जयप्रकाश नारायण का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे जयप्रकाश नारायण (Jayaprakash Narayan) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए जयप्रकाश नारायण से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Jayaprakash Narayan Biography and Interesting Facts in Hindi.

जयप्रकाश नारायण का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान

नामजयप्रकाश नारायण (Jayaprakash Narayan)
उपनामलोकनायक
जन्म की तारीख11 अक्टूबर 1902
जन्म स्थानबंगाल प्रेसीडेंसी
निधन तिथि08 अक्टूबर 1979
माता व पिता का नामफूल रानी देवी / हरसू दयाल
उपलब्धि1948 - ऑल इंडिया कांग्रेस सोशलिस्ट के संस्थापक
पेशा / देशपुरुष / स्वतंत्रता सेनानी / भारत

जयप्रकाश नारायण (Jayaprakash Narayan)

जयप्रकाश नारायण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। मातृभूमि के वरदपुत्र जयप्रकाश नारायण ने हमारे देश की सराहनीय सेवा की है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण त्याग एवं बलिदान की प्रतिमूर्ति थे। इन्हें साल 1970 में इंदिरा गांधी के विरुद्ध विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है।

जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को सिताब दियारा, बलिया (उत्तर प्रदेश) भारत में हुआ था| इनके माता-पिता का नाम फूलरानी देवी तथा देवकी बाबू था। इनके पिता हरसू दयाल राज्य सरकार के नहर विभाग में एक जूनियर अधिकारी थे ये अपने माता पिता की चौथी संतान थे।
जयप्रकाश नारायण का निधन 8 अक्टूबर 1979 (आयु 76 वर्ष) को पटना , बिहार , भारत में इनके जन्मदिन के तीन दिन पहले मधुमेह और दिल की बीमारियों के कारण हुआ था।
पटना में अपने विद्यार्थी जीवन में जयप्रकाश नारायण ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। और अपनी परीक्षाओं के लिए सिर्फ 20 दिन शेष रहते बिहार नेशनल कॉलेज छोड़ दिया। और वे बिहार विद्यापीठ में शामिल हो गए, राजेंद्र प्रसाद द्वारा स्थापित एक कॉलेज और गांधीवादी अनुग्रह नारायण सिन्हा के पहले छात्रों में से एक बने। विद्यापीठ में पाठ्यक्रमों को समाप्त करने के बाद, जयप्रकाश ने संयुक्त राज्य में पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया। 20 साल की उम्र में, जयप्रकाश मालवाहक जहाज जानूस पर सवार हो गए, जबकि उनकी पत्नी प्रभाती साबरमती आश्रम में ही रही। जयप्रकाश 8 अक्टूबर 1922 को कैलिफ़ोर्निया पहुंचे और जनवरी 1923 में बर्कले में भर्ती हुए। अपनी शिक्षा के लिए फीस का भुगतान करने के लिए, जयप्रकाश ने एक कैनिंग फैक्ट्री में फलों को पैकीन करने का काम किया।, बर्तन धोए, एक गैराज में मैकेनिक का काम किया। एक बूचड़खाने में, लोशन बेचा। इन सभी नौकरियों ने जयप्रकाश को मजदूर वर्ग की कठिनाइयों का बोध कराया।
वे समाज-सेवक थे, जिसके कारण उन्हें ‘लोकनायक" के नाम से भी जाना जाता है। जयप्रकाश 1929 में भारत लौटने पर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे। वर्ष 1943 में जयप्रकाश और राममनोहर लोहिया दोनों लोग गिरफ़्तार कर लिया गया था। 1948 में उन्होंने कांग्रेस के समाजवादी दल का नेतृत्व किया और बाद में गांधीवादी दल के साथ मिलकर समाजवादी सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की। 19 अप्रील, 1954 में गया, बिहार में उन्होंने विनोबा भावे के सर्वोदय आन्दोलन के लिए जीवन समर्पित करने की घोषणा की। 1957 में उन्होंने लोकनीति के पक्ष में राजनीति छोड़ने का निर्णय लिया। 1953 में कृषक मज़दूर प्रजा पार्टियों के विलय में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी। जयप्रकाश नारायण ने “सम्पूर्ण क्रांति” का प्रसिद्ध नारा दिया था। 1960 के दशक के अंतिम भाग में वे राजनीति में पुनः सक्रिय रहे। 1974 में किसानों के बिहार आन्दोलन में उन्होंने तत्कालीन राज्य सरकार से इस्तीफे की मांग की। वे इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के विरुद्ध थे। गिरते स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने बिहार में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन किया। उनके नेतृत्व में पीपुल्स फ्रंट ने गुजरात राज्य का चुनाव जीता।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्त्वपूर्ण योगदान के लिये 1998 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण को मरणोपरान्त भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न‘ से सम्मानित किया है। इसके अतिरिक्त उन्हें समाजसेवा के लिए 1965 में मैगससे पुरस्कार प्रदान किया गया था। पटना के हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखा गया है। दिल्ली सरकार का सबसे बड़ा अस्पताल ‘लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल" भी उनके नाम पर है।

📅 Last update : 2021-10-11 00:30:02

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