि14 अक्टूबर 1240
माता व पिता का नामतुर्कान खातुन / शम्स-उद-दिन इल्तुतमिश
उपलब्धि1236 - दिल्ली की प्रथम महिला सुल्तान (शासिका)
पेशा / देशमहिला / शासिका / भारत

रज़िया सुल्तान (Razia Sultan)

रजिया सुल्तान भारत की पहली शासिका थी। उसने लगभग 5 वर्षों तक दिल्ली की सल्तनत को संभाला था। रज़िया ने 1236 से 1240 तक दिल्ली सल्तनत पर शासन किया। भारतीय इतिहास में उनके नाम का महत्व इसलिए है नहीं कि वह एक महिला थी, बल्कि इसलिए है क्योकि वह किसी बड़े घराने से नहीं थी। उनके पिता इल्तुतमिश दिल्ली में कुतुबुद्दीन ऐबक के यहाँ सेवक के रूप में काम करते थे बाद में उन्हें प्रांतीय गवर्नर का पद दिया गया था।

रज़िया का जन्म दिल्ली के सुल्तान शम्सुद्दीन इल्तुतमिश, उनके पूर्ववर्ती कुतुब अल-दीन ऐबक के एक तुर्क गुलाम (ममलुक) के यहाँ हुआ था। रज़िया की माँ - तुर्कान खातुन (उर्फ कुतुब बेगम) - कुतुब अल-दीन ऐबक की एक बेटी और इल्तुतमिश की मुख्य पत्नी थी। रजिया इल्तुतमिश की सबसे बड़ी बेटी थी, और शायद उसका पहला जन्म लेने वाला बच्चा था।
रज़िया सुल्तान और मल्लिक अल्तुनिया के बीच युद्ध हुआ जिसमें याकुत (जमात-उद-दिन-याकुत एक ग़ुलाम था) मारा गया, जिसके बाद रज़िया को बंदी बना लिया गया। मरने के डर से रज़िया ने अल्तुनिया से शादी करने के लिए तैयार हो गयी। और मौके का फायदा उठाकर इस बीच, रज़िया के भाई, मैज़ुद्दीन बेहराम शाह, ने सिंहासन हथिया लिया। अपनी सल्तनत की वापसी के लिये रज़िया और उसके पति, अल्तुनिया ने बेहराम शाह से युद्ध किया, जिसमें उनकी हार हुई। अंततः उन्हें दिल्ली छोड़कर भागना पड़ा और अगले दिन वो कैथल पंहुचे, जहां उनकी सेना ने साथ छोड़ दिया। वहां डाकुओं के द्वारा 14 अक्टूबर 1240 को दोनों मारे गये। बाद में बेहराम को भी अयोग्यता के कारण गद्दी से हटना पड़ा।

रजिया ने मात्र 13 वर्ष की आयु में ही तलवारबाजी और घुड़सवारी में माहिर हो गयी थी और अपने पिता के साथ युद्ध के मैदान में जाने लगी थी। जब उनके पिता इल्तुतमिश की मौत हो गयी थी, तब उसके एक पुत्र रुक्नुदीन फिरुज ने रजिया से सत्ता हथिया ली थी। उसने 7 महीनों तक दिल्ली पर राज किया, लेकिन इल्तुतमिश की बहादुर बेटी ने 1236 में जनता के सहयोग से अपने भाई को हराकर फिर से सत्ता वापस हासिल कर ली थी।

सिंहासन पर बैठने के बाद रज़िया ने अपने परम्पराओ के विपक्ष जाकर पुरुष सैनिको को कोट एवं पगड़ी पहनना अनिवार्य कर दिया। उन्होंने अपने राज्य में कई स्कूल और मंदिर बनवाये। उनके राज्य में सभी धर्म के लोग एक साथ रहते थे। हिन्दुओ के द्वारा किये गए कार्य व अविष्कार भी उन विध्यालयो में पढाये जाते थे। भटिंडा के गर्वनर मालिक इख्तिअर अल्तुनिया ने रजिया के प्रेमी याकूत की हत्या करवा दी थी और रजिया को जेल में डाल दिया गया। जब जेल में रज़िया सुल्तान रजिया विद्रोह से निकलने का प्रयास कर रही थी उस दौरान कुछ तुर्कीयो ने दिल्ली पर आक्रमण कर उसे गद्दी से हटवा दिया।

अब रजिया के भाई बेहराम को सुल्तान घोषित कर दिया गया। अपने राज्य को बचाने के लिए रजिया ने धैर्य से काम लेते हुए भटिंडा के गर्वनर अल्तुनिया से विवाह करने का निश्चय कर लिया और अपने पति के साथ दिल्ली की तरफ कूच करने लगी। 13 अक्टूबर 1240 को बेहराम ने रजिया सुल्तान को हरा दिया और अगले ही दिन रजिया सुल्तान और उसके पति अल्तुमिया को दिल्ली की तरफ भागते वक़्त कुछ लुटेरो ने हत्या कर दी थी।


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