विषाणु और प्रोटोजोआ द्वारा मनुष्य मे होने वाले रोग और उनके लक्षण

✅ Published on August 14th, 2021 in भारतीय रेलवे, विज्ञान, सामान्य ज्ञान अध्ययन

विषाणु और प्रोटोजोआ द्वारा मनुष्य मे होने वाले रोग: (Human diseases caused by Viruses and Protozoa in Hindi)

रोग किसे कहते है और रोग किसे कहा जाता है?

रोग का अर्थ: रोग अर्थात अस्वस्थ होना। यह चिकित्साविज्ञान का मूलभूत संकल्पना है। प्रायः शरीर के पूर्णरूपेण कार्य करने में में किसी प्रकार की कमी होना ‘रोग’ कहलाता है। किन्तु रोग की परिभाषा करना उतना ही कठिन है जितना ‘स्वास्थ्य’ को परिभाषित करना। आइये जानते है विषाणु और जीवाणु द्वारा मानव शरीर में कौन-2 रोग हो सकते है और उनके लक्षण क्या होते है।

विषाणु द्वारा मनुष्य मे होने वाले रोग:

रोग प्रभावित अंग जीवाणु/विषाणु
निमोनिया (Pneumoniae) फेफड़े डिप्लोकोकस न्यूमोनी (Diplococcus pneumoniae)
खांसी, जो हरा, पीला या यहां तक कि खूनी बलगम का उत्पादन कर सकती है, बुखार, पसीना और कंपकंपी, सांस लेने में कठिनाई, तेज, उथली श्वास लेना, सीने में तेज या चुभने वाला दर्द जो गहरी सांस लेने या खांसने पर बढ़ जाता है, उल्टी, खासकर छोटे बच्चों में।
टिटनेस (Tetanus) तंत्रिका तंत्र तथा मांसपेशियां क्लास्ट्रीडियम टिटैनी (Clostridium tetani)
जबड़ा ऐंठन, अचानक अनैच्छिक मांसपेशियों में कसाव (मांसपेशियों में ऐंठन) – अक्सर पेट में पूरे शरीर में दर्दनाक मांसपेशियों में अकड़न, निगलने में परेशानी, मरोड़ते या घूरना (दौरे), सिरदर्द बुखार और पसीना, रक्तचाप और तेज़ हृदय गति में परिवर्तन
हैजा (Cholera) आंत या आहार नाल विब्रियो कॉलेरी (Asiatic cholera)
निर्जलीकरण, वमन, दस्त, पैर की मरोड़, बेचैनी या चिड़चिड़ापन, उल्टी करना आदि।
डिप्थीरिया (Diphtheria) फेफड़े कोरीनेबैक्टीरियम डिफ्थेरी (corynebacterium diphtheriae)
आपके गले और टॉन्सिल को ढकने वाली एक मोटी, धूसर झिल्ली, एक गले में खराश और स्वर बैठना, आपकी गर्दन में सूजी हुई ग्रंथियां (बढ़ी हुई लिम्फ नोड्स) सांस लेने में कठिनाई या तेजी से सांस लेना, नाक बहना, बुखार और ठंड लगना, अस्वस्थता
काली खांसी (Whooping cough) स्वसन तंत्र हिमोफिलस परटूसिस (Haemophilus pertussis)
1 से 2 सप्ताह के बाद और जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, पर्टुसिस के पारंपरिक लक्षण प्रकट हो सकते हैं और इसमें शामिल हैं:- कई लोगों के पैरॉक्सिस्म्स, तेज़ खांसी के बाद एक तेज़ “हूप” ध्वनि, खांसने के दौरान या बाद में उल्टी होना (फेंकना), खांसने के बाद थकावट (बहुत थका हुआ)
उपदंश (Syphilis) जनन अंग, मस्तिस्क तंत्रिका तंत्र ट्रेपोनेमा पैलिडम (Treponema pallidum)
जनांगों पर चकत्ते बनना, लकवा, त्वचा पर दाने, बालों का झड़ना
प्लेग (Bubonic plague) बगलें या काखें, फेफड़े, लाल रुधिर कणिकाएं येर्सिनिया पेस्टिस (Yersinia pestis)
संक्रमण से ग्रसित व्यक्ति को सिर दर्द, बुखार आना, ठंड लगने की समस्या, कमजोरी महसूस होना, शरीर के एक से अधिक अंगों में सूजन होना, लिंफ नोड्स या पेट में भी दर्द हो सकता है।
मेनिनजाइटिस (Meningitis) मस्तिष्क के ऊपर की झिल्लियाँ, मस्तिष्क तथा स्पाइनल कार्ड निशेरिया मेनिंजाइटिडिस (Meningococcus)
अचानक तेज बुखार, गर्दन में अकड़न, गंभीर सिरदर्द जो सामान्य से अलग लगता है, मतली या उल्टी के साथ सिरदर्द
भ्रम या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, बरामदगी, नींद आना या जागने में कठिनाई, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, कोई भूख या प्यास नहीं, त्वचा पर लाल चकत्ते (कभी-कभी, जैसे मेनिंगोकोकल मेनिन्जाइटिस में – meningococcal meningitis)
मियादी बुखार (Typhoid fever) आंत का रोग सालमोनेला टाइफी (Salmonella Typhi)
दुर्बलता, पेट दर्द, सिरदर्द, दस्त या कब्ज, खांसी, भूख में कमी
कुष्ट/कोढ़ (Leprosy) त्वचा एवं तंत्रिका कोशिकाएं माइकोबैक्टीरियम लेप्री (Mycobacterium leprae)
त्वचा के फीके पड़े धब्बे, आमतौर पर सपाट, जो सुन्न हो सकते हैं और फीके दिख सकते हैं (चारों ओर की त्वचा की तुलना में हल्का), त्वचा पर वृद्धि (गांठ) मोटी, सख्त या सूखी त्वचा, पैरों के तलवों में दर्द रहित छाले, दर्द रहित सूजन या चेहरे या कान के लोब पर गांठ, भौहें या पलकों का नुकसान
क्षय रोग (Tuberculosis) शरीर का कोई भी अंग, विशेषकर फेफड़े माइकोबैक्टीरियम ट्यूबर्क्युलोसिस (Mycobacterium tuberculosis)
खराब खांसी (2 सप्ताह से अधिक समय तक चलने वाली), सीने में दर्द, खांसी खून या थूक (बलगम), थकान या कमजोरी
भूख में कमी, वजन घटना, ठंड लगना, बुखार आदि।
स्वाइन फ्लू (Swine flu) सम्पूर्ण शरीर H1 N1 फ्लू विषाणु (अर्थोमिक्सोवायरस)
खांसी, बुखार, गले में खरास, भरी हुई या बहती नाक, शरीर मैं दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना, थकान
एबोला विषाणु सम्पूर्ण शरीर एबोला विषाणु ( फाइलोंविषाणु)
रक्तस्रावी ज्वर, सर दर्द, गले में खरास, अतिसार, वृक्क तथा यकृत की अक्रियशीलता, बाह्र्य एवं आंतरिक स्राव

