रोहिणी खाडिलकर का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे रोहिणी खाडिलकर (Rohini Khadilkar) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए रोहिणी खाडिलकर से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Rohini Khadilkar Biography and Interesting Facts in Hindi.

रोहिणी खाडिलकर का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान

नामरोहिणी खाडिलकर (Rohini Khadilkar)
जन्म की तारीख01 अप्रैल 1963
जन्म स्थानमुंबई, महाराष्ट्र, भारत
उपलब्धि1981 - एशियाई शतरंज चैम्पियनशिप जीतने वाली प्रथम भारतीय महिला
पेशा / देशमहिला / खिलाड़ी / भारत

रोहिणी खाडिलकर (Rohini Khadilkar)

रोहिणी खाडिलकर भारत की एक सतरंज खिलाडी है यह भारत की पहली महिला सतरंज खिलाडी है इनको 13 साल की उम्र में ‘वुमन इंटरनेशनल मास्टर" होने का भी खिताब मिल चुका है। उन्होंने पांच बार भारतीय महिला चैम्पियनशिप और दो बार एशियाई महिला चैम्पियनशिप जीती है। इसके अलावा उन्होंने 56 बार शतरंज में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए विदेशों की यात्राएं कीं और 1980 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी नवाजा गया।

शतरंज की दुनिया में अपना नाम कमाने वाली रोहिणी खडिलकर का जन्म 1 अप्रैल 1963 को मुंबई (भारत ) में हुआ था|इनका जन्म एक मध्यम परिवार में हुआ था| इनके पिता अख़बार बेचा करते थे|
रोहिणी खडिलकर मात्र 13 साल की उम्र में 1976 में राष्ट्रीय महिला शतरंज चैंपियन बनीं और लगातार तीन वर्षों में यह चैंपियनशिप जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी थीं। उसने पाँच अवसरों पर यह खिताब अपने नाम किया। 1981 में, जब हैदराबाद में प्रतियोगिता हुई थी, तब रोहिणी एशियाई महिला शतरंज चैंपियन भी बनी थीं। वह उस प्रतियोगिता में अजेय रही और संभावित 12 अंकों में से 11.5 अंक हासिल किए। उसी वर्ष, वह वुमन इंटरनेशनल मास्टर बन गईं और नवंबर 1983 में, उन्होंने फिर से एशियाई महिला का खिताब जीता, जब प्रतियोगिता कुआलालंपुर, मलेशिया में आयोजित की गई थी। खडिलकर ने वर्ष 1976 में भारतीय पुरुषों की चैम्पियनशिप में प्रतिस्पर्धा करने वाली पहली महिला बनी एक पुरुष प्रतियोगिता में उनकी भागीदारी के कारण उच्च न्यायालय में उनके खिलाफ अपील की गई थी। और जिसके बाद विश्व शतरंज महासंघ के अध्यक्ष मैक्स यूवे ने यह नियम बनाया कि महिलाओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय चैंपियनशिप से वर्जित नहीं किया जा सकता है। उन्होंने प्रतियोगिता में तीन राज्य चैंपियन - गुजरात के गौरांग मेहता, महाराष्ट्र के अब्दुल जब्बार और पश्चिम बंगाल के ए. के. घोष को हराया। खडिलकर ने दुबई (1986) में ब्यूनस आयर्स (1978), वालेटा (1980), ल्यूसर्न (1982), थेसालोनिकी (1984) में शतरंज ओलंपियाड में भाग लिया। खंडिलकर ने दुबई और मलेशिया में दो बार जोनल चैंपियनशिप जीती, और वर्ल्ड नंबर 8 खिलाड़ी बनी। वह 1989 में लंदन में शतरंज के कंप्यूटर को हराने वाली पहली एशियाई खिलाड़ी थीं। रोहिणी ने 56 देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए कई देशों का दौरा किया है। प्रत्येक अवसर पर, वह भारत सरकार द्वारा एक शतरंज राजदूत के रूप में प्रायोजित की गई थी। उनकी यात्राओं में पोलैंड, यूएसएसआर और यूगोस्लाविया के तत्कालीन कम्युनिस्ट देशों की यात्राएं शामिल थीं, जिन्हें उस समय के प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी द्वारा प्रोत्साहित किया गया था। 1993 में, रोहिणी शतरंज से सेवानिवृत्त हुई और उन्होंने मुद्रण प्रौद्योगिकी संस्थान में एक छात्र के रूप में दाखिला लिया। वह अपने सहकर्मी में प्रथम स्थान पर आयीं, उन्होंने स्वर्ण पदक अर्जित किया, और Agfa-Gevaert द्वारा मुद्रण डिप्लोमा दिया गया। रोहिणी महाराष्ट्र के एक शाम के अखबार की पहली महिला संपादक बनीं। वह नवकाल की सहायक संपादक हैं और 16 दिसंबर 1998 से संध्याकाल की संपादक हैं।
1977 में, रोहिणी ने शतरंज में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्रपति पुरस्कार जीता। इसके बाद, उन्हें खेलों में भारत के सर्वोच्च सम्मान, अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें शतरंज के कारनामों के लिए महाराष्ट्र कन्या भी घोषित किया गया है।

📅 Last update : 2021-04-01 00:30:29

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