1857 की क्रांति के प्रमुख कारण, परिणाम एवं प्रमुख नायक नेता

✅ Published on May 13th, 2019 in इतिहास

1857 की क्रांति (प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम) से संबंधित जानकारी:

लॉर्ड कैनिंग के गवर्नर-जनरल के रूप में शासन करने के दौरान ही 1857 ई. की महान क्रान्ति हुई। 1857 की क्रांति की शुरुआत 10 मई, 1857 ई. को मेरठ से हुई थी, जो धीरे-धीरे कानपुर, बरेली, झांसी, दिल्ली, अवध आदि स्थानों पर फैल गया। इस क्रान्ति की शुरुआत तो एक सैन्य विद्रोह के रूप में हुई, परन्तु कालान्तर में उसका स्वरूप बदल कर ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध एक जनव्यापी विद्रोह के रूप में हो गया, जिसे भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम कहा गया। 1857 ई. की इस महान क्रान्ति के स्वरूप को लेकर विद्धान एक मत नहीं है। इस बारे में विद्वानों ने अपने अलग-अलग मत प्रतिपादित किये हैं, जो इस प्रकार हैं-‘सिपाही विद्रोह’, ‘स्वतन्त्रता संग्राम’, ‘सामन्तवादी प्रतिक्रिया’, ‘जनक्रान्ति’, ‘राष्ट्रीय विद्रोह’, ‘मुस्लिम षडयंत्र’, ‘ईसाई धर्म के विरुद्ध एक धर्म युद्ध’ और ‘सभ्यता एवं बर्बरता का संघर्ष’ आदि।

1857 की क्रांति के राजनीतिक कारण

  • लॉर्ड वैलेजली सहायक संधि- वर्ष 1798 ई॰ में भारत के तत्कालिक गवर्नर-जनरल लॉर्ड वैलेजली ने भारत के सभी राज्यों के साथ सहायक संधि की थी, जिसके तहत 1. सभी सहयोगी राजाओं के भूक्षेत्र पर ब्रिटिश सैन्य टुकड़ियाँ तैनात रहेंगी, उन सैन्य टुकड़ियों के रख-रखाव का खर्चा राजा ही उठाएगा 3. राजा के दरबार में एक ब्रिटिश रेजीडेंट नियुक्त किया जाएगा जो प्रत्येक खबर गवर्नर-जनरल को भेजेगा और 5 राजा किसी और शासक के साथ न तो कोई संधि करेगा और न ही ब्रिटिश संधि को तोड़ेगा। इन सभी बातों को शासको पर जबर्दस्ती थोपा गया था, जिस कारण उनके मन में एक व्यापक आक्रोश का जन्म होने लगा।
  • लॉर्ड डलहौजी की लैप्स की नीति- वर्ष 1848 में और तत्कालिक गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौजी ने एक ऐसा कानून बनाया जिसके तहत अगर किसी भारतीय शासक का कोई उत्तराधिकारी नहीं है तो उस राज्य का शासन भविष्य में ब्रिटिश सरकार ही करेगी। इस कानून को हड़प का कानून कहा जाने लगा विभिन्न शासक इस कानून पर अपना क्रोध दिखाने लगे थे, और इस क्रोध को और अधिक हवा 1857 के दौरान मिली।
  • झांसी के उत्तराधिकारी पर रोक और नाना साहब की पेंशन बंद- जब झाँसी के नरेश गंगाधर राओ का देहांत हो गया तो रानी लक्ष्मीबाई ने एक दत्तक पुत्र को उत्तराधिकारी बनाने की इच्छा जाहीर की परंतु ब्रिटिश सरकार ने उन्हे इसकी अनुमति नहीं दी और झांसी पर अपना शासन चालू कर दिया इससे झाँसी की रानी और लोगो में ब्रिटिश सरकार के प्रति गुस्सा बढ़ने लगा। नाना साहब पेशवा बाजीराओ द्वितीय के दत्तक पुत्र थे। पेशवा की मृत्यु के बाद मराठा साम्राज्य का स्थान भी ब्रिटिश साम्राज्य ने ले लिया और नाना साहब को मिलने वाली पेंशन भी रुकवा दी, जिस कारण कानपुर के लोगो ने ब्रिटिश सरकरर का विरोध करना शुरू कर दिया।
  • सतारा और नागपुर पर ब्रिटिश का कब्जा- वर्ष 1848 में सतारा के शासक शाहजी की मृत्यु के बाद सतारा पर भी ब्रिटिश साम्राज्य ने लैप्स कानून के तहत अपना कब्जा जमा लिया जिस कारण सतारा के सैनिकों में ब्रिटिश सरकार के प्रति गुस्सा जन्म लेने लगा। इसके तुरंत बाद नागपूर के साथ भी ब्रिटिश सरकार ने वही किया जोकि सतारा के साथ किया गया था। दोनों ही क्षेत्रो के सैनिको और किसानो के मन में ब्रिटिश सरकार को लेकर नकारात्मक विचार उत्पन्न होने लगे थे।
  • जमींदारो तथा किसानों से उनकी जमीन छिनना- ब्रिटिश सरकार ने भारत के अलग-अलग प्रांत अधिक से अधिक कर लगा रखा था और कुछ महत्वपूर्ण कानून बना रखे थे। जब कोई किसान और जमींदार उनकी शर्तो को पूरा नहीं कर पता था तब वह उसकी जमीन और संपत्ति पर अपना कब्जा कर लेते थे। इस कारण किसान और जमींदार दोनों के मन में व्यापक आक्रोश उत्पन्न हुआ।

