वाराणसी उत्तर प्रदेश के काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास तथा महत्वपूर्ण जानकारी

काशी विश्वनाथ मंदिर संक्षिप्त जानकारी

स्थानवाराणसी, उत्तर प्रदेश (भारत)
निर्माण1780 ई.
निर्मितामहारानी अहिल्या बाई होल्कर
वास्तुकलाहिन्दू वास्तुकला
उपनामश्री काशी विश्वनाथ, विश्वेश्वर
समर्पितहिन्दू देवता शिव को
प्रकारधार्मिक स्थल, मंदिर
प्रमुख त्यौहारमहा शिवरात्रि

काशी विश्वनाथ मंदिर का संक्षिप्त विवरण

भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश में स्थित वाराणसी नगर विश्व के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक नगरो में से एक है। वाराणसी नगर भारत के सबसे प्राचीन नगरो में से एक है, जिसका उल्लेख अधिकत्तर प्राचीन भारतीय कवियों की रचनाओ में भी देखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश कई प्रसिद्ध लेखको व कवियों की जन्म भूमि भी रहा है। वाराणसी नगर में स्थित काशी विश्वनाथ मन्दिर अपनी संस्कृति, कलाकृति और इतिहास के लिए विश्व में प्रसिद्ध है।

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास

इस मंदिर का उल्लेख कई पुराणों में मिलता है, विशेषकर स्कंद पुराण में, जो हिन्दू धर्म के सबसे प्राचीन पुराणों में से एक है। वर्ष 1194 ई. में हुये एक युद्ध में दिल्ली सल्तनत के शासक कुतुब-उद-दीन ऐबक ने कन्नौज के राजा मोहम्मद गोरी को हरा दिया था, जिसके बाद कुतुब-उद-दीन ऐबक की सेना ने वाराणसी के कई मन्दिरों को नष्ट करना शुरू कर दिया जिसमे प्राचीन काशी विश्वनाथ मन्दिर का मूल रूप पुर्णतः नष्ट हो गया था।

इस मंदिर को सुल्तान इल्तुतमिश के शासन काल के दौरान एक गुजराती व्यापारी ने पुनर्निर्मित करवाया था, परंतु इसे पुन: हुसैन शाह शारकी और सिकंदर लोधी के शासनकाल में ध्वस्त कर दिया गया था। मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में इस मंदिर को राजा मान सिंह ने पुन: बनवाने की कोशिश की थी परंतु, हिन्दू ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया क्यूंकि उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह मुगलों के कुल में कर दिया था।

वर्ष 1585 में राजा टोडर मल ने इस मंदिर को फिर से बनाया था। वर्ष 1669 ई. में, मुगल सम्राट औरंगजेब ने काशी के कई मंदिरो को नष्ट कर वहाँ पर ज्ञानवपी मस्जिद को बना दिया था, जिनके अवशेष मस्जिद के पीछे के हिस्से में आज भी देखे जा सकते हैं। लगभग 1780 ई. में अहिल्याबाई होलकर (मल्हार राव की बहू) ने मस्जिद के समीप वर्तमान मंदिर का निर्माण करवाया था, जिसके बाद इस मंदिर की देख-रेख पांडा या महंत के वंशानुगत समूह द्वारा की जाने लगी थी।

वर्ष 1900 में महंत देवी दत्त के दामाद पंडित विश्वेश्वर दयाल तिवारी ने मंदिर के प्रबंधन के लिए मुकदमा दायर किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें मंदिर का मुख्य पुजारी घोषित कर दिया गया था।

काशी विश्वनाथ मंदिर के रोचक तथ्य

  1. इस प्रसिद्ध मंदिर के वर्तमान स्वरूप का निर्माण लगभग 1780 ई. में मराठा सम्राज्य की “महारानी अहिल्या बाई होल्कर” ने करवाया था ।
  2. यह भव्य मंदिर हिन्दू देवता भगवान शिव को समर्पित है, उनकी आराधना इस मंदिर में लिंग के रूप में की जाती है जिसकी ऊंचाई 60 सेंटीमीटर है और वह शुद्ध चांदी के 90 सेंटीमीटर की परिधि वाले योनी से घिरा हुआ है।
  3. इस भव्य मंदिर को कई मुस्लिम शासको द्वारा गंभीर क्षति पंहुचाई गई है, जैसे-1194 ई. में कुतुब-उद-दीन ऐबक ने और 1669 ई. में औरंगजेब ने इसे नष्ट कर दिया था।
  4. वर्ष 1742 ई. में मराठा शासक मल्हार राव होलकर ने ध्वस्त हो चुके मंदिर के पुनर्निर्माण की योजना बनाई थी, परंतु उनकी यह योजना लखनऊ के नवाबों के हस्तक्षेप के कारण विफल हो गई थी क्यूंकि उस क्षेत्र को नवाबों द्वारा नियंत्रित किया गया था।
  5. लगभग 1750 ई. के आसपास जयपुर के महाराजा ने काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए काशी में भूमि खरीदने के उद्देश्य से एक सर्वेक्षण शुरू किया था परंतु मंदिर के पुनर्निर्माण की उनकी योजना बहारी हस्तक्षेप के कारण विफल हो गई थी।
  6. वर्ष 1828 ई में ग्वालियर राज्य के मराठा शासक दौलत राव सिंधिया की पत्नी “बाईजा बाई” ने ज्ञान वापी परिसर में 40 से अधिक खंभे के साथ एक छत वाले तरुमाला का निर्माण करवाया था।
  7. लगभग 1833-1840 ई. के दौरान काशी में ज्ञानवपी कुंआ, घाट और अन्य नजदीकी मंदिरों का निर्माण किया गया था।
  8. इस मंदिर के स्तंभवली परिसर के पूर्व में एक 7 फुट ऊंची नंदी बैल की पत्थर से बनी मूर्ति स्थित है, जोकि नेपाल के राजा द्वारा इस मंदिर को उपहार के रूप में दी गई थी।
  9. इस भव्य मंदिर के ऊपर जो गुंबद बना हुआ है, वह शुद्ध सोने से बनाया गया है। इस गुंबद को सोने से बनाने के लिए वर्ष 1835 ई. में महाराजा रणजीत सिंह जी ने 1 टन सोने का दान मंदिर को दिया था।
  10. इस भव्य मंदिर में कई स्थानों पर चाँदी का भी उपयोग किया गया है, जिसे वर्ष 1841 ई. में नागपुर के एक शासक “भोसले” ने मंदिर में दान दिया था।
  11. इस मंदिर को सबसे प्रसिद्ध बनाने वाले इसके 3 सोने के गुंबद है, जिसमे सबसे ऊँचे वाले गुंबद की कुल ऊंचाई लगभग 15.5 मीटर है।
  12. इस मंदिर में प्रत्येक दिन करीब 3,000 से अधिक पर्यटक आते है और कुछ खास मौकों पर इनकी संख्या 1,000,000 से अधिक तक पहुंच जाती है।
  Last update :  2022-08-03 11:44:49
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