सौराष्ट्र गुजरात के सोमनाथ मंदिर का इतिहास तथा महत्वपूर्ण जानकारी

सोमनाथ मंदिर संक्षिप्त जानकारी

स्थानवेरावल, गुजरात (भारत)
निर्माण काल‎1951 (वर्तमान संरचना)
निर्मातासरदार वल्लभ भाई पटेल (वर्तमान संरचना)
वास्तुकलाहिन्दू वास्तुकला

सोमनाथ मंदिर का संक्षिप्त विवरण

भारतीय राज्य गुजरात के सौराष्ट्र उपक्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित सोमनाथ मंदिर एक प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है। इस मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है। इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में किया गया है। इस मंदिर की महिमा और कीर्ति दूर-दूर तक फैली है और ये हिंदु धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है।

सोमनाथ मंदिर का इतिहास

ऋग्वेद में उल्लेखित इस भव्य मंदिर का निर्माण चन्द्रदेव द्वारा किया गया था। भारत आने वाले विश्व प्रसिद्ध अरबी यात्री अल बरूनी ने अपने यात्रा वृतान्त “किताब-उल-हिन्द” अर्थात हिंद की किताब में इस मंदिर की सुन्दरता के बारे में भी लिखा था जिससे प्रभावित होकर अफगानी शासक महमूद ग़ज़नवी ने सन 1025 में अपने पांच हजार सैनिको के साथ इस मंदिर पर हमला किया और उसकी सम्पत्ति लूटी और उसे नष्ट कर दिया।

ऐसा माना जाता है कि जब मंदिर को गिराया गया था और उस समय मंदिर के अंदर लगभग पचास हजार लोग मौजूद थे जिनकी वहीं दबकर मौत हो गयी थी। इसके बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने मिलकर मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया। जब दिल्ली सल्तनत ने सन 1297 में गुजरात पर क़ब्ज़ा किया तो इसे फिर से गिराया गया। मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे 1706 में फिर से नष्ट कर दिया था।

इस मंदिर को लगभग 17 बार नष्ट किया गया था और हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया। यह सिलसिला लगभग 650 वर्षों तक जारी रहा। वर्तमान समय में निर्मित मंदिर को भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल द्वारा बनवाया गया है और 01 दिसंबर 1995 को पूर्व भारतीय राष्ट्रपति श्री शंकर दयाल शर्मा ने इसे देश को सौंप दिया था।

सोमनाथ मंदिर के रोचक तथ्य

  1. मंदिर में भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने उत्खनन द्वारा प्राप्त ब्रह्मशिला पर शिव का ज्योतिर्लिग स्थापित किया था।
  2. मंदिर की आधारशिला 8 मई 1940 को सौराष्ट्र के पूर्व सम्राट दिग्विजय सिंह द्वारा रखी तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के बने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद द्वारा 11 मई 1951 को मंदिर में ज्योतिर्लिग स्थापित किया था।
  3. यह मंदिर गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप- तीन प्रमुख भागों में बंटा हुआ है। इसके शिखर की ऊंचाई लगभग 150 फुट है।
  4. मंदिर के ऊपर स्थित कलश का भार लगभग 10 टन है और इसकी ध्वजा 27 फुट ऊंची है।
  5. इस मन्दिर में पार्वती, सरस्वती देवी, लक्ष्मी, गंगा और नन्दी की भी मूर्तियाँ स्थापित हैं। भूमि के ऊपरी भाग में शिवलिंग से ऊपर अहल्येश्वर मूर्ति है।
  6. मन्दिर परिसर में गणेशजी का भी एक मन्दिर है और उत्तर द्वार के बाहर अघोरलिंग की प्रतिमा स्थापित की गई है।
  7. प्रभावनगर में अहल्याबाई मन्दिर के समीप ही महाकाली का एक भव्य मन्दिर भी बना हुआ है। इसी प्रकार गणेशजी, भद्रकाली तथा भगवान विष्णु आदि के मन्दिर भी नगर में बने हुए है।
  8. नगर के द्वार के पास गौरीकुण्ड नामक सरोवर है। सरोवर के पास ही एक प्राचीन शिवलिंग है।
  9. इस क्षेत्र को पहले प्रभासक्षेत्र के नाम से जाना जाता था। भगवान्‌ श्रीकृष्ण ने इसी स्थान पर जरा नामक व्याध के बाण को निमित्त बनाकर अपनी लीला का संवरण किया था।
  10. ऐसा बताया जाता है आगरा के किले में रखे देवद्वार सोमनाथ मंदिर के हैं। महमूद गजनी द्वारा सन 1026 में की गई लूटपाट के दौरान इन द्वारों को अपने साथ ले गया था।
  11. यह मंदिर रोजाना सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। यहाँ पर रोजाना दिन में तीन बार (सुबह 7, दोपहर 12 और शाम 7 बजे) आरती की जाती है।
  12. मंदिर परिसर में रात 7:30 से 8:30 तक एक घंटे का साउंड एंड लाइट शो चलता है।
  13. मंदिर से लगभग 200 किलोमीटर दूरी पर भगवान् श्रीकृष्ण की द्वारिका नगरी है। यहां प्रतिदिन द्वारिकाधीश के दर्शन के लिए देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
  Last update :  2022-08-03 11:44:49
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