नीरजा भनोट का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे नीरजा भनोट (Neerja Bhanot) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए नीरजा भनोट से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Neerja Bhanot Biography and Interesting Facts in Hindi.

नीरजा भनोट का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान

नामनीरजा भनोट (Neerja Bhanot)
उपनामलाडो
जन्म की तारीख07 सितम्बर 1963
जन्म स्थानचंडीगढ़, भारत
निधन तिथि05 सितम्बर 1986
माता व पिता का नामरमा भनोट / हरीश भनोट
उपलब्धि1987 - अशोक चक्र से सम्मानित प्रथम भारतीय महिला
पेशा / देशमहिला / विमान परिचारिका  / भारत

नीरजा भनोट (Neerja Bhanot)

नीरजा मुंबई में पैन ऍम एयरलाइन्स की विमान परिचारिका (एयर होस्टेस) थीं। नीरजा का जन्म 07 सितंबर 1963 को चंडीगढ़ में हुआ था। नीरजा की प्रारंभिक शिक्षा अपने गृहनगर चंडीगढ़ के सैक्रेड हार्ट सीनियर सेकेण्डरी स्कूल में हुई। इसके पश्चात् उनकी शिक्षा मुम्बई के स्कोटिश स्कूल और सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज में हुई। नीरजा का विवाह वर्ष 1985 में हुआ था।

नीरजा भनोट का जन्म 07 सितंबर 1963 को चंडीगढ़ में हुआ था। नीरजा के माता पिता उनको प्यार से लाडो कहकर पुकारते थे। इनके पिता का नाम हरीश भनोट तथा माता का नाम रामा भनोट था। नीरजा भनोट के पिता पत्रकार का कम किया करते थे और इनकी माता घर में ग्रहणी थी| इनके दो भाई थे जिनका नाम अखिल और अनीश भनोट था|
नीरजा भनोट का निधन 5 सितंबर 1986 (आयु 22 वर्ष) को कराची , सिंध , पाकिस्तान में हुआ था। जब वह पाकिस्तान के कराची हवाई अड्डे से अपने विमान को उड़ाने के लिए तैयार थी तभी चार हथियारबंद लोगों ने इनके विमान का अपहरण कर लिया था। विमान में 380 यात्री और चालक दल के 13 सदस्य सवार थे। जिनमे से कुछ लोगो को इन्होने बचाया और आखरी दम तक बचाती रही लेकिन 17 घंटो के बाद अतंकवादियो ने विमान में विस्फोट करदिया और विमान के परकच्चे उड़ गए और विमान में बचे सारे लोगो की मृत्यु हो गयी।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा चंडीगढ़ के सेक्रेड हार्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्राप्त की। जब परिवार बंबई चला गया, तो उसने बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल में अपनी पढ़ाई जारी रखी और फिर सेंट जेवियर कॉलेज, बॉम्बे से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। यह बॉम्बे में था, जहां उसे पहली बार मॉडलिंग असाइनमेंट के लिए स्पॉट किया गया था जिसने उसके मॉडलिंग करियर की शुरुआत की। वह अभिनेता राजेश खन्ना की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं और जीवन भर उनकी फिल्मों के उद्धरणों का उल्लेख करती थीं।
नीरजा वर्ष 1985 में विवाह करके पति के साथ खड़ी देश चली गई लेकीन उनकी ये शादी ज्यादा समय तक ना चल सकी और विवाह के दो महीने बाद वे दौबरा दिल्ली आ गई और तब उन्होंने पैन एम में विमान परिचारिका की नौकरी के लिये आवेदन किया और चुने जाने के बाद मियामी में ट्रेनिंग के बाद वापस लौटीं। उन्होंने पैन एम में अपने काम के दौरान एक साथ सफल मॉडलिंग करियर भी बनाया था।
मुम्बई से न्यूयॉर्क के लिये रवाना पैन ऍम-73 को कराची में चार आतंकवादियों ने अपहृत कर लिया और सारे यात्रियों को बंधक बना लिया। नीरजा उस विमान में सीनियर पर्सर के रूप में नियुक्त थीं और उन्हीं की तत्काल सूचना पर चालक दल के तीन सदस्य विमान के कॉकपिट से तुरंत सुरक्षित निकलने में कामयाब हो गये। पीछे रह गयी सबसे वरिष्ठ विमानकर्मी के रूप में यात्रियों की जिम्मेवारी नीरजा के ऊपर थी और जब १७ घंटों के बाद आतंकवादियों ने यात्रियों की हत्या शुरू कर दी और विमान में विस्फोटक लगाने शुरू किये तो नीरजा विमान का इमरजेंसी दरवाजा खोलने में कामयाब हुईं और यात्रियों को सुरक्षित निकलने का रास्ता मुहैय्या कराया। वे चाहतीं तो दरवाजा खोलते ही खुद पहले कूदकर निकल सकती थीं किन्तु उन्होंने ऐसा न करके पहले यात्रियों को निकलने का प्रयास किया। इसी प्रयास में तीन बच्चों को निकालते हुए जब एक आतंकवादी ने बच्चों पर गोली चलानी चाही नीरजा के बीच में आकार मुकाबला करते वक्त उस आतंकवादी की गोलियों की बौछार से नीरजा की मृत्यु हुई। नीरजा के इस वीरतापूर्ण आत्मोत्सर्ग ने उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हीरोइन ऑफ हाईजैक के रूप में मशहूरियत दिलाई।
नीरजा को भारत सरकार ने इस अदभुत वीरता और साहस के लिए मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया जो भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है।अपनी वीरगति के समय नीरजा भनोट की उम्र 23 साल थी। इस प्रकार वे यह पदक प्राप्त करने वाली पहली महिला और सबसे कम आयु की नागरिक भी बन गईं। पाकिस्तान सरकार की ओर से उन्हें तमगा-ए-इन्सानियत से नवाज़ा गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीरजा का नाम हीरोइन ऑफ हाईजैक के तौर पर मशहूर है। वर्ष 2004 में उनके सम्मान में भारत सरकार ने एक डाक टिकट भी जारी किया[4] और अमेरिका ने वर्ष 2005 में उन्हें जस्टिस फॉर क्राइम अवार्ड दिया है। पाकिस्‍तान ने नीरजा को ‘तमगा-ए-इंसानियत पुरस्‍कार" से सम्‍मानित किया, जो मानवता की असाधारण सेवा के लिए दिया जाता है। वहीं अमेरिका के कोलंबिया के अटॉर्नी ऑफिस की ओर से नीरजा को ‘जस्टिस फॉर क्राइम अवॉर्ड" दिया गया। उनकी स्मृति में एक संस्था नीरजा भनोट पैन ऍम न्यास की स्थापना भी हुई है जो उनकी वीरता को स्मरण करते हुए महिलाओं को अदम्य साहस और वीरता हेतु पुरस्कृत करती है। नीरजा की कहानी पर आधारित साल 2016 में एक फ़िल्म भी बनी, जिसमें उनका किरदार सोनम कपूर ने अदा किया था।

📅 Last update : 2021-09-07 00:30:19

🙏 If you liked it, share with friends.