दादरा नगर हवेली का इतिहास, भूगोल, अर्थव्यवस्था, राजनीति तथा जिले

✅ Published on October 29th, 2021 in भारत, भारतीय केन्द्रशासित प्रदेश

इस अध्याय के माध्यम से हम दादर और नागर हवेली (Dadra and Nagar Haveli) की विस्तृत एवं महत्वपूर्ण जानकारी जानेगें, जिसमे राज्य का इतिहास, भूगोल, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, संस्कृति और राज्य में स्थित विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल आदि जैसी महत्वपूर्ण एवं रोचक जानकरियों को जोड़ा गया है। इसके अतिरिक्त दादर और नागर हवेली राज्य में हाल ही में हुये विकास व बदलाव को भी विस्तारपूर्वक बताया गया है। यह अध्याय प्रतियोगी परीक्षार्थियों के साथ-साथ पाठकों के लिए भी रोचक तथ्यों से भरपूर है। Dadra and Nagar Haveli General Knowledge and Recent Developments (Hindi).

दादर और नागर हवेली का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान

राज्य का नामदादर और नागर हवेली (Dadra and Nagar Haveli)
इकाई स्तरकेन्द्रशासित प्रदेश
राजधानीसिल्वासा
राज्य का गठन11 अगस्त 1961
कुल क्षेत्रफल491 वर्ग किमी
जिले491
वर्तमान गवर्नर प्रफुल्ल पटेल (प्रशासक)
राजकीय पक्षी अभी तक घोषित नहीं
राजकीय फूलअभी तक नामित नहीं किया गया है
राजकीय जानवरअभी तक घोषित नहीं
राजकीय पेड़अभी तक नामित नहीं किया गया है
राजकीय भाषागुजराती, हिंदी

दादर और नागर हवेली (Dadra and Nagar Haveli)

दादरा और नगर हवेली भारतीय गणराज्य के पश्चिमी तट पर स्थित एक केन्द्र शासित प्रदेश है। यह केन्द्र शासित प्रदेश भारत के दक्षिणी भाग में महाराष्ट्र और गुजरात के बीच स्थित है। अरब सागर के पास स्थित केन्द्र शासित प्रदेश दादरा तथा नगर हवेली की राजधानी सिलवासा है। इस प्रदेश का क्षेत्रफल 491 वर्ग कि.मी. और घनत्व 698 प्रति वर्ग कि.मी. है। हरे भरे वन, सुन्दर पर्वत श्रृंखलाएं और वनस्पतियों की विभिन्न प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध यह केंद्र शासित प्रदेश देश के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है।

दादरा और नगर हवेली पर पुर्तगालियों के आने से पूर्व मराठों का शासन था। उसके बाद साल 1783 से 1785 के बीच पुर्तगालियों ने अपना शासन स्थापित किया। पुर्तगालियों ने यहाँ पर लगभग 150 साल से भी ज्यादा समय तक शासन किया था। 02 अगस्त, 1954 को भारतीय राष्ट्रीय स्वयंसेवकों ने इस क्षेत्र को पुर्तगालियों से आजाद करवाया। सन् 1954 से 1961 तक यह प्रदेश लगभग स्वतंत्र रूप से काम करता रहा, लेकिन बाद में 11 अगस्त 1961 को इस प्रदेश में भारतीय संघ शामिल हो गया और यह एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया।
इस केंद्र शासित प्रदेश की भौगोलिक स्थिति 20 डिग्री 25’ उत्तर और 73 डिग्री 15’ पूर्व में है। यह प्रदेश दो भिन्न भौगौलिक क्षेत्रों से बना है – दादरा और नगर हवेली। इसका कुल इलाका 491 वर्ग किलोमीटर का है। इसके उत्तर-पश्चिमी और पूर्व हिस्से में वलसाड जिला और दक्षिण और दक्षिण-पूर्व हिस्से में महाराष्ट्र के ठाणे और नाशिक जिले है। दादरा और नगर हवेली के ज्यादातर हिस्से पहाड़ी है। इसके पूर्वी दिशा में सहयाद्री पर्वत श्रंखला है। यहां की 40 प्रतिशत जमीन घने जंगलों से ढंकी है। यहाँ की तीन सहायक नदिया है- पीरी, वर्ना और सकर्तोंद।
दादरा और नगर हवेली की जलवायु इसकी भौगोलिक स्थिति से बहुत प्रभावित है। समुद्र तट के किनारे बसे होने के कारण, यहाँ एक समुद्री जलवायु परिस्थितियां है। यहाँ ग्रीष्म ऋतु गर्म और नम होती है और अधिकतम तापमान 35 डिग्री तक चला जाता है। जून से सितंबर के बीच वर्षा ऋतु आती है। यहाँ सर्दियों में तापमान 14 डिग्री से 30 डिग्री तक रहता है। यहाँ औसत वार्षिक वर्ष 200-250 सेमी. तक होती है और इसी कारण इसे पश्चिम भारत का चेरापूंजी कहाँ जाता है।

दादरा और नगर हवेली भारतीय उपमहाद्वीप के सात केंद्र केंद्र शासित प्रदेशों में से एक है, जिसका नियंत्रण भारत की केंद्र सरकार के पास होता है। दादरा और नगर हवेली के प्रशासन का मुखिया राज्यपाल होता है, जो प्रशासक या ‘उपराज्यपाल (लेफ्टिनेंट गवर्नर)’ के तौर पर जाना जाता है और उनकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती हैं।

दादरा और नगर हवेली के वर्तमान प्रशासक प्रफुल्ल पटेल है। उन्होंने 30 अगस्त 2016 को दादरा और नगर हवेली के उपराज्यपाल (प्रशासक) के रूप में शपथ ग्रहण की है।