प्रोटोजोआ क्या होता है?

प्रोटोजोआ -प्रॉटोजोआ के प्राणी बहुत ही सूक्ष्म ,एइक्कोशिकिय या अकोशिकिय होते है। इन्हें प्राथमिक जंतु भी कहते है। प्रजीवगण (प्रोटोज़ोआ) एक एककोशिकीय जीव है। इनकी कोशिका यूकरयोटिक प्रकार की होती है। ये साधारण सूक्ष्मदर्शी यंत्र से आसानी से देखे जा सकते हैं। कुछ प्रोटोज़ोआ जन्तुओं या मनुष्य में रोग उत्पन्न करते हैं, उन्हे रोगकारक प्रोटोज़ोआ कहते हैं।

प्रोटोजोआ द्वारा मनुष्य मे होने वाले रोग:

रोग प्रभावित अंग परजीवी
पायरिया (Gum disease) दातों की’जड़ें तथा मसूड़े एण्टअमीबा जिंजीवेलिस (Entamoeba gingivalis)
मसूड़ों में सूजन, रुधिर स्राव तथा मवाद का निकलना
दस्त (Diarrhoea) बड़ी आंत ट्राइकोमोनास होमिनिस (Pentatrichomonas hominis)
बड़ी आंत में सूजन व दर्द, बार बार दस्त का होना
अमीबिएसिस (Amoebiasis) बड़ी आतं (कोलोन) एण्टअमीबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica)
कोलोन में सूजन, दस के साथ श्लेष्म का आना
घातक अतिसार या पेचिस (Diarrhea) आंत के अगले भाग जियार्डिया लैम्बलिया (Giardia duodenalis)
दस्त,सिर दर्द तथा कभी कभी पीलिया रोग का जनक
सुजाक (पुरुषों में) तथा स्वेत प्रदर (स्त्रियों में) पुरुषो में मूत्रमार्ग तथा स्त्रियों में योनि ट्राइकोमोनास वेजाइनलिस (Trichomonas vaginalis)
मूत्र-त्याग में जलन व दर्द, स्त्रियों में स्वेत द्रव का निकलना तथा दर्द ट्राइकोमोनस वेजाइनेलिस
दस्त (Diarrhoea) छोटी आंत आइसोस्पेरा होमिनिस (Isospora hominis)
पेट में ऐठन तथा दस्त
काला-जार (Black fever) रुधिर, लसीका, प्लीहा तथा अस्थिमज्जा लीशमैनिया (Leishmania)
ज्वर, एनीमिया, प्लीहा तथा यकृत में सूजन
निद्रा (Sleep disorder) रुधिर, सेरिब्रोस्पाइनल द्रव तथा केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ट्रिपैनोसोमा गैम्बियन्स (Trypanosoma gambiense)
तीव्र ज्वर, बेहोशी, रोगी को लम्बी निद्रा
मलेरिया (Malaria) लाल रुधिराणु, प्लीहा तथा यकृत प्लाज्मोडियम (Plasmodium)
तीव्र ज्वर, सिर दर्द, कमर में दर्द

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