1857 की क्रांति के आर्थिक कारण

  • भारतीय कारीगरों से उनकी रोजी-रोटी छिनना- इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के कारण मशीनों से बने उत्पाद अत्यंत सस्ते दामो में भारत में बिकने लगे थे जिस कारण भारतीय कारीगरों के रोजगार के साधन छीनने लगे थे और ऊपर से ब्रिटिश सरकार ने उनके ऊपर अधिक कर भी लगा रखा था जिस कारण उन कारीगरों के मन मे असंतोष की भावना ने जन्म लेना शुरू कर दिया था।
  • अंग्रेज़ो की व्यापारिक नीति-अंग्रेज़ो की व्यापारिक नीति के कारण भारत के सभी भारतीयों के व्यापार ठप्प पड़ गए थे। भारतीय उत्पादो को विदेशों में भेजने के लिए अत्यधिक शुल्क देना पड़ता था, जिसमे मुनाफे के स्थान पर घाटा होने की संभावना अधिक होती थी और भारतीय उत्पादो को भारत में कोई खरीदने को तैयार नहीं था क्यूंकी इनकी कीमत इंग्लैंड के उत्पादो से अधिक होती थी जिस कारण भारतीय व्यापार लगभग समाप्त हो गया और भारतीय व्यापारियों के मन में गुस्सा बढ़ने लगा।
  • ब्रिटिश साम्राज्य की स्थायी बंदोबस्त की नीति और अत्यधिक कर-ब्रिटिश सरकार ने स्थायी बंदोबस्त की नीति के तहत भारत के जमींदारो को जमीन का मालिक बना दिया था। जिस जमींदार एक निश्चित मात्र में कर को सरकारी खजाने में जमा करा देते थे और किसानो से अधिक से अधिक मात्र में कर वसूल लेते थे। सामान्य जनता पर भी सरकार ने बहुत अधिक मात्रा में कर लगा रखा था, जिस कारण सामान्य जनता भी सरकार का विरोध करने लगी थी।

