डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा (Sachchidananda Sinha) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Sachchidananda Sinha Biography and Interesting Facts in Hindi.

डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान

नामडॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा (Sachchidananda Sinha)
जन्म की तारीख10 नवम्बर 1871
जन्म स्थानआरा, बंगाल प्रेसीडेंसी, (वर्तमान बिहार में)
निधन तिथि06 मार्च 1950
पिता का नाम बक्सी शिव प्रसाद सिन्हा
उपलब्धि1946 - भारतीय संविधान सभा के प्रथम अध्यक्ष
पेशा / देशपुरुष / राजनीतिज्ञ / भारत

डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा (Sachchidananda Sinha)

डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा भारत के प्रसिद्ध सांसद, शिक्षाविद, अधिवक्ता तथा पत्रकार थे। वे भारत की संविधान सभा के प्रथम अध्यक्ष थे।सच्चिदानन्द सिन्हा 1910 के चुनाव में चार महाराजों को परास्त कर केन्द्रीय विधान परिषद में प्रतिनिधि निर्वाचित हुए। वे प्रिवी कौंसिल के सदस्य भी थे।

डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा का जन्म 10 नवम्बर 1871 को बक्सर ज़िले के मुरार गांव में हुआ था। यह एक धनी कायस्थ परिवार से थे| इनके पिता का नाम बख्शी शिव प्रसाद सिन्हा जोकी डुमरांव महाराज के यह मुख्य तहसीलदार के रूप में कम किया करते थे|
डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा का निधन 6 मार्च 1950 (आयु 78 वर्ष) पटना , बिहार , भारत में हुआ था।
उन्होने लन्दन में कानून की शिक्षा प्राप्त की और बैरिस्टर बने। इंग्लैण्ड से स्वदेश लौटने पर 1891-92 में उन्होने अलग बिहार राज्य की माँग की और आन्दोलन चलाया। उस समय वे मुश्किल से बीस वर्ष के थे। और सिर्फ कुछ ही दिन अध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे।
इंग्लैंड से स्वदेश लौटने पर 1891- 92 में उन्होंने अलग बिहार राज्य की माँग के लिए आन्दोलन चलाया और आख़िरकार 22 मार्च 1912 को बिहार बंगाल से अलग हो कर एक स्वतंत्र रियासत हो गया। इंग्लैंड से 1893 में हिंदुस्तान वापस लौट कर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सालों तक प्रैक्टिस की। उन्होंने साल 1894 से 1898 तक ख़ुदाबख़्श लाईब्रेरी के सेक्रेटरी पद पर भी काम किया था। जब 09 दिसम्बर 1946 को भारत के लिए संविधान का निर्माण प्रारंभ हुआ, तो तजुर्बा और क़ाबिलयत को नज़र मे रखते हुए डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को भारतीय संविधान का प्रथम अध्यक्ष नियुक्त किया था। डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा प्रथम भारतीय व्यक्ति है, जिन्हें एक प्रान्त का राज्यपाल और हाउस लार्डस का सदस्य बनने का श्रेय प्राप्त है। 1921 मे डॉ. सिन्हा को 5 साल के लिए अर्थ सचिव और कानून मंत्री बनाया गया और इस तरह वह पहले हिन्दुस्तानी बने जो इस पद पर पहुंचे थे। 26-28 दिसम्बर 1912 को बांकीपुर पटना मे राओ बहादुर रगुनाथ मधोलकर की अध्यक्षता मे हुए कांग्रेस के 27वें सेशन के स्वागत कमेटी के जनरल सेक्रटरी का पद सच्चिदानंद सिन्हा ने ही संभाला था।
औरंगाबाद का एक घटक महाविद्यालय उन्हें समर्पित है और उनका नाम सच्चिदानंद सिन्हा महाविद्यालय था, जिसकी स्थापना आजादी के पहले प्रख्यात गांधीवादी अनुग्रह नारायण सिन्हा के साथ-साथ अखौरी कृष्ण प्रकाश सिन्हा ने की थी, 1943 में, जिन्होंने सिन्हा के नाम पर उन्हें जीवित श्रद्धांजलि दी। जो उस समय 72 वर्ष का था। जनवरी 2015 में, जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत का दौरा किया, तो उन्हें अमेरिका से भारत भेजे गए पहले टेलीग्राम की एक प्रति भेंट की गई। यह तत्कालीन कार्यवाहक राज्य सचिव डीन एचेसन द्वारा सिन्हा को भेजा गया था।

📅 Last update : 2022-03-06 00:30:52

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