दादरा और नगर हवेली की अर्थव्यवस्था पांच प्रमुख गतिविधियों पर निर्भर करती है। जिसमें कृषि, उद्योग, वानिकी, पशुपालन और पर्यटन सम्मिलित है। क्षेत्र की बुनियादी आर्थिक गतिविधि कृषि है जिसमें लगभग 60% कामकाजी आबादी शामिल है। अर्थव्यवस्था में एक अन्य प्रमुख योगदानकर्ता विनिर्माण उद्योग हैं। जिसमें लघु उद्योग 2118 हैं और मध्यम पैमाने के उद्योग, 564 और बड़े पैमाने के उद्योग 28 हैं।
दादरा और नगर हवेली का मुख्य व्यवसाय कृषि है। यहाँ की मुख्‍य फसलें गेंहू, चावल, रागी, गन्ना, पैडी, दालें आम, चीकू, और लीची हैं। दादरा और नगर हवेली पूर्ण रूप से ग्रामीण क्षेत्र है यहां कोई बड़ा उद्योग नहीं है। यहां की 40% जमीन घने जंगलों से ढंकी है और बाकी क्षेत्र चावल और अन्य अनाज के उत्पादन और जानवरों की चराई के लिए है।
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार दादरा और नगर हवेली की साक्षरता दर 86.34% है। प्रदेश के मुख्य शिक्षण संस्थानों में कला के एसएसआर कॉलेज, वाणिज्य एवं विज्ञान, माउंट लिटेरा जी स्कूल नरोली सिलवासा दादरा नगर हवेली, केन्द्रीय विद्यालय, डॉ बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज, अद्वैत गुरुकुल आदि शामिल है।
दादरा और नगर हवेली के प्रमुख उद्योगों में टाई की बुनाई, चमड़ा शिल्प और टोकरीसाजी मुख्य रूप से शामिल हैं।
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार दादरा और नगर हवेली की जनसंख्या 3,43,709 है। यहाँ पर पुरुषों की जनसंख्या 149,949 और महिलाओं की जनसंख्या 193,760 है। दादरा और नगर हवेली में एक जिला, एक ब्लाॅक और 72 गांव हैं।
यहाँ के लोग गर्मियों में हल्के काॅटन के कपडे और सर्दियों में उनी वस्त्र जैसे मोजे, स्वेटर, जैकेट और शॉल आदि का उपयोग करते है।
यहाँ पर मुख्य रूप से आदिवासी लोग रहते है। दादरा और नगर हवेली में विभिन्न धर्मों के लोग निवास करते हैं। यहां की ज्यादातर आबादी हिंदुओं की है जोकि यहाँ की कुल आबादी का 95% है, बाकि अन्य धर्मो में मुस्लिम, सिख और ईसाई प्रमुख है। गीत और नृत्य इन आदिवासी समूहों का अभिन्न अंग हैं और फसल कटाई, शादी या मौत सभी अवसरों का जरुरी हिस्सा हैं। यहाँ के लोक नृत्यों में मुख्यरूप से तरपा नृत्य, भावड़ा नृत्य, घेररिया नृत्य, बोहड़ा नृत्य, ढोल नृत्य और अरहर और थाली नृत्य आदि बहुत लोकप्रिय है।
यहाँ रहने वाले आदिवासियों की अपनी भाषा है जिनमें भीली और भिलोड़ी सबसे आम है। अंग्रेजी आधिकारिक कामों के लिए इस्तेमाल होती है। दादरा और नगर हवेली की अन्य मुख्य भाषाओं में हिंदी, मराठी, गुजराती, भीली और भिलोड़ी शामिल हैं।
दादरा और नगर हवेली का खाना गुजरात से मिलता जुलता है, इस प्रदेश के लोग अलग-अलग आटे की रोटियां बनाना पसंद करते है। यहाँ के अन्य मुख्य व्यंजनों में मशरूम, दाल, गंथी, गुंडा, उबाडियू, खामन ढोकला और दूध पाक और श्रीखण्ड शामिल है।
दादरा और नगर हवेली में सभी धर्मों (हिंदु, मुस्लिम, सिख और ईसाई) के लोग अपने-2 त्योहार मानाते हैं। आदिवासी अपने ही त्‍योहार मनाते हैं। ढोडिया और वर्ली जनजातियां ‘दिवसो’ त्‍योहार मनाती हैं और ढोडिया जनजाति रक्षाबंधन भी मनाती है। वर्ली, कोकना और कोली जनजातियां ‘भावड़ा’ त्‍योहार मनाती हैं।
यहाँ पर मुख्य रूप से आदिवासी जनजातियां निवास करती है क्षेत्र में कई जनजातियां हैं, जो कई सारे जनजातीय समूहों में बंटे हैं। यहां की मुख्य जनजातियों में कोंकण, वरलाइ, कोली, धोडिया, काथोड़ी, नैका और डबलास हैं। आदिवासियों की अपनी संस्कृति और रिवाज़ हैं।
यह केंद्र शासित प्रदेश एक बहुत ही लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं। यहाँ के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों में हिरवा वन, वनगंगा झील, आइलैंड गार्डन, जुड़वा मीनार, छोटी छतरियां, ताडकेश्‍वर शिव मंदिर, वृंदावन, खानवेल का हिरण पार्क, बाणगंगा झील और द्वीप उद्यान, वनविहार उद्यान, लघु प्राणी विहार, बाल उद्यान, आदिवासी म्‍यूजियम और हिरवावन उद्यान आदि काफी प्रसिद्ध हैं।

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