1857 की क्रांति के सामाजिक तथा धार्मिक कारण

  • 1856 का धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम-ब्रिटिश सरकार ने 1856 में एक कानून बनाया जिसके तहत ईसाई धर्म ग्रहण करने वाले व्यक्तियों को ही अपने पैतृक संपत्ति का हकदार माना गया और उन्हें नौकरियों में पदोन्नति, शिक्षा संस्थानों में प्रवेश की सुविधा प्रदान की गई। इस कानून के कारण बड़े व्यापक स्तर पर पादरियों ने हिन्दू और मुस्लिम को ईसाई बनाया जिस कारण भारतीय धार्मिक समाज अंग्रेज़ो पर क्रोधित होने लगा।
  • भारतीय समाज में सुधार कार्य-ब्रिटिश साम्राज्य ने उस समय भारतीय समाज की कुछ कुरीतियों को देखा और उन्हे सही करने का फैसला किया, जैसे वर्ष 1829 में लॉर्ड विलियम बैंटिक ने राजा राम मोहन राय की सहायता से सती प्रथा को समाप्त कर दिया था और बाल विवाह पर रोक लगा दी थी। इससे भारतीय हिंदुओं ने इसे अपने धर्म के विरुद्ध समझा और ब्रिटिश सरकार का विरोध करना शुरू कर दिया।
  • अंग्रेजी शिक्षा-अंग्रेज़ो ने भारतीय समाज को शिक्षित करने के लिए अंग्रेजी स्कूलों की शुरूआत की थी, जिसमें उन्होने भारतीयो को शिक्षा प्रदान करना शुरू किया इससे भारत के सभी धर्मो के लोगो को यह लगने लगा था की वह भारतीयो को अवश्य ईसाई बनाना चाहते है इसलिए उन्होने ने अंग्रेजी स्कूलों की शुरूआत की।
  • ईसाई प्रचारकों द्वारा अन्य धर्मों की निंदा-ईसाई प्रचारको ने भारत में अपने धर्म को सर्वश्रेष्ट बताने के लिए अन्य धर्मो के ग्रंथो और सिद्धांतों को गलत बताना शुरू कर दिया जिस कारण भारत में अंग्रेज़ो के खिलाफ बड़े व्यापक स्तर पर गुस्सा बढ़ने लगा था।

1857 की क्रांति के सैनिक कारण

  • भारतीय सैनिकों को समुद्र पर लड़ने के लिए भेजना- वर्ष 1856 में एक ऐसा कानून पास किया गया जिसके अनुसार लड़ने के लिए समुद्र पार भेजा जा सकता था, परंतु हिन्दू सैनिक समुद्र पार जाना अपने धर्म के खिलाफ समझते थे।
  • भारतीय सैनिकों के साथ अभद्र व्यवहार- ब्रिटिश सैनिक परेड के दौरान भारतीय सैनिकों के साथ अभद्र व्यवहार करते थे। वे भारतीयो के सामने ही उनकी सभ्यता, संस्कृति और धर्म का मजाक उड़ाते थे, जिस कारण भारतीय सैनिकों का आक्रोश अंग्रेजी सरकार के खिलाफ बढ़ने लगा था।
  • वेतन, पदोन्नति और तैनाती में भारतीयो के साथ भेदभाव- भारतीय सैनिकों के साथ ब्रिटिश प्रशासन भेदभाव वाली नीति अपनाता था, वे केवल ब्रिटिश सैनिकों और अधिकारियों के ही वेतन और पद में उन्नति करते थे। वह भारतियों की तैनाती भी अशांत इलाको में करते थे जबकि ब्रिटिश सैनिकों की तैनाती शांत व साफ इलाको में करते थे।

1857 की क्रांति के तात्कालिक कारण

  • चर्बी वाले कारतूस- 1857 की क्रांति का तात्कालिक कारण सैनिकों को दिये गये नए चर्बी वाले कारतूस थे। इन नए करतूसों पर सूअर और गाय की चर्बी लगी होती थी, जिसे मुंह से फाड़कर ही बन्दको में डाला जाता था। ब्रिटिश सेना में हिन्दू और मुसलमान दोनों ही सम्मिलित थे और उन्होने इसे अपने धर्म के खिलाफ मान कर उपयोग करने से माना कर दिया था परंतु ब्रिटिश सरकार ने उनकी बातों को नहीं माना। सबसे पहले इन चर्बी वाले कारतूसों का उपयोग करने का विरोध बैरकपुर छावनी के सैनिक ने किया था। इन करतूसों की सच्चाई जानकार मंगल पांडे ने गुस्से में आ कर एक ब्रिटिश अधिकारी की हत्या भी कर दी थी।

