विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस (11 सितम्बर)

Inter National Days: World First Aid Day In Hindi

विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस (11 सितम्बर): (11 September: World First Aid Day in Hindi)

विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस कब मनाया जाता है?

हर साल सम्पूर्ण विश्व में 11 सितंबर अन्तर्राष्ट्रीय प्राथमिक चिकित्सा दिवस अथवा विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

प्राथमिक चिकित्सा किसे कहते है?

किसी रोग के होने या चोट लगने पर किसी अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा जो सीमित उपचार किया जाता है उसे प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) कहते हैं। इसका उद्देश्य कम से कम साधनों में इतनी व्यवस्था करना होता है कि चोटग्रस्त व्यक्ति को सम्यक इलाज कराने की स्थिति में लाने में लगने वाले समय में कम से कम नुकसान हो। अतः प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षित या अप्रशिक्षित व्यक्तिओं द्वारा कम से कम साधनों में किया गया सरल उपचार है। कभी-कभी यह जीवन रक्षक भी सिद्ध होता है।

प्राथमिक चिकित्सा कब दी जाती है?

प्राथमिक चिकित्सा निम्नलिखित इमरजेंसी अवस्था में दी जा सकती है – दम घुटना(पानी में डूबने के कारण, फांसी लगने के कारण या साँस नल्ली में किसी बाहरी चीज का अटक जाना), ह्रदय गति रूकना-हार्ट अटैक, खून बहना, शारीर में जहर का असर होना, जल जाना, हीट स्ट्रोक(अत्यधिक गर्मी के कारण शारीर में पानी की कमी), बेहोश या कोमा, मोच, हड्डी टूटना और किसी जानवर के काटने पर।

प्राथमिक चिकित्सा के उदेश्य:

  • घायल व्यक्ति का जान बचाना।
  • बिगड़ी हालत से बाहरा निकालना।
  • तबियत के सुधार में बढ़ावा देना।

प्राथमिक चिकित्सा के सिद्धांत:

  • सांस की जाँच करें और ABC के नियम का पालन करें।
  • अगर चोट लगी है और रक्त बह रहा हो तो जल्द से जल्द रक्तस्राव को रोकें।
  • अगर घायल व्यक्ति को सदमा लगा हो तो उसे समझाएं और सांत्वना दें।
  • अगर व्यक्ति बेहोश हो तो होश में लाने की कोशिश करें।
  • अगर कोई हड्डी टूट गयी हो, तो सीधा करें और दर्द को कम करें।
  • जितना जल्दी हो सके घायल व्यक्ति को नजदीकी अस्पताल या चिकित्सालय पहुंचाएं।

प्राथमिक उपचार के मूल तत्व:

  • रोगी में श्वास, नाड़ी इत्यादि जीवनचिन्ह न मिलने पर उसे तब तक मृत न समझें जब तक डाक्टर आकर न कह दे।
  • रोगी को तत्काल चोट के कारण से दूर करना चाहिए।
  • जिस स्थान से अत्यधिक रक्तस्त्राव होता हो उसका पहले उपचार करें।
  • श्वासमार्ग की सभी बाधाएँ दूर करके शुद्ध वायुसंचार की व्यवस्था करें।
  • हर घटना के बाद रोगी का स्तब्धता दूर करने के लिए उसको गर्मी पहुँचाएँ। इसके लिए कंबल, कोट, तथा गरम पानी की बोतल का प्रयोग करें।
  • घायल को जिस स्थिति में आराम मिले उसी में रखें।
  • यदि हड्डी टूटी हो तो उस स्थान को अधिक न हिलाएँ तथा उसी तरह उसे ठीक करने की कोशिश करें।
  • यदि किसी ने विष खाया हो तो उसके प्रतिविष द्वारा विष का नाश करने की व्यवस्था करें।
  • जहाँ तक हो सके, घायल के शरीर पर कसे कपड़े केवल ढीले कर दें, उतारने की कोशिश न करें।
  • जब रोगी कुछ खाने योग्य हो तब उसे चाय, काफी, दूध इत्यादि उत्तेजक पदार्थ पिलाएँ। होश में लाने के लिए स्मेलिंग साल्ट (smelling salt) सुँघाएँ।
  • प्राथमिक उपचारक को डाक्टर के काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, बल्कि उसके सहायक के रूप में कार्य करना चाहिए।

सामान्य ज्ञान अपनी ईमेल पर पाएं!

Leave a Reply

Your email address will not be published.