विश्व अल्जाइमर दिवस (21 सितम्बर)

Inter National Days: World Alzheimers Day In Hindi

विश्व अल्जाइमर दिवस (21 सितम्बर): (21 September: World Alzheimer’s Day in Hindi)

विश्व अल्जाइमर दिवस कब मनाया जाता है?

प्रतिवर्ष विश्व के विभिन्न देशों में 21 सितम्बर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। यह दिवस अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया के बारे में जागरूकता प्रसारित करने के लिए मनाया जाता है। वर्ष 2016 में विश्व अल्जाइमर दिवस अभियान का विषय था- “मुझे याद रखें”। इस दिन का उद्देश्य विश्व भर के लोगों को डिमेंशिया के लक्षणों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करना ही नहीं है, अपितु इसका उद्देश्य डिमेंशिया से पीड़ित रोगियों अथवा इस बीमारी के कारण मृत्यु को प्राप्त होने वाले रोगियों को भी न भूलना है।

अल्जाइमर रोग किसे कहते है?

अल्जाइमर रोग ‘भूलने का रोग’ है। इसका नाम अलोइस अल्जाइमर पर रखा गया है, जिन्होंने सबसे पहले इसका विवरण दिया। इस बीमारी के लक्षणों में याददाश्त की कमी होना, निर्णय न ले पाना, बोलने में दिक्कत आना तथा फिर इसकी वजह से सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं की गंभीर स्थिति आदि शामिल हैं। रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवनशैली और सर में कई बार चोट लग जाने से इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है। अमूमन 60 वर्ष की उम्र के आसपास होने वाली इस बीमारी का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है।

अल्जाइमर की बीमारी के लक्षण या कारण:

  • अल्जाइमर रोग प्रगतिशील मस्तिष्क रोग हैं। इस रोग की शुरुआत चीज़े भूलने एवं कम स्तर पर याददाश्त में कमी विकसित होने के साथ होती है, जिसके परिणामस्वरूप रोगी को हाल-फ़िलहाल की घटनाओं को याद रखने में कठिनाई का सामना करना पड़ता हैं। अंततः यह दैनिक गतिविधियों, यहां तक कि बुनियादी ज़रूरतों की देखभाल करने में अक्षमता पैदा करता हैं।
  • अल्जाइमर रोग ज़्यादातर बुजुर्ग लोगों को प्रभावित करता है। आज भारत में बुजुर्ग लोगों की आबादी बढ़ रहीं हैं। यह कारण बीमारी होने का अलार्म है।
  • अल्जाइमर रोग के सही कारण अभी तक ज्ञात नहीं है। मस्तिष्क में होने वाली कुछ जटिल परेशानियाँ इस बीमारी का कारण हैं।
  • अल्जाइमर रोग का कोई उपचार उपलब्ध नहीं है। पीड़ित रोगी का प्रभावी ढंग से उपचार करने के लिए रोग की जल्दी जानकारी से लाभ मिलता हैं।
  • उपचार के तौर-तरीका में औषधीय, मनोवैज्ञानिक एवं देखभाल करने के तमाम पहलु शामिल हैं।
  • इस बीमारी के उपचार में पारिवारिक एवं सामाजिक सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

चेतावनी के 10 संकेत:

  • याददाश्त खोना: हाल ही में सीखी गयी सूचना को भूलना डीमेंसिया का सबसे सामान्य आरंभिक लक्षण है। व्यक्ति अक्सर भूलने लगता है और बाद में उसे याद नहीं कर पाता।
  • सामान्य कामकाज करने में कठिनाई: डीमेंसिया से पीड़ित व्यक्ति दैनिक कामकाज की योजना बनाने और उन्हें कार्यान्वित करने में अक्सर कठिनाई महसूस करता है। कई व्यक्ति तो खाना बनाने में अपनाये जानेवाले कदम या टेलीफोन करने या कोई खेल खेलने में भी कठिनाई महसूस करता है।
  • भाषा के साथ समस्या: अल्जाइमर बीमारी का मरीज साधारण शब्द या असामान्य समानार्थक शब्द भूलने लगता है और उसकी बोली या लिखावट अस्पष्ट होती जाती है। उदाहरण के लिए वह टूथब्रश भूल जाता है और अपने मुंह के लिए वह चीज मांगता है।
  • समय और स्थान में असमन्वय: अल्जाइमर का मरीज अपने पड़ोस में भी खो जाता है। वह यह भूल जाता है कि वह कहां है, वहां वह कैसे आया और घर वापस कैसे जाना है।
  • निर्णय लेने में कठिनाई या गलत निर्णय: अल्झीमर्स का मरीज अनाप-शनाप कपड़े पहन सकता है, गरमी में बहुत से कपड़े या ठंड में काफी कम कपड़े। उसके निर्णय लेने की क्षमता कम होती है। वह अंजान लोगों को बहुत सारे पैसे दे सकता है।
  • संक्षिप्त सोच में समस्या: अल्जाइमर का मरीज कठिन मानसिक कार्यों में असामान्य कठिनाई महसूस करने लगता है, जैसे वह यह नहीं समझ पाता कि कोई संख्या क्यों है और उनका उपयोग कैसे किया जाता है।

  • चीजों को यत्र-तत्र रखना: अल्जाइमर का मरीज चीजों को यत्र-तत्र रख देता है। उदाहरण के लिए वह आयरन (इस्तरी) को फ्रिज में रख सकता है।
  • मूड या स्वभाव में बदलाव: अल्जाइमर का मरीज अपने स्वभाव में तेजी से बदलाव प्रदर्शित करता है। जैसे वह अकारण ही रोने या गुस्सा करने या हंसने लग जाता है।
  • व्यक्तित्व में बदलाव: डीमेंसिया से पीड़ित व्यक्ति नाटकीय ढंग से बदल सकता है। वह बेहद उलझनपूर्ण, संदेह करनेवाला, भयभीत या किसी परिजन पर अत्यधिक निर्भर बन जाता है।
  • प्रयास करने में अक्षमता: अल्जाइमर का मरीज बेहद निष्क्रिय, टीवी के सामने घंटों बैठनेवाला, बहुत अधिक सोनेवाला या सामान्य गतिविधियों को पूरा करने में अनिच्छुक हो सकता है।

अल्जाइमर रोग की रोकथाम के लिए सुझाव:

  • शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं मनोरंजनात्मक गतिविधियों में स्वयं को व्यस्त रखें। जैसे कि: पढ़ना, प्रसन्नता के लिए लेखन, संगीतमय वाद्ययंत्र बजाना, प्रौढ़ शिक्षा पाठ्यक्रम में भाग लेना।
  • घर के अंदर खेलें जाने वाले खेल जैसे कि वर्ग पहेली, पहेली, स्क्रैबल एवं शतरंज खेलना।
  • तैराकी करना।
  • समूह खेल जैसे कि गेंदबाजी करना।
  • घूमना।
  • योग एवं ध्यान।

सामान्य ज्ञान अपनी ईमेल पर पाएं!

Leave a Reply

Your email address will not be published.