1857 की क्रांति का प्रसार

  • दिल्ली पर कब्जा करने के बाद शीघ्र ही है विद्रोह मध्य एवं उत्तरी भारत मेँ फैल गया।
  • 4 जून को लखनऊ मेँ बेगम हजरत हजामत महल के नेतृत्व मेँ विद्रोह का आरंभ हुआ जिसमें हेनरी लॉटेंस की हत्या कर दी गई।
  • 5 जून को नाना साहब के नेतृत्व मेँ कानपुर पर अधिकार कर लिया गया नाना साहब को पेशवा घोषित किया गया।
  • झांसी मेँ विद्रोह का नेतृत्व रानी लक्ष्मी बाई ने किया।
  • झांसी के पतन के बाद लक्ष्मी बाई ने ग्वालियर मेँ तात्या टोपे के साथ मिलकर विद्रोह का नेतृत्व किया। अंततः लक्ष्मीबाई अंग्रेजोँ जनरल ह्यूरोज से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुई।
  • रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु पर जनरल ह्यूरोज ने कहा था, “भारतीय क्रांतिकारियोँ मेँ यहाँ सोयी हुई औरत मर्द है।“
  • तात्या टोपे का वास्तविक नाम रामचंद्र पांडुरंग था। वे ग्वालियर के पतन के बाद नेपाल चले गए जहाँ एक जमींदार मानसिंह के विश्वासघात के कारण पकडे गए और 18 अप्रैल 1859 को उन्हें फाँसी पर लटका दिया गया।
  • बिहार के जगरीपुर मेँ वहाँ के जमींदार कुंवर सिंह 1857 के विद्रोह का झण्डा बुलंद किया।
  • मौलवी अहमदुल्लाह ने फैजाबाद में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व प्रदान किया।
  • अंग्रेजो ने अहमदुल्ला की गतिविधियो से चिंतित होकर उसे पकड़ने के लिए 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था।
  • खान बहादुर खान ने रुहेलखंड मेँ 1857 के विद्रोह को नेतृत्व प्रदान किया था, जिसे पकड़कर फांसी दे दी गई।
  • राज कुमार सुरेंद्र शाही और उज्जवल शाही ने उड़ीसा के संबलपुर मेँ विद्रोह का नेतृत्व किया।
  • मनीराम दत्त ने असम मेँ विद्रोह का नेतृत्व किया।
  • बंगाल, पंजाब और दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों ने विद्रोह मेँ भाग नहीँ लिया।
  • अंग्रेजो ने एक लंबे तथा भयानक युद्ध के बाद सितंबर, 1857 मेँ दिल्ली पर पुनः अधिकार कर लिया।

इन्हें भी पढे: भारतीय इतिहास के प्रमुख युद्ध कब और किसके बीच हुए

1857 की क्रांति के प्रमुख नेता व नायक

विद्रोही नेता का नाम विद्रोह की तिथि केंद्र
बहादुर शाह जफ़र, बख्त खां 11 म, 1857 दिल्ली
नाना साहब, तांत्या टोपे 5 जून, 1857 कानपुर
बेगम हजरत महल, बिरजिस कादिर 4 जून, 1857 लखनऊ
रानी लक्ष्मीबाई 4 जून 1857 झाँसी
कुंवरसिंह, अमर सिंह 12 जून, 1857 जगदीशपुर
मौलवी अहमदुल्ला जून, 1857 फैजाबाद
लियाकत अली जून, 1857 इलाहबाद
खान बहादुर जून, 1857 बरेली

1857 के विद्रोह के परिणाम

  • विद्रोह के बाद भारत मेँ कंपनी शासन का अंत कर दिया गया तथा भारत का शासन ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया।
  • भारत के गवर्नर जनरल को अब वायसराय कहा जाने लगा।
  • भारत सचिव के साथ 15 सदस्यीय भारतीय परिषद की स्थापना की गई।
  • 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार द्वारा सेना के पुनर्गठन के लिए स्थापति पील आयोग की रिपोर्ट पर सेना मेँ भारतीय सैनिकों की तुलना मेँ यूरोपियो का अनुपात बढ़ा दिया गया।
  • भारतीय रजवाड़ों के प्रति विजय और विलय की नीति का परित्याग कर सरकार ने राजाओं को गोद लेने की अनुमति प्रदान की।

