विषाणु और प्रोटोजोआ द्वारा मनुष्य मे होने वाले रोग और उनके लक्षण

✅ Published on February 2nd, 2018 in भारतीय रेलवे, विज्ञान, सामान्य ज्ञान अध्ययन

विषाणु और प्रोटोजोआ द्वारा मनुष्य मे होने वाले रोग: (Human diseases caused by Viruses and Protozoa in Hindi)

रोग किसे कहते है और रोग किसे कहा जाता है?

रोग का अर्थ: रोग अर्थात अस्वस्थ होना। यह चिकित्साविज्ञान का मूलभूत संकल्पना है। प्रायः शरीर के पूर्णरूपेण कार्य करने में में किसी प्रकार की कमी होना ‘रोग’ कहलाता है। किन्तु रोग की परिभाषा करना उतना ही कठिन है जितना ‘स्वास्थ्य’ को परिभाषित करना। आइये जानते है विषाणु और जीवाणु द्वारा मानव शरीर में कौन-2 रोग हो सकते है और उनके लक्षण क्या होते है।

विषाणु द्वारा मनुष्य मे होने वाले रोग:

रोग प्रभावित अंग लक्षण जीवाणु/विषाणु
निमोनिया फेफड़े फेफड़ों में संक्रमण,फेफड़ों में जल भर जाना,तीव्र ज्वर,श्वास लेने में पीड़ा डिप्लोकोकस न्यूमोनी
टिटेनस तंत्रिका तंत्र तथा मांसपेशियां शरीर में झटके लगना,जबड़ा ना खुलना.बेहोशी क्लास्ट्रीडियम टिटैनी
हैजा आंत या आहार नाल निर्जलीकरण,वमन,दस्त विब्रिओ कॉलेरी
डिप्थीरिया फेफड़े  तीव्र ज्वर,श्वास लेने में पीड़ा,दम घुटना कोरीनेबैक्टीरियम डिफ्थेरी
काली खांसी स्वसन तंत्र निरंतर आने वाली तेज़ खांसी,खांसी के साथ वमन हिमोफिलस परटूसिस
सिफिलिस जनन अंग, मस्तिस्क तंत्रिका तंत्र जनांगों पर चकत्ते बनना,लकवा,त्वचा पर दाने,बालों का झड़ना ट्रेपोनेमा पैलिडम
प्लेग बगलें या काखें, फेफड़े, लाल रुधिर कणिकाएं तीव्र ज्वर,कंखो में गिल्टी का निकलना,बेहोशी पाश्चुरेला पेस्टिस
मेनिनजाइटिस मस्तिष्क के ऊपर की झिल्लियाँ, मस्तिष्क तथा स्पाइनल कार्ड तीव्र ज्वर,बेहोशी,मस्तिष्क की झिल्ली में सूजन, निशेरिया मेनिंजाइटिडिस
मियादी बुखार आंत का रोग ज्वर,दुर्बलता,अधिक प्रकोप होने पर आँतों में छेड़ हो जाना सालमोनेला टाइफी
कुष्ट/कोढ़ त्वचा एवं तंत्रिका कोशिकाएं व्रणों तथा गांठो का बन जाना,हाथ पैर की अँगुलियों के ऊतकों का धीरे-धीरे नष्ट होना माइकोबैक्टीरियम लेप्री
क्षय रोग शरीर का कोई भी अंग, विशेषकर फेफड़े ज्वर,खांसी,दुर्बलता,साँस फूलना,बलगम आना तथा ठुक में खून आना माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस
स्वाइन फ्लू सम्पूर्ण शरीर कंपकपी या बगैर कंपकपी के ज्वर, गले में खरास, साँस लेने में तकलीफ, वामन एवं थकान H1 N1 फ्लू विषाणु (अर्थोमिक्सोवायरस)
एबोला विषाणु सम्पूर्ण शरीर रक्तस्रावी ज्वर, सर दर्द, गले में खरास, अतिसार, वृक्क तथा यकृत की अक्रियशीलता, बाह्र्य एवं आंतरिक स्राव एबोला विषाणु ( फाइलोंविषाणु)

प्रोटोजोआ द्वारा मनुष्य मे होने वाले रोग:

रोग प्रभावित अंग लक्षण परजीवी
पायरिया दातों की’जड़ें तथा मसूड़े मसूड़ों में सूजन, रुधिर स्राव तथा मवाद का निकलना एण्टअमीबा जिंजीवेलिस
दस्त बड़ी आंत बड़ी आंत में सूजन व दर्द, बार बार दस्त का होना ट्राइकोमोनस होमिनिस
अमिबिएसिस बड़ी आतं (कोलोन) कोलोन में सूजन, दस के साथ श्लेष्म का आना एण्टअमीबा हिस्टोलिटिका
घातक अतिसार या पेचिस आंत के अगले भाग दस्त,सिर दर्द तथा कभी कभी पीलिया रोग का जनक जिआरडिया लैम्बलिया
सुजाक (पुरुषों में) तथा स्वेत प्रदर (स्त्रियों में) पुरुषो में मूत्रमार्ग तथा स्त्रियों में योनि मूत्र-त्याग में जलन व दर्द, स्त्रियों में स्वेत द्रव का निकलना तथा दर्द ट्राइकोमोनस वेजाइनेलिस ट्राइकोमोनस वेजाइनेलिस
दस्त छोटी आंत पेट में ऐठन तथा दस्त आइसोस्पेरा होमिनिस
कला-जार रुधिर, लसीका, प्लीहा तथा अस्थिमज्जा ज्वर, एनीमिया, प्लीहा तथा यकृत में सूजन लीशमनिया
निद्रा रुधिर, सेरिब्रोस्पाइनल द्रव तथा केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तीव्र ज्वर, बेहोशी, रोगी को लम्बी निद्रा ट्रिपैनोसोमा गैम्बियन्स
मलेरिया लाल रुधिराणु, प्लीहा तथा यकृत तीव्र ज्वर, सिर दर्द, कमर में दर्द प्लाज्मोडियम

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