बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय (Bankim Chandra Chattopadhyay) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Bankim Chandra Chattopadhyay Biography and Interesting Facts in Hindi.

बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान

नामबंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय (Bankim Chandra Chattopadhyay)
उपनामबंकिमचंद्र चटर्जी
जन्म की तारीख27 जून 1838
जन्म स्थानबंगाल (भारत)
निधन तिथि08 अप्रैल 1894
माता व पिता का नामदुर्गादेबी चट्टोपाध्याय / यादव चन्द्र चट्टोपाध्याय
उपलब्धि1875 - भारत के राष्ट्रीय गीत 'वन्दे मातरम्' के रचयिता
पेशा / देशपुरुष / उपन्यासकार / भारत

बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय - भारत के राष्ट्रीय गीत 'वन्दे मातरम्' के रचयिता (1875)

बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय बंगाल के प्रकाण्ड विद्वान् तथा महान् कवि और उपन्यासकार थे। 1874 में प्रसिद्ध देश भक्ति गीत वन्देमातरम् की रचना की जिसे बाद में आनन्द मठ नामक उपन्यास में शामिल किया गया था। वन्देमातरम् गीत को सबसे पहले 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था।

बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म का जन्म 27 जून 1838 को कंठालपाड़ा नैहाटी शहर ,बंगाल में हुआ था| इनके पिता का नाम यादव चन्द्र चट्टोपाध्याय और माता का नाम दुर्गादेबी चट्टोपाध्याय था| इनके पिता मिदनापुर के डिप्टी कलेक्टर के पद पर सरकारी अधिकारी के रूप में कम करते थे| इनके माता पिता की तीन संतान थी ये अपने परिवार में सबसे छोटे थे इनके बड़े भाई संजीब चंद्र चट्टोपाध्याय भी उपन्यासकार थे| और उन्हें उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “पलामू” के लिए जाना जाता है।
बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय की मृत्यु 8 अप्रैल 1894 (55 वर्ष की आयु) को कलकत्ता , बंगाल प्रेसीडेंसी , ब्रिटिश भारत (अब कोलकाता , पश्चिम बंगाल , भारत ) में हुआ था।
बंकिमचंद्र चटर्जी की पहचान बांग्ला कवि, उपन्यासकार, लेखक और पत्रकार के रूप में है। उनकी प्रथम प्रकाशित रचना राजमोहन्स वाइफ थी। इसकी रचना अंग्रेजी में की गई थी। वर्ष 1872 में इन्होने मासिक पत्रिका बंगदर्शन का भी प्रकाशन किया था। अपनी इस पत्रिका में उन्होंने विषवृक्ष (1873) उपन्यास का क्रमिक रूप से प्रकाशन किया है। चट्टोपाध्याय के शुरुआती प्रकाशन ईश्वर चंद्र गुप्ता के साप्ताहिक अखबार सांगबेड प्रभाकर में थे। ईश्वर चंद्र गुप्ता के मॉडल के बाद, उन्होंने अपने साहित्यिक करियर की शुरुआत एक कवि के रूप में की थी। प्रिंट में छपने वाला उनका पहला उपन्यास अंग्रेजी उपन्यास राजमोहन की पत्नी था। दुर्गेशोन्दिनी, उनका पहला बंगाली रोमांस और बंगाली में पहला उपन्यास, 1865 में प्रकाशित हुआ था। बंकिमचंद्र चटर्जी ने केवल 27 वर्ष की उम्र में उन्होंने ‘दुर्गेश नंदिनी" नाम का उपन्यास लिखा था। जिससे उन्हें बहुत प्रसिद्धि हासिल हुई थी। प्रिंट में प्रदर्शित होने वाली उनकी पहली कहानी राजमोहन की पत्नी थी। यह अंग्रेजी में लिखा गया था और इसे अंग्रेजी में लिखा जाने वाला पहला भारतीय उपन्यास माना जाता है। दुर्गेशोन्दिनी, उनका पहला बंगाली रोमांस और बंगाली में पहला उपन्यास, 1865 में प्रकाशित हुआ था। चट्टोपाध्याय ने अप्रैल 1872 में एक मासिक साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन का प्रकाशन शुरू किया, जिसका पहला संस्करण लगभग पूरी तरह से उनके अपने काम से भरा था। पत्रिका ने धारावाहिक उपन्यासों, कहानियों, विनोदी रेखाचित्रों, ऐतिहासिक और विविध निबंधों, सूचनात्मक लेखों, धार्मिक प्रवचनों, साहित्यिक आलोचनाओं और समीक्षाओं को आगे बढ़ाया। विश्रभक्ष चट्टोपाध्याय का पहला उपन्यास है जो बंगारदर्शन में धारावाहिक रूप से प्रदर्शित हुआ। राष्ट्रीय दृष्टि से ‘आनंदमठ" उनका सबसे प्रसिद्ध उपन्यास है। इसी में सर्वप्रथम ‘वन्दे मातरम्" गीत प्रकाशित हुआ था तथा इसके रचयिता बंकिमचंद्र ही थे। बंकिमचंद्र के उपन्यासों का भारत की लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद किया गया है। बांग्ला में सिर्फ बंकिम और शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय को यह गौरव हासिल है। 7 नवंबर 1876 में बंगाल के कांतल पाडा गांव में बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने ‘वंदे मातरम" की रचना की थी।
  Last update :  2022-06-28 11:44:49
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