1857 के विद्रोह से सम्बंधित महत्वपूर्ण स्मरणीय तथ्य

  • बहादुर शाह दिल्ली मेँ प्रतीकात्मक नेता था। वास्तविक नेतृत्व सैनिकों की एक परिषद के हाथों मेँ था, जिसका प्रधान बख्त खां था।
  • 1857 के विद्रोह के समय भारत का गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग था।
  • यह विद्रोह सत्ता पर अधिकार के बाद लागू किए जाने वाले किसी सामाजिक विकल्प से रहित था।
  • 1857 के विद्रोह मेँ पंजाब, राजपूताना, हैदराबाद और मद्रास के शासकों ने बिल्कुल हिस्सा नहीँ लिया।
  • विद्रोह की असफलता के कई कारण थे, जिसमेँ प्रमुख कारण था एकता, संगठन और साधनों की कमी।
  • बंगाल के जमींदारों ने विद्रोहियोँ को कुचलने के लिए अंग्रेजो की मदद की थी।
  • बी. डी. सावरकर ने अपनी पुस्तक भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के माध्यम से इस धारणा को जन्म दिया कि, 1857 का विद्रोह एक सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम था।
  • वास्तव मेँ 1857 का विद्रोह मात्र सैनिक विद्रोह नहीँ था, बल्कि इसमेँ समाज का प्रत्येक वर्ग शामिल था। विद्रोह मेँ लगभग डेढ़ लाख लोगोँ की जानेँ गई।

 

इन्हें भी पढे: 1857 की क्रांति के प्रश्न उत्तर

📊 This topic has been read 8349 times.

1857 की क्रांति - अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर:

प्रश्न: 1857 के गदर के बाद समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था?
उत्तर: लॉर्ड कैनिंग
📝 This question was asked in exam:- SSC LDC Aug, 1995
प्रश्न: किसने 1857 के विद्रोह को स्वतंत्रता का प्रथम भारतीय युद्ध कहा था?
उत्तर: विद्रोह को कई नामों से जाना जाता है: सिपाही विद्रोह (ब्रिटिश इतिहासकारों द्वारा), भारतीय विद्रोह, महान विद्रोह (भारतीय इतिहासकारों द्वारा), 1857 का विद्रोह, भारतीय विद्रोह और स्वतंत्रता का पहला युद्ध विनायक दामोदर सावरकर द्वारा हुआ था।
📝 This question was asked in exam:- SSC STENO G-C Dec, 1996
प्रश्न: सन 1857 का गदर असफल रहा था, क्योंकि-
उत्तर: न तो उसके पीछे राष्ट्रीय भावना थी और न ऊपर कोई राष्ट्रीय नेता था
📝 This question was asked in exam:- SSC STENO G-D Mar, 1997
प्रश्न: सन् 1857 के विद्रोह का नेतृत्व लखनऊ से किसने किया था?
उत्तर: बेगम हजरत महल
📝 This question was asked in exam:- SSC CML May, 2000
प्रश्न: 1857 के विद्रोह के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था?
उत्तर: लॉर्ड कैनिंग
📝 This question was asked in exam:- SSC CML May, 2000
प्रश्न: स्वामी दयानंद सरस्वती ने प्रथम आर्य समाज 1857 ई० में कहाँ स्थापित की थी?
उत्तर: बम्बई में
📝 This question was asked in exam:- SSC CML May, 2000
प्रश्न: किस व्यक्ति ने 1857 के विद्रोह के कारणों का विश्लेषण करते हुए, अंग्रेजो तथा मुसलमानों के बीच मेल-मिलाप की वकालत की?
उत्तर: सैयद अहमद बरेलेवी
📝 This question was asked in exam:- SSC CML May, 2000
प्रश्न: बेगम हजरत महल ने 1857 ई० के विद्रोह का नेतृत्व किस शहर से किया था?
उत्तर: लखनऊ
📝 This question was asked in exam:- SSC CML May, 2002
प्रश्न: 1857 के विद्रोह में नाना साहब कहाँ से विद्रोह कर रहे थे?
उत्तर: कानपुर
📝 This question was asked in exam:- SSC SOA Dec, 2003
प्रश्न: 1857 ई० का विद्रोह किसने शुरू किया था?
उत्तर: सिपाहियो ने
📝 This question was asked in exam:- SSC TA Nov, 2007

1857 की क्रांति - महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी:

प्रश्न: 1857 के गदर के बाद समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था?
Answer option:

