अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (08 सितम्बर) – International Literacy Day (08 September)

✅ Published on September 8th, 2018 in महत्वपूर्ण दिवस, सितंबर माह के महत्वपूर्ण दिवस

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (08 सितम्बर): (08 September: International Literacy Day in Hindi)

विश्व साक्षरता दिवस कब मनाया जाता है?

हर साल सम्पूर्ण विश्व में 08 सितंबर अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस अथवा विश्व साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यूनेस्को के आंकड़ों के अनुसार, भारत की साक्षरता दर 72.1 प्रतिशत है। पुरुषों के बीच साक्षरता 80.9 प्रतिशत है, जबकि महिलाओं के लिए यह 62.8 प्रतिशत है। कार्यात्मक साक्षरता महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत एक ऐसा देश है जहां लगभग 280 मिलियन से अधिक अशिक्षित वयस्क हैं और वयस्क शिक्षा भारत के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार और गैर-लाभकारी संगठन इस अंतर को कम करने के लिए काम कर रहे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2018:

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2018, शनिवार 08 सितंबर को मनाया गया। इस साल 52वां अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया गया था, जिसका विषय (थीम) ‘साक्षरता और कौशल विकास’ है।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का इतिहास:

यूनेस्को द्वारा 07 नवंबर 1965 में प्रतिवर्ष 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था। वर्ष 1966 में पहली बार इसे मनाया गया था। व्यक्तियों, समाज और समुदायों को साक्षरता का महत्व समझाने के उद्देश्य से इसका जश्न दुनिया भर में मनाया जाना शुरू किया गया था। यह दिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साक्षरता और प्रौढ़ शिक्षा की स्थिति को दुबारा ध्यान दिलाने के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का उद्देश्य:

साक्षरता दिवस का प्रमुख उद्देश्य नव साक्षरों को उत्साहित करना है। अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस हमारे लिये अहम दिवस है, क्योंकि हमारे जीवन में शिक्षा का बहुत अधिक महत्त्व है। हमारे देश में पुरुषों की अपेक्षा महिला साक्षरता कम है। हमें आज के दिन यह संकल्प लेना होगा कि हर व्यक्ति साक्षर बनें, निरक्षर कोई न रहे। हमें अपने यहाँ से निरक्षता को भगाना होगा। भारत में सर्वशिक्षा अभियान भी इसी दिशा में उठाया गया एक सार्थक कदम है। भारत में साक्षरता दर 75.06 है (2011), जो की 1947 में मात्र 18 % थी। भारत की साक्षरता दर विश्व की साक्षरता दर 84% से कम है। हमारे देश में 6-14 साल के आयु वर्ग के प्रत्येक बालक और बालिका को स्कूल में मुफ़्त शिक्षा का अधिकार है।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस का महत्व:

मानव विकास और समाज के लिये उनके अधिकारों को जानने और साक्षरता की ओर मानव चेतना को बढ़ावा देने के लिये अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। सफलता और जीने के लिये खाने की तरह ही साक्षरता भी महत्वपूर्णं है। गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता को प्राप्त करना आदि को जड़ से उखाड़ना बहुत जरुरी है। साक्षरता में वो क्षमता है जो परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है। ये उत्सव लगातार शिक्षा को प्राप्त करने की ओर लोगों को बढ़ावा देने के लिये और परिवार, समाज तथा देश के लिये अपनी जिम्मेदारी को समझने के लिये मनाया जाता है।

दुनिया भर के कई देशों में निरक्षरता से संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए कुछ रणनीतिक योजना को क्रियान्वित करने के लिए और अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस को प्रभावी बनाने के लिए इसके उत्सव के साथ उस वर्ष का एक विशेष विषय जुड़ा होता है | अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के वर्षवार विषयों में से कुछ नीचे दिए गए हैं :-

विश्व साक्षरता दिवस का विषय (थीम):

बहुत सारे देशों में पूरे विश्व की निरक्षरता से संबंधित समस्याओं को सुलझाने के लिये कुछ सामरिक योजनाओं के कार्यान्वयन के द्वारा इसे प्रभावशाली बनाने के लिये हर वर्ष एक खास विषय पर अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस उत्सव मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का कुछ सालाना विषय यहाँ दिया गया है।

  • सामाजिक प्रगति प्राप्ति पर ध्यान देने के लिये 2006 का विषय “साक्षरता सतत विकास” था।
  • महामारी (एचआईवी, टीबी और मलेरिया आदि जैसी फैलने वाली बीमारी) और साक्षरता पर ध्यान देने के लिये वर्ष 2007 और 2008 का विषय “साक्षरता और स्वास्थ्य” था।
  • लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण पर ध्यान देने के लिये “साक्षरता और सशक्तिकरण” वर्ष 2009-10 का मुद्दा था।
  • वर्ष 2011-12 का विषय (थीम) “साक्षरता और शांति” था जो शांति के लिये साक्षरता के महत्व पर ध्यान देना है।
  • वर्ष 2013 का विषय (थीम) “21वीं सदी के लिये साक्षरता” थी वैश्विक साक्षरता को बढ़ावा देने के लिये था।
  • वर्ष 2014 का विषय (थीम) “साक्षरता और सतत विकास” था, जो पर्यावरणीय एकीकरण, आर्थिक वृद्धि और सामाजिक विकास के क्षेत्र में सतत विकास को प्रोत्साहन देने के लिये है।
  • वर्ष 2015 का विषय (थीम) “साक्षरता एवं सतत सोसायटी” था।
  • वर्ष 2016 का विषय (थीम) “अतीत को पढ़ना, भविष्य को लिखना” था।
  • वर्ष 2017 का विषय (थीम) “डिजिटल दुनिया में साक्षरता” था।
  • वर्ष 2018 का विषय (थीम) “साक्षरता और कौशल विकास” था।

कम साक्षरता दर के लिए कारण

  • विद्यालयों की कमी (भारत में लगभग 6 लाख स्कूल के कमरों की कमी है)।
  • स्कूल में शौचालय आदि की कमी।
  • जातिवाद (भारत में एक मुद्दा है)।
  • गरीबी (अधिक जनसंख्या के कारण साक्षरता में कमी)।
  • लड़कियों के साथ बलात्कार और छेड़छाड़ होने का डर।
  • जागरूकता की कमी।
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