      लुई माउंटबेटन

    ❌ Incorrect

      वॉरेन हेस्टिंग्स

    ❌ Incorrect

      लॉर्ड कर्ज़न

    ❌ Incorrect

      लॉर्ड कैनिंग

    ✅ Correct

प्रश्न: किसने 1857 के विद्रोह को स्वतंत्रता का प्रथम भारतीय युद्ध कहा था?
Answer option:

      डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा

    ❌ Incorrect

      महात्मा गाँधी

    ❌ Incorrect

      मंगल पांडये

    ❌ Incorrect

      बीo डीo सावरकर

    ✅ Correct

अधिक पढ़ें: भारतीय स्वतंत्रता सेनानी से संबंधित मुख्य ऐतिहासिक घटनाएं
प्रश्न: सन 1857 का गदर असफल रहा था, क्योंकि-
Answer option:

      अंग्रेजो के पास संचार की उत्तम सुविधा मौजूद थी

    ❌ Incorrect

      मंगल पाण्डेय ने जल्दबाजी में आन्दोलन जल्दी शुरू कर दिया था

    ❌ Incorrect

      अंग्रजो ने अपनी सेना का उचित संचालन किया था

    ❌ Incorrect

      न तो उसके पीछे राष्ट्रीय भावना थी और न ऊपर कोई राष्ट्रीय नेता था

    ✅ Correct

प्रश्न: सन् 1857 के विद्रोह का नेतृत्व लखनऊ से किसने किया था?
Answer option:

      बेगम हजरत महल

    ✅ Correct

      रानी लक्ष्मीबाई

    ❌ Incorrect

      तात्या टोपे

    ❌ Incorrect

      मंगल पांडे

    ❌ Incorrect

प्रश्न: 1857 के विद्रोह के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था?
Answer option:

      लॉर्ड इरविन

    ❌ Incorrect

      लॉर्ड चर्चिल

    ❌ Incorrect

      लॉर्ड माउंटबेटन

    ❌ Incorrect

      लॉर्ड कैनिंग

    ✅ Correct

प्रश्न: स्वामी दयानंद सरस्वती ने प्रथम आर्य समाज 1857 ई० में कहाँ स्थापित की थी?
Answer option:

      बंगाल मे

    ❌ Incorrect

      चेन्नई मे

    ❌ Incorrect

      बम्बई में

    ✅ Correct

      सारनाथ मे

    ❌ Incorrect

प्रश्न: किस व्यक्ति ने 1857 के विद्रोह के कारणों का विश्लेषण करते हुए, अंग्रेजो तथा मुसलमानों के बीच मेल-मिलाप की वकालत की?
Answer option:

      अबुल कलाम आज़ाद

    ❌ Incorrect

      सैयद अहमद बरेलेवी

    ✅ Correct

      टिटुमिर

    ❌ Incorrect

      सैयद अहमद खान

    ❌ Incorrect

प्रश्न: बेगम हजरत महल ने 1857 ई० के विद्रोह का नेतृत्व किस शहर से किया था?
Answer option:

      अवध

    ❌ Incorrect

      उज्जैन

    ❌ Incorrect

      लखनऊ

    ✅ Correct

      अलीगढ़

    ❌ Incorrect

प्रश्न: 1857 के विद्रोह में नाना साहब कहाँ से विद्रोह कर रहे थे?
Answer option:

      लखनऊ

    ❌ Incorrect

      इलाहाबाद

    ❌ Incorrect

      बहादुरगढ़

    ❌ Incorrect

      कानपुर

    ✅ Correct

प्रश्न: 1857 ई० का विद्रोह किसने शुरू किया था?
Answer option:

      रानी लक्ष्मीबाई ने

    ❌ Incorrect

      सिपाहियो ने

    ✅ Correct

      बेगम हज़रत महल ने

    ❌ Incorrect

      मंगल पांडे ने

    ❌ Incorrect


You just read: 1857 Ki Kranti Ke Pramukh Karan, Parinam Evm Pramukh? Nayak Neta ( Major Causes, Consequences Of The Revolution Of 1857 (In Hindi With PDF))

Related search terms: : 1857 की क्रांति के कारण और परिणाम, 1857 के विद्रोह के परिणाम, 1857 की क्रांति का स्वरूप कारण एवं परिणाम, 1857 की क्रांति के कारण, 1857 Ki Kranti Ke Pramukh Karan, 1857 Ki Kranti Ke Parinaam

« Previous
Next »